कोरिया बैकुंठपुर । छत्तीसगढ़ विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद के प्रायोजन तथा जिला शिक्षा अधिकारी, कोरिया के मार्गदर्शन में राष्ट्रीय बाल विज्ञान कांग्रेस शोध प्रतियोगिता की तैयारियों को लेकर जिले के विज्ञान एवं गणित विषय के शिक्षकों की एकदिवसीय कार्यशाला का आयोजन शासकीय आदर्श कन्या उच्चतर माध्यमिक विद्यालय, बैकुण्ठपुर में किया गया। कार्यशाला में जिले के पूर्व माध्यमिक, उच्च एवं उच्चतर माध्यमिक विद्यालयों में कार्यरत लगभग 200 व्याख्याताओं एवं शिक्षकों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।
कार्यशाला का शुभारंभ जिला शिक्षा अधिकारी जितेन्द्र गुप्ता द्वारा विद्यादायिनी मां सरस्वती के पूजन एवं दीप प्रज्ज्वलन के साथ किया गया। अपने उद्बोधन में जिला शिक्षा अधिकारी ने कहा कि विद्यार्थियों में वैज्ञानिक दृष्टिकोण विकसित करना आज की सबसे बड़ी आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि विद्यालय में प्रवेश करते ही ऐसा विज्ञानमय वातावरण होना चाहिए, जो विद्यार्थियों में जिज्ञासा, नवाचार और अनुसंधान की भावना को जागृत करे। उन्होंने शिक्षकों से आह्वान किया कि वे बच्चों को केवल पाठ्यक्रम तक सीमित न रखें, बल्कि उन्हें वैज्ञानिक सोच और प्रयोगधर्मिता की ओर भी प्रेरित करें। उन्होंने आश्वस्त किया कि जिले के शिक्षकों एवं विद्यार्थियों को विज्ञान शिक्षा के क्षेत्र में हर संभव सहयोग प्रदान किया जाएगा।
कार्यशाला में विशिष्ट अतिथि के रूप में आयोजक संस्था के प्राचार्य अमृतलाल गुप्ता तथा सहायक संचालक कौशिक भद्रा उपस्थित रहे। दोनों अतिथियों ने अपने संबोधन में राष्ट्रीय बाल विज्ञान कांग्रेस के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि यह मंच विद्यार्थियों की वैज्ञानिक प्रतिभा को निखारने का उत्कृष्ट अवसर प्रदान करता है। उन्होंने शिक्षकों से अधिकाधिक विद्यार्थियों को प्रतियोगिता से जोड़ने तथा गुणवत्तापूर्ण शोध परियोजनाएं तैयार कराने का आह्वान किया।
राष्ट्रीय बाल विज्ञान कांग्रेस, कोरिया के जिला समन्वयक हरिकान्त अग्निहोत्री ने कार्यशाला में बाल वैज्ञानिकों द्वारा तैयार की जाने वाली शोध परियोजनाओं की रूपरेखा, चयन प्रक्रिया तथा मूल्यांकन के विभिन्न पहलुओं की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने इस वर्ष की प्रतियोगिता के मुख्य कथानक "स्थिरता के लिए विज्ञान और नवाचार" पर विस्तार से चर्चा करते हुए बताया कि विद्यार्थियों को स्थानीय समस्याओं के समाधान आधारित शोध कार्यों के लिए प्रेरित किया जाएगा।
इस अवसर पर स्रोत शिक्षक नरेन्द्र प्रसाद दुबे, अखिलेश तिवारी, कमल डड़सेना, विनय तिवारी एवं श्रीमती जिज्ञासा दुबे ने मुख्य कथानक एवं उससे जुड़े सभी उपकथानकों की विस्तारपूर्वक जानकारी दी। उन्होंने संभावित शोध विषयों, परियोजना निर्माण की प्रक्रिया, आंकड़ों के संकलन, प्रस्तुतीकरण की तकनीक तथा नवाचार आधारित शोध कार्यों के विभिन्न आयामों पर शिक्षकों को व्यावहारिक मार्गदर्शन प्रदान किया।
कार्यशाला के दौरान शिक्षकों ने राष्ट्रीय बाल विज्ञान कांग्रेस से जुड़े विभिन्न विषयों पर अपने प्रश्न भी रखे, जिनका विशेषज्ञों ने विस्तार से समाधान किया। कार्यक्रम के अंत में सभी प्रतिभागियों ने इस प्रकार के प्रशिक्षण को अत्यंत उपयोगी बताते हुए विश्वास व्यक्त किया कि इससे जिले के विद्यार्थी राष्ट्रीय बाल विज्ञान कांग्रेस में बेहतर प्रदर्शन कर जिले का नाम प्रदेश एवं राष्ट्रीय स्तर पर गौरवान्वित करेंगे।यदि चाहें तो इसे स्थानीय दैनिक समाचार पत्र की शैली में और अधिक प्रभावशाली तथा आकर्षक बनाया जा सकता है।

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