मनेंद्रगढ़: कोरिया रियासत की दूरदर्शिता से बसा एक योजनाबद्ध शहर


कोरिया बैकुंठपुर। कोरिया स्टेट के तत्कालीन प्रतापी राजा रामानुज प्रताप सिंह देव  की दूरदर्शिता और प्रशासनिक कुशलता का जीवंत उदाहरण है मनेंद्रगढ़ शहर। वर्ष 1925 में राजा साहब ने बाहर से विशेषज्ञों को बुलाकर एक सुव्यवस्थित नक्शा तैयार कराया और अपने मझले पुत्र मनेंद्र प्रताप सिंह देव के नाम पर इस नगर की स्थापना की। उस दौर में जब अधिकांश नगर प्राकृतिक रूप से या बेतरतीब ढंग से बसते थे, तब मनेंद्रगढ़ को एक योजनाबद्ध शहर के रूप में विकसित किया गया, जो आज भी इसे सरगुजा संभाग के अन्य नगरों से अलग पहचान देता है।

मनेंद्रगढ़ की स्थापना से पहले यह क्षेत्र “कारी माटी” के नाम से जाना जाता था। घने जंगलों, उपजाऊ भूमि और सामरिक दृष्टि से महत्वपूर्ण इस स्थान को राजा रामानुज प्रताप सिंह देव ने नगर बसाने के लिए चुना। सुव्यवस्थित सड़कों, निर्धारित बाजार क्षेत्रों, आवासीय इलाकों और प्रशासनिक केंद्रों के साथ मनेंद्रगढ़ को बसाया गया, जिससे यह क्षेत्र जल्द ही व्यापार और प्रशासन का प्रमुख केंद्र बन गया।

इतिहास में एक रोचक प्रसंग भी दर्ज है कि वर्ष 1925 में वर्तमान मनेंद्रगढ़ रेलवे स्टेशन के समीप राजा साहब द्वारा एक शेर का शिकार किया गया था। यह घटना उस समय इस क्षेत्र में मौजूद घने जंगलों और वन्य जीवन की पुष्टि करती है। बाद के वर्षों में जैसे-जैसे नगर का विकास हुआ, जंगल सिमटते गए और मनेंद्रगढ़ एक सुरक्षित व सुसंगठित शहरी क्षेत्र के रूप में उभरने लगा।

मनेंद्रगढ़ के बसने का सबसे बड़ा प्रभाव व्यापारिक गतिविधियों पर पड़ा। पहले पेंड्रा क्षेत्र से होने वाला अधिकांश व्यापार धीरे-धीरे मनेंद्रगढ़ की ओर स्थानांतरित हो गया। रेलवे लाइन की सुविधा, बेहतर सड़क व्यवस्था और सुनियोजित बाजारों के कारण व्यापारी वर्ग ने मनेंद्रगढ़ को अपना नया ठिकाना बनाया। बड़े-बड़े आढ़तिया सेठ, व्यापारी और कारोबारी यहां आकर बसे, जिससे नगर की आर्थिक स्थिति सुदृढ़ हुई और रोजगार के नए अवसर पैदा हुए।

राजा रामानुज प्रताप सिंह देव की नीतियों का परिणाम यह रहा कि मनेंद्रगढ़ केवल एक आवासीय नगर न रहकर शिक्षा, व्यापार और संस्कृति का केंद्र बन गया। यहां विभिन्न समुदायों का शांतिपूर्ण सहअस्तित्व देखने को मिलता है, जिसने नगर को सामाजिक रूप से भी समृद्ध बनाया। आज भी मनेंद्रगढ़ की चौड़ी सड़कें, व्यवस्थित बाजार और नियोजित कॉलोनियां उसके सुनियोजित विकास की कहानी कहती हैं।

बाल्मिक दुबे, वनस्थली कैलाशपुर, कोरिया (छत्तीसगढ़) के अनुसार, मनेंद्रगढ़ का इतिहास केवल एक नगर की स्थापना की कथा नहीं है, बल्कि यह उस दूरदर्शी सोच का प्रतीक है, जिसने अपने समय से आगे बढ़कर विकास की नींव रखी। सरगुजा संभाग में शायद ही कोई अन्य शहर हो, जो इतनी योजना और सोच के साथ बसाया गया हो।

आज मनेंद्रगढ़ अपनी ऐतिहासिक विरासत, व्यापारिक महत्त्व और सुव्यवस्थित ढांचे के कारण पूरे क्षेत्र में विशिष्ट स्थान रखता है। यह नगर कोरिया रियासत की गौरवशाली परंपरा और राजा रामानुज प्रताप सिंह देव की विकासपरक सोच का स्थायी स्मारक है।

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