जामवंत अपडेट : मनेन्द्रगढ़ क्षेत्र में वन विभाग अलर्ट, मादा भालू की लगातार दहाड़ से दहशत का पटाक्षेप


मनेन्द्रगढ़ । मनेन्द्रगढ़ क्षेत्र में लंबे समय से विवादों और दहशत का कारण बने जामवंत (भालू) को पकड़ने में आखिरकार वन विभाग को सफलता मिली है। दो शावकों के पिंजड़े में कैद होने के बाद मादा भालू कॉलेज के नीचे क्षेत्र में पहुंच गई है, जिससे इलाके में तनाव और सतर्कता का माहौल बना हुआ है। मादा भालू की लगातार दहाड़ सुनाई दे रही है, जिससे यह आशंका जताई जा रही है कि वह अपने शावकों के पकड़े जाने के कारण आक्रामक हो सकती है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, मनेन्द्रगढ़ क्षेत्र में पिछले काफी समय से भालू की गतिविधियों को लेकर आमजन भयभीत थे। कई बार भालू के रिहायशी इलाकों में आने, फसलों को नुकसान पहुंचाने और लोगों पर हमले की आशंका को लेकर सवाल उठते रहे। इन घटनाओं के चलते वन विभाग की कार्यप्रणाली पर भी लगातार सवाल खड़े हो रहे थे। ऐसे में दो शावकों को सुरक्षित रूप से पकड़ना वन विभाग के लिए एक बड़ी सफलता मानी जा रही है।

हालांकि शावकों के पकड़े जाने के बाद स्थिति और अधिक संवेदनशील हो गई है। बताया जा रहा है कि मादा भालू अपने शावकों की तलाश में कॉलेज के नीचे और आसपास के क्षेत्रों में घूम रही है। उसकी दहाड़ लगातार सुनाई दे रही है, जिससे यह स्पष्ट है कि वह बेचैन और आक्रोशित है। वन्यजीव विशेषज्ञों के अनुसार, इस तरह की स्थिति में मादा भालू अत्यंत आक्रामक हो सकती है और किसी भी खतरे को महसूस होने पर हमला कर सकती है।

स्थिति की गंभीरता को देखते हुए हसदेव इन के समीप स्थित सड़क को वन-वे कर दिया गया है। इस मार्ग पर आवागमन को नियंत्रित किया जा रहा है ताकि किसी भी अप्रिय घटना से बचा जा सके। वन विभाग की टीम मौके पर तैनात है और लगातार मादा भालू की गतिविधियों पर निगरानी रखी जा रही है। ड्रोन और अन्य तकनीकी संसाधनों की मदद से भी क्षेत्र पर नजर रखी जा रही है।

वन विभाग द्वारा आम नागरिकों से अपील की गई है कि वे अफवाहों पर ध्यान न दें और बिना आवश्यकता के घरों से बाहर न निकलें। विशेष रूप से कॉलेज परिसर, हसदेव इन के आसपास और जंगल से सटे इलाकों में जाने से बचने की सलाह दी गई है। ग्रामीणों और स्थानीय लोगों को सतर्क किया जा रहा है तथा मुनादी के माध्यम से भी जागरूकता फैलाई जा रही है।

वन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि मादा भालू को सुरक्षित रूप से पकड़ने के प्रयास जारी हैं। प्राथमिकता यह है कि न तो किसी व्यक्ति को नुकसान पहुंचे और न ही भालू को। विशेषज्ञों की टीम को भी अलर्ट पर रखा गया है, ताकि आवश्यकता पड़ने पर बेहोशी का इंजेक्शन देकर मादा भालू को काबू में किया जा सके।

फिलहाल पूरा मनेन्द्रगढ़ क्षेत्र सतर्कता के दौर से गुजर रहा है। वन विभाग की इस कार्रवाई से जहां लोगों में राहत की उम्मीद जगी है, वहीं मादा भालू की आक्रामक गतिविधियों को देखते हुए खतरा अभी टला नहीं है। आने वाले समय में वन विभाग की रणनीति और सतर्कता ही इस स्थिति का सुरक्षित समाधान सुनिश्चित करेगी।

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