“इलाज वाले बाबा” खुद अस्पताल में: भैयालाल राजवाड़े की सेवा-यात्रा और जनता की दुआ


कोरियाबैकुंठपुर। छत्तीसगढ़ के कोरिया जिले की राजनीति में भैयालाल राजवाड़े का नाम केवल एक विधायक या मंत्री के रूप में नहीं, बल्कि एक संवेदनशील जनसेवक के रूप में जाना जाता है। वर्ष 2015 में जब वे राज्य सरकार में खेल एवं श्रम मंत्री बने, तब विभाग भले ही खेल और श्रम का रहा हो, लेकिन उनका मन और कर्म स्वास्थ्य सेवा में पूरी तरह रमा रहा। वे अक्सर कहा करते थे— “बीमारी इंसान को सिर्फ शरीर से नहीं, जेब से भी तोड़ देती है।” शायद यही सोच थी, जिसने उन्हें फाइलों और बैठकों से आगे बढ़कर सीधे जनता के दुख-दर्द से जोड़ दिया।

रायपुर स्थित उनका सरकारी बंगला धीरे-धीरे एक अनौपचारिक अस्पताल का रूप लेने लगा। कोरिया जिले ही नहीं, बल्कि आसपास के क्षेत्रों से भी लोग ट्रेन पकड़कर रायपुर पहुंचते और सीधे मंत्री के बंगले का रुख करते। गरीब हो या अमीर, ग्रामीण हो या शहरी—सबके लिए उनके दरवाजे समान रूप से खुले रहते थे। रेलवे स्टेशन से बंगले तक आने-जाने के लिए गाड़ियों की व्यवस्था, फिर बंगले से अस्पताल तक इलाज के लिए वाहन—हर स्तर पर मरीजों की सुविधा का ध्यान रखा जाता था।

जब किसी मरीज के पीछे खुद मंत्री खड़े होते थे, तो इलाज में भी कोई कोताही नहीं रहती थी। डॉक्टर और अस्पताल प्रशासन भी पूरी गंभीरता और ईमानदारी से उपचार में जुट जाते थे। यही वजह रही कि भैयालाल राजवाड़े का बंगला गरीब और जरूरतमंदों के लिए “मिनी अस्पताल” के रूप में पहचाना जाने लगा। जनता ने स्नेह और सम्मान से उन्हें एक नाम दे दिया— “इलाज वाले बाबा”।

विडंबना देखिए कि आज वही “इलाज वाले बाबा” स्वयं अस्वस्थ हैं। करीब एक महीने से वे रायपुर के एक निजी अस्पताल में भर्ती हैं। उनकी तबीयत में कभी सुधार होता है, तो कभी फिर बिगड़ जाती है। अभी तक वे अस्पताल से डिस्चार्ज नहीं हो पाए हैं, जिससे क्षेत्र में उनके समर्थकों और आम जनता में चिंता का माहौल है।

हाल ही में उनसे मुलाकात के दौरान जब उनसे कहा गया— “जल्दी स्वस्थ हो जाइए, अभी तो एक पंचवर्षीय और चुनाव लड़ना है,” तो वे हमेशा की तरह मुस्कराए और बोले— “मेरा और कौन सा काम है… जब तक रहूंगा, लोगों के बीच ही रहूंगा।” यह जवाब ही उनकी पूरी राजनीतिक और सामाजिक सोच को बयां कर देता है।

आज जरूरत इस बात की है कि वे लोग, जिन्हें कभी भैयालाल राजवाड़े से प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से मदद मिली हो, जिनके इलाज में उनका सहयोग रहा हो, जिनके दुख में वे ढाल बनकर खड़े रहे हों—सभी उनके उत्तम स्वास्थ्य के लिए प्रार्थना करें। क्षेत्र की जनता ईश्वर से यही कामना कर रही है कि हमारे “इलाज वाले बाबा” जल्द स्वस्थ होकर फिर उसी जिंदादिली और संवेदनशीलता के साथ लोगों के बीच लौटें और अपनी सेवा-यात्रा को आगे बढ़ाएं।

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