नीरज गुप्ता की विशेष रिपोर्ट
कोरिया चरचा कालरी.....नगर पालिका शिवपुर चरचा क्षेत्र के दैनिक एवं साप्ताहिक हाट बाजार में आने वाले व्यापारियों और स्थानीय नागरिकों की सुविधा के लिए छत्तीसगढ़ राज्य कृषि विपणन बोर्ड के माध्यम से ₹27.30 लाख की लागत से तीन हाट बाजार निर्माण कार्य कराया जा रहा है। लगभग 25 दिन पूर्व बैकुंठपुर विधायक एवं छत्तीसगढ़ शासन के पूर्व मंत्री भैयालाल राजवाड़े के करकमलों से इसका भव्य भूमिपूजन भी हुआ था। लेकिन निर्माण शुरू होते ही कार्य की गुणवत्ता और विभागीय निगरानी को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
स्थानीय लोगों के अनुसार कार्य प्रारंभ होने से लेकर अब तक निर्माण स्थल पर विभागीय इंजीनियर की नियमित अथवा मौके पर निगरानी दिखाई नहीं दी। ऐसे में सवाल उठता है कि लाखों रुपये के इस शासकीय निर्माण कार्य की तकनीकी गुणवत्ता की जांच आखिर कौन कर रहा है? कृषि विपणन बोर्ड का यह कार्य दूध की रखवाली बिल्ली से कराए जाने वाली कहावत को चरितार्थ कर रहा है।
सरिया की बाइंडिंग में प्रथम दृष्टया गंभीर अनियमितता........हॉट बाजार निर्माण स्थल के कार्य में फाउंडेशन/बेस के सरिया की बाइंडिंग और रिंगों की दूरी को लेकर भी सवाल दिखाई देते हैं। जहां स्वीकृत तकनीकी डिजाइन एवं स्ट्रक्चरल ड्राइंग के अनुसार निर्धारित स्पेसिंग का पालन किया जाना चाहिए, वहीं मौके पर फाउंडेशन में पतले सरिया लगाए गए हैं और वह भी एक-एक फीट की दूरी पर लगे है सरिया की दूरी काफी अधिक नजर आ रही है। सरफेस बीम में भी शासकीय नियमों के विपरीत कई स्थानों पर लोहे के रिंगों के बीच की दूरी एक फीट से भी अधिक है।
इसी तरह कॉलम के लिए लगाए गए मुख्य सरियों को नीचे के बेस क्षेत्र में जिस प्रकार बांधा गया है, उसकी स्पेसिंग और सरिया के व्यास की भी तकनीकी जांच आवश्यक है। केवल आंखों के सामने निर्माण पूरा कर देने से काम गुणवत्तापूर्ण नहीं हो जाता—इसके लिए स्वीकृत नक्शा, डिजाइन, BOQ और तकनीकी मापदंडों का पालन जरूरी हैनिर्माण के दौरान डाली जा रही कंक्रीट में सीमेंट की मात्रा को लेकर भी स्थानीय स्तर पर सवाल उठ रहे हैं। यदि निर्धारित मिश्रण अनुपात के अनुरूप कंक्रीट तैयार नहीं की जा रही है तो इससे निर्माण की मजबूती, टिकाऊपन और भार सहने की क्षमता प्रभावित हो सकती है। ऐसे में पूरे कार्य की तकनीकी जांच और आवश्यकतानुसार कंक्रीट की गुणवत्ता संबंधी परीक्षण कराया जाना चाहिए।
न बोर्ड, न कार्य की पूरी जानकारी—कहां गई पारदर्शिता?.......शासकीय निर्माण कार्य में आमतौर पर कार्यस्थल पर ऐसा सूचना बोर्ड लगाया जाता है, जिसमें कार्य का नाम, स्वीकृत लागत, निर्माण एजेंसी, कार्य प्रारंभ एवं पूर्णता की निर्धारित तिथि तथा संबंधित विभाग जैसी आवश्यक जानकारी प्रदर्शित होती है। लेकिन यहां ऐसा बोर्ड नजर नहीं आ रहा है।
विडंबना यह है कि जिस कार्य का भूमिपूजन विधायक भैयालाल राजवाड़े ने किया था, उसका भूमिपूजन/शिलान्यास बोर्ड भी अब निर्माण स्थल से गायब बताया जा रहा है। विधायक भैया लाल राजवाड़े सदैव गुणवत्ता कार्य की बात कहते हैं किंतु यह कार्य उनकी सोच और दूर दृष्टि के विपरीत उन्हें ठेंगा दिखा रहा।
27 लाख रूपों का सवाल—जांच होगी या सिर्फ निर्माण पूरा कर दिया जाएगा.........यह मामला केवल सरिया या सीमेंट की मात्रा का नहीं, बल्कि जनता के पैसों से हो रहे निर्माण की गुणवत्ता और जवाबदेही का है। यदि अभी निर्माण के शुरुआती चरण में ही तकनीकी मानकों की अनदेखी हो रही है तो भविष्य में यह भवन कितने समय तक टिकेगा, यह बड़ा सवाल है।स्थानीय नागरिकों ने मांग की है कि ₹27.30 लाख के इस निर्माण कार्य की तत्काल तकनीकी जांच कराई जाए। स्वीकृत ड्राइंग, BOQ एवं एस्टीमेट के अनुसार सरिया की मोटाई और स्पेसिंग, रिंगों की दूरी, कंक्रीट का अनुपात, नींव की गुणवत्ता तथा प्रयुक्त सामग्री की जांच की जाए। साथ ही निर्माण स्थल पर विभागीय इंजीनियर की नियमित निगरानी सुनिश्चित की जाए सरकारी धन से बनने वाला हाट बाजार यदि अभी से गुणवत्ता की कसौटी पर सवालों के घेरे में है, तो विभाग को निर्माण पूरा होने का इंतजार करने के बजाय इसी चरण में जवाब देना चाहिए—आखिर ₹27.30 लाख की लागत से बन रहे इस निर्माण की गुणवत्ता की जिम्मेदारी किसकी है? जिला प्रशासन कोरिया को तत्काल लिस्ट गंभीर मुद्दे पर संज्ञान लेना चाहिए और अभी तक किए हुए कार्यों की सूक्ष्म जांच तत्काल करनी चाहिए ताकि आगे का काम गुणवत्ता पूर्वक हो सके।

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