बुर्के में रखैल को ऑफिस ले जाकर पत्नी बताया,........ आधार-पैन बदलकर सी एम पी एफ,ग्रेजुटी- हड़पी........ चरचा पुलिस ने किया अजीबोगरीब ठगी का खुलासा........ आरोपी पति व उसकी रखैल जेल की सलाखों के पीछे पहुंचे......



नीरज गुप्ता की विशेष रिपोर्ट 

चरचा कॉलरी.......कहते हैं प्यार अंधा होता है, लेकिन थाना चरचा के इस मामले में तो प्यार ने कानून को भी चकमा देने की कोशिश कर डाली। एसईसीएल चरचा के सेवानिवृत्त कर्मचारी कलामुद्दीन खान ने अपनी असली पत्नी को धोखा देने के लिए ऐसी तरकीब अपनाई कि पुलिस भी चौंक गई।मामला तब सामने आया जब पण्डोपारा निवासी 52 वर्षीय नसीमा बेगम ने थाना चरचा में शिकायत दर्ज कराई कि सेवानिवृत होने के बाद उसके पति कलामुद्दीन खान ने अपनी बिना निकाह की रखैल पत्नी कुन्ती को बुर्का पहनाकर एसईसीएल ऑफिस ले गया और वहां मेरी अर्थात वास्तविक पत्नी के नाम से , ग्रेज्युटी, पेंशन व अन्य मदों की राशि निकलवा ली।पुलिस जांच में खुलासा हुआ कि कलामुद्दीन ने नसीमा बेगम के आधार कार्ड और पैन कार्ड में फोटो एडिट कर अपनी रखैल कुन्ती की फोटो लगा दी थी। मजेदार बात यह रही कि एसईसीएल चर्चा में कर्मचारियों के दस्तावेजों में पत्नी की वास्तविक फोटो नहीं रहती इसलिए कर्मचारी जिसे साथ लेकर जाएगा उसे ही पत्नी मान लिया जाता है पुलिस जांच में यह पता चला कि नसीमा बेगम का वास्तविक आधार नंबर 3451 9858 7214 और पैन नंबर CHZPN5068D है।जबकि एसईसीएल चर्चा चरचा ऑफिस में पेश किया गया आधार नंबर 2149 8988 3840 और पैन नंबर QCUPK9879R जो कि कुन्ती के दस्तावेज हैं इस प्रकार नाम नसीमा का, फोटो कुन्ती का और पैसा सीधा खाते में!

शिकायत की गंभीरता को देखते हुए थाना चर्चा पुलिस ने त्वरित कार्रवाई की। पुलिस अधीक्षक श्री रवि कुर्रे, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक सुरेशा चौबे एवं एसडीओपी राजेश साहू के निर्देशन मे 28 जनवरी 2026 को आरोपी पति कलामुद्दीन खान (60 वर्ष) एवं उसकी रखैल कुन्ती (45 वर्ष) को गिरफ्तार कर न्यायिक रिमांड पर भेज दिया गया।

इस कार्रवाई में थाना प्रभारी प्रमोद कुमार पाण्डेय सहित पुलिस टीम की सराहनीय भूमिका रही जिसमें अमित त्रिपाठी, बृजेश सिंह, अजय राजवाड़े, प्रदीप श्याम, भोलाराम जगत, वेदप्रकाश, राजकुमार खाखा, महिला आरक्षक रामकुमारी, रंजना, सैनिक सतीश सिंह एवं रविदास शामिल रहे।

पुलिस का कहना है कि यह मामला न केवल आर्थिक धोखाधड़ी का है, बल्कि सरकारी संस्थानों में दस्तावेज सत्यापन की लापरवाही पर भी सवाल खड़े करता है।रखैल को पत्नी बनाकर सरकारी दफ्तर ले जाना, और आधार-पैन बदलकर पेंशन उड़ाना… आखिरकार कानून की नजर से बच नहीं सका।

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