कोरिया बैकुंठपुर / 21 दिसंबर केंद्र की भाजपा सरकार द्वारा महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) से महात्मा गांधी जी का नाम हटाने एवं मनरेगा योजना को समाप्त करने के विरोध में आज जिला कांग्रेस कमेटी कोरिया जिला अध्यक्ष प्रदीप गुप्ता के नेतृत्व में कांग्रेसजनों ने धरना-प्रदर्शन किया।
जिला अध्यक्ष प्रदीप गुप्ता ने कहा मनरेगा योजना ग्रामीण मजदूरों को पलायन से रोकने का सबसे प्रभावी माध्यम रही है। जब देश में डॉ. मनमोहन सिंह प्रधानमंत्री थे, तब संसद में आम सहमति से मनरेगा कानून पारित हुआ था। यह एक क्रांतिकारी कदम था, जिससे करोड़ों ग्रामीण परिवारों को रोजगार का कानूनी अधिकार मिला और विशेष रूप से वंचित, शोषित, गरीब एवं अतिगरीब वर्ग को सम्मानपूर्वक रोज़ी-रोटी का साधन प्राप्त हुआ।
मनरेगा के माध्यम से लोगों को अपने गांव, अपनी माटी और अपने परिवार के साथ रहकर काम मिला, जिससे मजबूरी में होने वाला पलायन रुका और ग्राम पंचायतों को सशक्त बनाया गया। यह योजना महात्मा गांधी के ग्राम स्वराज के सपने को साकार करने की दिशा में एक ठोस प्रयास थी।
पूर्व विधायक अंबिका सिंह देव ने कहा कि आरोप लगाया कि पिछले 11 वर्षों में मोदी सरकार ने मनरेगा को कमजोर करने के बजाय अब उसे पूरी तरह समाप्त कर दिया है। कोविड काल में यही योजना गरीबों के लिए संजीवनी साबित हुई थी, लेकिन इसके बावजूद सरकार ने बिना किसी विचार-विमर्श, बिना विपक्ष को विश्वास में लिए और बिना जमीनी हकीकत समझे मनरेगा का स्वरूप बदलकर उसे खत्म कर दिया।
योगेश शुक्ला ने कहा पहले केंद्र-राज्य हिस्सेदारी 90:10 थी, जिसे बदलकर 40:60 कर दिया गया, जिससे राज्यों पर आर्थिक बोझ बढ़ा और योजना लागू करना कठिन हो गया। अब यह तय किया जा रहा है कि किसे, कितना और कहां रोजगार मिलेगा — जो पूरी तरह दिल्ली में बैठकर तय किया जाएगा, जबकि ग्रामीण भारत की वास्तविक स्थिति इससे बिल्कुल अलग है।
कांग्रेस ने स्पष्ट कहा कि मनरेगा केवल एक योजना नहीं थी, बल्कि देशहित और जनहित से जुड़ा कानून था। भाजपा सरकार ने मनरेगा को समाप्त कर करोड़ों किसानों, श्रमिकों, भूमिहीनों और ग्रामीण गरीबों के हितों पर सीधा हमला किया है। यह महात्मा गांधी के नाम पर नहीं, बल्कि उनकी विचारधारा पर किया गया प्रहार है।
जिला अध्यक्ष प्रदीप गुप्ता, पूर्व विधायक अंबिका सिंह देव, पीसीसी सदस्य योगेश शुक्ला, महामंत्री बृजवासी तिवारी, वरिष्ठ मुख्तार अहमद, आशीष यादव, बिहारी राजवाड़े, गणेश राजवाड़े, भूपेंद्र यादव, प्रवीर भट्टाचार्य, शैलेन्द्र सिंह, चंद्र प्रकाश राजवाड़े, सुरेंद्र तिवारी, विकाश श्रीवास्तव, धीरज सिंह, रामाधार टोप्पो, आशीष डबरे, अविनाश पाठक, गणेश जायसवाल, अंकित गुप्ता, वसीम अधिवक्ता, सुरेंद्र कुमार, जाग्रत कुर्रे, अनिल सिंह, हीरालाल साहू, संतोष गोयन, इंद्रजीत पांडे, विजय चक्रधारी, स्वतंत्र महबूबिया, राजेश कुर्रे, आरिफ, जानू वसीम, संजय खलखो, एजाज़ गुड्डू, अमित पांडे, अज़ीमुल्ला, कुंवर साय एवं अनेकों कांग्रेस जन उपस्थित रहे।


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