'बगलामुखी अनुसंधान केंद्र' परिवार की ओर से माँ पीतांबरा (माँ बगलामुखी) के पावन स्मरण के अवसर पर श्रद्धालुओं एवं सनातन धर्म के अनुयायियों को शुभकामनाएँ एवं सादर प्रणाम प्रेषित किए गए। इस अवसर पर कहा गया कि माँ बगलामुखी दशमहाविद्याओं में आठवीं महाविद्या के रूप में पूजित हैं और उन्हें स्तंभन शक्ति की अधिष्ठात्री देवी माना जाता है। उनकी आराधना से साधकों को आध्यात्मिक शक्ति, आत्मविश्वास तथा जीवन की कठिन परिस्थितियों का सामना करने की ऊर्जा प्राप्त होती है।
केंद्र की ओर से जारी संदेश में बताया गया कि माँ पीतांबरा की कृपा से केवल बाहरी शत्रुओं, मुकदमों, विरोधियों एवं विभिन्न प्रकार की बाधाओं का ही निवारण नहीं होता, बल्कि मनुष्य के भीतर विद्यमान काम, क्रोध, लोभ, मोह और अहंकार जैसे आंतरिक विकारों का भी शमन होता है। यही कारण है कि माँ बगलामुखी की साधना को आत्मशुद्धि एवं आत्मबल प्राप्त करने का प्रभावी माध्यम माना जाता है।
संदेश में श्रद्धालुओं से आह्वान किया गया कि वे माँ बगलामुखी की उपासना श्रद्धा, विश्वास एवं विधि-विधान के साथ करें तथा सत्य, संयम और धर्म के मार्ग पर चलते हुए अपने जीवन को सफल एवं सार्थक बनाएँ। केंद्र के अनुसार माँ की कृपा से साधक के जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और विपरीत परिस्थितियों में भी विजय प्राप्त करने का मार्ग प्रशस्त होता है।
'बगलामुखी अनुसंधान केंद्र' ने सभी श्रद्धालुओं के सुख, समृद्धि, उत्तम स्वास्थ्य एवं आध्यात्मिक उन्नति की कामना करते हुए माँ पीतांबरा से प्रार्थना की कि वे समस्त भक्तों पर अपनी असीम कृपा बनाए रखें तथा सभी के जीवन से भय, संकट और नकारात्मकता का नाश कर धर्म, शांति और कल्याण का मार्ग प्रशस्त करें।

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