नीरज गुप्ता की विशेष रिपोर्ट
कोरिया चरचा कालरी.......कोरियाजिले के चर्चित निजी शिक्षण संस्थान मार्गदर्शन पब्लिक स्कूल एक बार फिर विवादों में है। नगर पालिका शिवपुर-चर्चा निवासी छात्र सानु राय को कक्षा 12वीं उत्तीर्ण करने के लगभग एक वर्ष बाद अपनी अंकसूची एवं स्थानांतरण प्रमाण-पत्र (टीसी) प्राप्त हो सका। यह संभव हुआ छात्र के लगातार एक वर्ष तक चले संघर्ष तथा कलेक्टर कोरिया एवं जिला शिक्षा अधिकारी जितेंद्र गुप्ता की प्रभावी पहल के बाद।
सूत्रों के अनुसार मार्गदर्शन पब्लिक स्कूल पर पूर्व में भी अनेकs छात्र-छात्राओं द्वारा मनमानी, अतिरिक्त राशि की मांग तथा अभिभावकों के साथ असहयोगपूर्ण व्यवहार के आरोप लगाए जाते रहे हैं। क्षेत्र में विद्यालय प्रबंधन की कार्यशैली लंबे समय से चर्चा का विषय रही है।छात्र सानु राय ने वर्ष 2024-25 में मार्गदर्शन पब्लिक स्कूल से कक्षा 12वीं की परीक्षा उत्तीर्ण की। छात्र का कहना है कि उसने विद्यालय का निर्धारित समस्त शुल्क समय पर जमा कर दिया था। इसके बावजूद विद्यालय के कर्मचारियों द्वारा प्रायोगिक परीक्षा (प्रैक्टिकल) कराने के नाम पर *5,000 रुपये* की अतिरिक्त मांग की गई।
इतना ही नहीं, छात्र का आरोप है कि विद्यालय की एक शिक्षिका द्वारा टीसी जारी करने के एवज में *700 रुपये* अतिरिक्त मांगे गए। राशि नहीं देने पर अंकसूची एवं टीसी रोक दी गई। इस दौरान विद्यालय के विभिन्न कर्मचारी समय-समय पर मोबाइल फोन के माध्यम से भी पैसे की मांग करते रहे, जिसकी ऑडियो रिकॉर्डिंग छात्र ने सुरक्षित रखी।
मानसिक तनाव के बीच एक वर्ष तक करता रहा संघर्ष.....आर्थिक रूप से कमजोर छात्र सानु राय पूरे मामले से मानसिक रूप से बेहद परेशान रहा। अपने भविष्य को लेकर चिंतित छात्र ने हार नहीं मानी और लगातार संबंधित अधिकारियों के समक्ष न्याय की गुहार लगाता रहा। अंततः उसने कलेक्टर कोरिया को आवेदन देकर पूरी जानकारी उपलब्ध कराई।कलेक्टर ने मामले की गंभीरता को देखते हुए आवेदन जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय को भेजते हुए आवश्यक जांच एवं कार्रवाई के निर्देश दिए।मामले की जानकारी मिलते ही जिला शिक्षा अधिकारी जितेंद्र गुप्ता ने तत्काल जांच दल का गठन कर विद्यालय भेजा। जांच के दौरान छात्र और विद्यालय के कर्मचारी आमने-सामने रहे, जबकि विद्यालय का प्रबंधन एवं संचालक उपस्थित नहीं रहे।
जांच दल ने विद्यालय कर्मचारियों से अतिरिक्त राशि की मांग, दस्तावेज रोकने तथा छात्र द्वारा प्रस्तुत ऑडियो रिकॉर्डिंग को लेकर कई तीखे सवाल पूछे। रिकॉर्डिंग भी सुनी गई तथा पूरी रिपोर्ट जिला शिक्षा अधिकारी को सौंपी गई।
जांच के बाद जिला शिक्षा अधिकारी जितेंद्र गुप्ता की पहल पर विद्यालय प्रबंधन ने तत्काल छात्र सानु राय को उसकी अंकसूची, स्थानांतरण प्रमाण-पत्र (टीसी) तथा अन्य आवश्यक दस्तावेज उपलब्ध करा दिए।
डीईओ ने छात्र का बढ़ाया हौसला......
