नीरज गुप्ता की विशेष रिपोर्ट
कोरिया चरचा कालरी....... कभी छत्तीसगढ़ शासन की अत्यंत महत्वाकांक्षी और सराही गई स्वामी आत्मानंद अंग्रेजी माध्यम विद्यालय योजना आज नगर पालिका शिवपुर चरचा क्षेत्र में अपनी सांसे गिनती नजर आ रही है इस योजना को प्रदेश के गरीब व मध्यम वर्ग के बच्चों को सरल ,सुलभ और गुणवत्तापूर्ण अंग्रेजी शिक्षा उपलब्ध कराने के उद्देश्य प्रारंभ किया गया था वही योजना अब अव्यवस्था, समयाभाव और कमजोर निगरानी के कारण दम तोड़ती नजर आ रही, विद्यालय प्रारंभ होने के समय क्षेत्रीय नागरिकों और अभिभावकों ने इस पहल का खुले दिल से स्वागत किया था, अपेक्षा से कहीं अधिक बच्चों ने प्रवेश लिया ,विद्यालय में चरचा कालरी के अतिरिक्त नगर ,बिशुनपुर, फूलपुर,उमझर ,सरडी, खरवत आदि समीपवर्ती गांव के बच्चे भी पढ़ने आते हैं लेकिन आज की स्थिति यह है कि अभिभावकों का भरोसा डगमगा गया है, कई अभिभावक अपने बच्चों का नाम कटवाकर अन्य विद्यालय में प्रवेश दिलाने को मजबूर हो चुके हैं नगर पालिका शिवपुर–चरचा क्षेत्र में अंग्रेज़ी माध्यम के एकमात्र शासकीय विद्यालय से क्षेत्र के गरीब व मध्यम वर्ग के बच्चों के उज्ज्वल भविष्य की उम्मीदें जुड़ी थीं, वही विद्यालय अब अभिभावकों की निराशा का कारण बन रहा है।
मात्र 3 घंटे होती है पढ़ाई, शिक्षा महज औपचारिक खानापूर्ति......... नगर पालिका शिवपुर चरचा के स्वामी आत्मानंद हिंदी मध्यम व अंग्रेजी माध्यम विद्यालय के लिए एकमात्र भवन है अंग्रेजी माध्यम में लगभग साढे पांच सौ बच्चे हैं वहीं हिंदी माध्यम में भी लगभग तीन सौ छात्र छात्राएं अध्यनरत है विद्यालय भवन में जगह की कमी के चलते दो पालियों में संचालित किया जा रहा है। सुबह की पाली में अंग्रेज़ी माध्यम और दोपहर में हिंदी माध्यम की कक्षाएं लगाई जाती हैं, वर्तमान में सुबह 9 बजे से 12:30 तक अंग्रेजी माध्यम की पढ़ाई होती है वही पौने एक से चार बजे तक हिंदी माध्यम की पढ़ाई होती है जिससे बच्चों को मात्र साढ़े तीन घंटे का ही शैक्षणिक समय मिल पाता है। साढे तीन घंटे के अल्प समय में भोजन अवकाश, खेलकूद और सभी विषयों की पढ़ाई कराना संभव नहीं है विद्यालय में शिक्षा नहीं बल्कि औपचारिकता प्रतीत होती है। प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था पहले ही सुनियोजित योजना के अभाव में जूझ रही है पूरे वर्ष में ग्रीष्मकालीन अवकाश, शीतकालीन अवकाश, सभी धर्म के विभिन्न पर्वों, स्थानीय पर्व, आकस्मिक शोक दिवस,राष्ट्रीय पर्व व दिवसों के अतिरिक्त सांस्कृतिक और खेल आयोजन की छुट्टियां ने पढ़ाई को औपचारिकता बना दिया है प्रदेश के राजनीतिक दलों द्वारा वोट बैंक की राजनीति के चलते वर्ग विशेष के लिए काफी ज्यादा छुट्टियां घोषित कर दी गई हैं जिसका खामियाजा बच्चों को भुगतना पड़ रहा है ऐसी स्थिति में यह उम्मीद करना कि क्षेत्र के बच्चे बाहर होने वाली प्रतियोगी परीक्षाओं में सफल होंगे स्वयं को भ्रम में रखने जैसा है ,वर्तमान स्थिति यह है कि अभिभावकों का भरोसा लगातार कम हो रहा है और कई पालक अपने बच्चों को अन्य विद्यालयों में दाखिला दिलाने को विवश हैं। यह हाल तब है जब शासन के पास योग्य शिक्षक उपलब्ध हैं, परंतु समय प्रबंधन की अव्यवस्था और मॉनिटरिंग की कमी ,योजना की आत्मा को ही कमजोर कर रही है।
कलेक्टर कोरिया से सुधार की अपील......नगर के जागरूक नागरिकों एवं अभिभावकों द्वारा कलेक्टर कोरिया से इस विषय में हस्तक्षेप की मांग की जा रही है। उनसे आग्रह किया गया है कि
आत्मानंद विद्यालय को एक पाली में संचालित किया जाए जिससे शैक्षणिक समय बढ़ सके,,विद्यालय के समीप स्थित सेशन मेमोरियल स्कूल के खाली भवन का जीणोद्धार कर पर हिंदी माध्यम के लिए कक्षा संचालित की जाए अथवा वहां खाली पड़े भूमि पर पृथक भवन का निर्माण कराया जाए,ताकि बच्चों को पर्याप्त शैक्षणिक समय मिल सके और योजना अपने मूल उद्देश्य को प्राप्त कर सके
कोट–टाई से नहीं, गुणवत्ता से बनेगा भविष्य...... स्वामी आत्मानंद विद्यालय के बच्चों को कोट और टाई पहनाने से शिक्षा का स्तर नहीं सुधरता। जब पढ़ाई के लिए समय, अनुशासन और गुणवत्ता ही नहीं होगी, तो उनसे प्रतियोगी परीक्षाओं में सफलता की उम्मीद करना बेमानी है। जब बुनियादी शिक्षण की योग्यता ही नहीं होगी तो भविष्य में वही बच्चे मजबूरी में मजदूरी करने को विवश होंगे ,शिक्षा व्यवस्था की यह स्थिति आने वाले समय में क्षेत्र के बच्चों के भविष्य पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगा रही है।
पालिका क्षेत्र का यह दुर्भाग्य कहा जाएगा कि ना तो अभिभावकों में अपेक्षित जागरूकता है और ही ना ही राजनीतिक दलों की दृष्टि में बच्चों का भविष्य,अब देखना यह है कि प्रशासन और जनप्रतिनिधि इस ओर कब तक आंखें मूंदे रहते हैं, यदि समय रहते सुधार नहीं किया गया तो यह आत्मानंद स्कूल शिक्षा का मॉडल नहीं बल्कि शिक्षा व्यवस्था की विफलता का प्रतीक बनकर रह जाएगा।

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