सड़क हादसों में तिल-तिल कर मर रहे गौवंश, जिम्मेदार बेखबर; नगर पालिका बैकुंठपुर पर बढ़ा अंतिम संस्कार का बोझ


कोरिया बैकुंठपुर । नगर पालिका परिषद बैकुंठपुर एवं आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में आवारा गौवंश सड़क दुर्घटनाओं का लगातार शिकार हो रहे हैं। बरसात का मौसम शुरू होते ही मुख्य सड़कों और राष्ट्रीय राजमार्गों पर बड़ी संख्या में गौवंश का जमावड़ा लगने से दुर्घटनाओं की आशंका कई गुना बढ़ जाती है। इसके बावजूद संबंधित पंचायतों और जिम्मेदार विभागों द्वारा न तो गौवंश को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने की कोई ठोस व्यवस्था की जा रही है और न ही दुर्घटनाओं की रोकथाम के लिए प्रभावी कदम उठाए जा रहे हैं।

गुरुवार को भाड़ी स्थित शगुन गार्डन के सामने सड़क दुर्घटना में दो गौवंश की दर्दनाक मौत हो गई। घटना के बाद स्थानीय लोगों ने इसकी सूचना संबंधित अधिकारियों को दी, लेकिन पंचायत स्तर पर कोई जनप्रतिनिधि या जिम्मेदार अधिकारी मौके पर नहीं पहुंचा। अंततः नगर पालिका परिषद बैकुंठपुर की जेसीबी और कर्मचारियों को मौके पर पहुंचकर मृत गौवंश का अंतिम संस्कार कराना पड़ा।


स्थानीय लोगों का कहना है कि यह पहली घटना नहीं है। आए दिन सड़क दुर्घटनाओं में गौवंश की मौत हो रही है, लेकिन जिम्मेदार संस्थाएं केवल हादसे के बाद औपचारिक कार्रवाई तक सीमित रह जाती हैं। जिन क्षेत्रों में दुर्घटनाएं होती हैं, वहां की ग्राम पंचायतों के सरपंच, पंच और अन्य जनप्रतिनिधियों की जिम्मेदारी बनती है कि वे गौवंश की सुरक्षा तथा मृत पशुओं के उचित निस्तारण की व्यवस्था करें, लेकिन अधिकांश मामलों में उनकी सक्रियता नजर नहीं आती।

बताया जा रहा है कि कई बार दुर्घटना स्थल नगर पालिका बैकुंठपुर की सीमा से बाहर होने के बावजूद मानवीय आधार पर नगर पालिका की जेसीबी और कर्मचारी पहुंचकर मृत गौवंश का अंतिम संस्कार कराते हैं। इससे नगर पालिका पर अतिरिक्त जिम्मेदारी और संसाधनों का बोझ बढ़ रहा है।

क्षेत्रवासियों ने प्रशासन से मांग की है कि सड़कों पर विचरण करने वाले निराश्रित गौवंश के लिए स्थायी व्यवस्था की जाए, सक्रिय गौशालाओं का संचालन सुनिश्चित किया जाए तथा ग्राम पंचायतों की जवाबदेही तय की जाए। साथ ही बरसात के दौरान संवेदनशील मार्गों पर विशेष निगरानी, चेतावनी संकेत और गौवंश को सड़क से हटाने की नियमित व्यवस्था लागू की जाए, ताकि लगातार हो रही दुर्घटनाओं पर रोक लग सके और बेजुबान पशुओं की जान बचाई जा सके। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि यदि समय रहते प्रभावी कदम नहीं उठाए गए तो सड़क हादसों में गौवंश की मौत का सिलसिला आगे भी जारी रहेगा।

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