दस्तावेज मिलने के बाद जिला शिक्षा अधिकारी जितेंद्र गुप्ता ने छात्र सानु राय को अपने पास बैठाकर उसका मनोबल बढ़ाया। छात्र के शारीरिक स्वास्थ्य को देखते हुए उसे सेना सहित विभिन्न प्रतियोगी क्षेत्रों में प्रयास करने के लिए प्रेरित किया तथा विश्वास जताया कि वह भविष्य में जिले का नाम रोशन करेगा।
शिक्षा के क्षेत्र में कोरिया जिले में जितेंद्र गुप्ता का पूर्व का कार्यकाल भी उल्लेखनीय माना जाता है। उनके नेतृत्व में जिले के विद्यार्थियों ने अनेक उपलब्धियां हासिल की थीं। एक संक्षिप्त स्थानांतरण अवधि के बाद पुनः जिले की जिम्मेदारी मिलने से यह उम्मीद जताई जा रही है कि निजी विद्यालयों की मनमानी पर प्रभावी अंकुश लगेगा।
सीबीएसई को विद्यालय ने भेजी भ्रामक जानकारी.....छात्र सानु राय ने मामले की शिकायत सीबीएसई बोर्ड से भी की थी। शिकायत के बाद बोर्ड द्वारा विद्यालय प्रबंधन को नोटिस जारी किया गया।छात्र के अनुसार विद्यालय प्रबंधन ने बोर्ड को भेजे अपने जवाब में दावा किया कि छात्र पर दो वर्षों की एक लाख बीस हजार रुपये फीस बकाया है। वहीं छात्र का कहना है कि बोर्ड को भेजे गए पत्र में कुल 120000 हजार रुपये शुल्क* दर्शाया गया, जबकि विद्यालय के शुल्क ढांचे में कक्षा 11वीं का वार्षिक शुल्क लगभग **20,500 रुपये** निर्धारित है।इसी आधार पर छात्र ने आरोप लगाया कि विद्यालय ने उसे परेशान करने की नीयत से वास्तविक शुल्क से अलग जानकारी बोर्ड को भेजी। उसने मांग की कि विद्यालय के शुल्क रजिस्टर, लेखा अभिलेखों एवं फीस वसूली की स्वतंत्र ऑडिट और सूक्ष्म जांच कराई जाए, ताकि वास्तविक स्थिति सामने आ सके।
छात्र पर लगाए गए व्यक्तिगत आरोप भी बने विवाद का कारण........छात्र का आरोप है कि विद्यालय प्रबंधन ने सीबीएसई को भेजे गए पत्र में उस पर राजनीतिक दलों का कार्यकर्ता होने, मोबाइल दुकान तथा किराना दुकान संचालित करने जैसे गंभीर आरोप भी लगाए। जबकि छात्र का कहना है कि वह अत्यंत साधारण एवं आर्थिक रूप से कमजोर परिवार से है।सानु राय ने कहा, "यदि मेरे पास मोबाइल या किराना दुकान होती और आर्थिक स्थिति मजबूत होती, तो मैं चार-पांच हजार रुपये के लिए अपना एक वर्ष कभी बर्बाद नहीं करता।
इस पूरे घटनाक्रम के बाद जिले में निजी विद्यालयों की कार्यप्रणाली को लेकर कई सवाल खड़े हो गए हैं। यदि किसी छात्र ने निर्धारित शुल्क जमा कर दिया था, तो उसके शैक्षणिक दस्तावेज आखिर किस आधार पर रोके गए? अतिरिक्त राशि की मांग क्यों की गई? और यदि सीबीएसई को भेजी गई जानकारी में विसंगतियां हैं, तो उसकी जवाबदेही कौन तय करेगा?फिलहाल, एक वर्ष तक चले संघर्ष के बाद छात्र को न्याय मिलना प्रशासन की सक्रियता का परिणाम माना जा रहा है। वहीं शिक्षा जगत में यह मामला निजी विद्यालयों की जवाबदेही और पारदर्शिता को लेकर नई बहस छेड़ रहा है।

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