विश्व आत्महत्या रोकथाम दिवस: कोरिया में चार दिवसीय जागरूकता कार्यक्रम, बदलेगी आत्महत्या को लेकर सोच और बातचीत का तरीका


कोरिया बैकुंठपुर । विश्व आत्महत्या रोकथाम दिवस के अवसर पर वर्ष 2026 की थीम “Changing the Narrative on Suicide” रखी गई है। इसका हिंदी भावार्थ “आत्महत्या के बारे में सोच और बातचीत के तरीके को बदलना” है। इस वर्ष की थीम का उद्देश्य आत्महत्या को लेकर समाज में व्याप्त कलंक और मिथकों को कम करना तथा मानसिक स्वास्थ्य और आत्महत्या जैसे संवेदनशील विषयों पर खुलकर, संवेदनशीलता और जिम्मेदारी के साथ बातचीत को बढ़ावा देना है।

जिला कलेक्टर श्रीमती रोक्तिमा यादव एवं मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. प्रशांत सिंह के आदेशानुसार जिला मानसिक स्वास्थ्य टीम द्वारा कोरिया जिले में इस विषय को लेकर विभिन्न जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। इन कार्यक्रमों के माध्यम से विद्यार्थियों और आमजन को मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूक करने, संकट की स्थिति में व्यक्ति को समझने, उसकी बात सुनने तथा उसे उचित सहायता और मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं से जोड़ने पर विशेष जोर दिया जा रहा है।

चार स्थानों पर होंगे जागरूकता कार्यक्रम

जिला मानसिक स्वास्थ्य टीम द्वारा निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार चार दिनों तक विभिन्न विद्यालयों में जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।

09 सितंबर 2026 को शासकीय कन्या उच्चतर माध्यमिक विद्यालय, बैकुंठपुर में कार्यक्रम आयोजित किया गया। इसके बाद 10 सितंबर 2026 को स्वामी आत्मानंद शासकीय इंग्लिश स्कूल, महलपारा में जागरूकता कार्यक्रम होगा।

इसी क्रम में 11 सितंबर 2026 को शासकीय रामानुज उच्चतर माध्यमिक विद्यालय, बैकुंठपुर तथा 12 सितंबर 2026 को स्वामी आत्मानंद शासकीय हिंदी माध्यम उत्कृष्ट विद्यालय, खरबत, बैकुंठपुर में कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा।

कार्यक्रमों में मानसिक स्वास्थ्य, तनाव, भावनात्मक समस्याओं तथा संकट की परिस्थितियों को समझने के साथ-साथ जरूरतमंद व्यक्ति के साथ संवेदनशील व्यवहार करने और समय रहते सहायता उपलब्ध कराने के संबंध में जानकारी दी जा रही है।

कलंक और मिथकों को कम करना जरूरी

आत्महत्या की रोकथाम के लिए केवल उपचार ही नहीं, बल्कि समाज में इस विषय को लेकर सही समझ विकसित करना भी आवश्यक है। अक्सर मानसिक परेशानी से गुजर रहे व्यक्ति अपनी समस्या खुलकर साझा नहीं कर पाते। सामाजिक दबाव, शर्म, उपेक्षा अथवा गलत धारणाओं के कारण वे सहायता लेने से भी बच सकते हैं।

ऐसे में वर्ष 2026 की थीम का प्रमुख संदेश है कि आत्महत्या जैसे संवेदनशील विषय पर चुप्पी के बजाय संवेदनशील संवाद को बढ़ावा दिया जाए। संकट में मौजूद व्यक्ति की बात बिना किसी निर्णय या आलोचना के सुनी जाए तथा आवश्यकता पड़ने पर उसे मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों तक पहुंचाया जाए।

जिला अस्पताल में उपलब्ध है मानसिक स्वास्थ्य सेवा

मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. प्रशांत सिंह ने बताया कि जिला अस्पताल में प्राथमिक स्तर पर मानसिक रोगियों के परीक्षण, दवा एवं साइकोथेरेपी की सुविधा उपलब्ध है। यह सेवाएं ओपीडी नंबर 09 में प्रदान की जाती हैं। यहां मेडिकल ऑफिसर, क्लिनिकल साइकोलॉजिस्ट एवं साइकिएट्रिक सोशल वर्कर अपनी सेवाएं देते हैं।

उन्होंने कहा कि मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी किसी भी समस्या को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। समय पर पहचान, उचित परामर्श, उपचार और परिवार एवं समाज का सहयोग मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रहे व्यक्ति के लिए महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

संकट में व्यक्ति को सुनना और सहायता से जोड़ना जरूरी

जागरूकता अभियान का उद्देश्य यह संदेश देना भी है कि किसी व्यक्ति के व्यवहार में अचानक बदलाव, अत्यधिक तनाव, निराशा या भावनात्मक संकट दिखाई देने पर उसे अकेला छोड़ने के बजाय उसकी बात सुनी जाए और जरूरत पड़ने पर विशेषज्ञ सहायता से जोड़ा जाए।

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, दुनिया में हर वर्ष 7.2 लाख से अधिक लोगों की मृत्यु आत्महत्या के कारण होती है। ऐसे में आत्महत्या की रोकथाम को महत्वपूर्ण सार्वजनिक स्वास्थ्य मुद्दे के रूप में देखा जाता है।

जिला मानसिक स्वास्थ्य टीम द्वारा आयोजित जागरूकता कार्यक्रमों के माध्यम से विद्यार्थियों और समाज के बीच मानसिक स्वास्थ्य को लेकर सकारात्मक सोच विकसित करने, आत्महत्या से जुड़े कलंक को कम करने और जरूरतमंद लोगों तक सहायता पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है। साथ ही मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच बेहतर बनाने तथा वैज्ञानिक एवं प्रमाण-आधारित आत्महत्या रोकथाम उपायों के प्रति जागरूकता बढ़ाने पर भी जोर दिया जा रहा है।

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