कोरिया बैकुंठपुर । गुप्त नवरात्रि का प्रथम दिवस दशमहाविद्याओं की प्रथम महाविद्या माँ महाकाली की उपासना को समर्पित माना जाता है। सनातन एवं तांत्रिक परंपराओं में गुप्त नवरात्रि की शुरुआत माँ काली के पूजन से करने का विशेष महत्व बताया गया है। धार्मिक मान्यता है कि माँ महाकाली की आराधना से साधक को भय, शत्रु, नकारात्मक शक्तियों और मानसिक अशांति से मुक्ति मिलती है। साथ ही आत्मबल, साहस, आध्यात्मिक उन्नति तथा जीवन में आने वाली बाधाओं को दूर करने की शक्ति प्राप्त होती है।
शास्त्रों के अनुसार गुप्त नवरात्रि में माँ महाकाली की पूजा श्रद्धा, संयम और पूर्ण विश्वास के साथ करनी चाहिए। सामान्य गृहस्थ साधकों के लिए सात्त्विक विधि से पूजन एवं मंत्र-जप करना अत्यंत शुभ माना गया है। तांत्रिक साधनाओं की अपेक्षा सरल एवं सात्त्विक पूजा भी माँ की कृपा प्राप्त करने का प्रभावी माध्यम मानी जाती है।
पूजन के लिए लाल अथवा काला आसन, माँ काली का चित्र या विग्रह, लाल अथवा काले पुष्प (विशेष रूप से गुड़हल), कुमकुम, रोली, अक्षत, धूप, दीप, कपूर, नैवेद्य के रूप में गुड़, बताशा, मिश्री, फल, नारियल, लौंग, इलायची, पान, सुपारी, गंगाजल तथा इच्छानुसार लाल वस्त्र अर्पित किए जा सकते हैं।
पूजा प्रारंभ करने से पूर्व प्रातःकाल स्नान कर स्वच्छ लाल अथवा पीले वस्त्र धारण करें। पूजा स्थल को गंगाजल से शुद्ध कर चौकी पर लाल वस्त्र बिछाकर माँ महाकाली का चित्र स्थापित करें। इसके पश्चात दीपक एवं धूप प्रज्वलित करें तथा सर्वप्रथम भगवान श्रीगणेश और अपने गुरु का स्मरण करें। इसके बाद माँ महाकाली का ध्यान करते हुए कुमकुम, अक्षत, पुष्प, धूप, दीप और नैवेद्य अर्पित करें।
पूजन के दौरान श्रद्धापूर्वक ध्यान मंत्र का पाठ करें—
"ॐ करालवदनां घोरां मुक्तकेशीं चतुर्भुजाम्।
कालिकां दक्षिणां दिव्यां मुण्डमालाविभूषिताम्॥"
इसके उपरांत "ॐ क्रीं कालिकायै नमः" बीज मंत्र का कम से कम 108 बार जप करना अत्यंत फलदायी माना गया है। साधक चाहें तो गुरु की आज्ञा एवं परंपरा के अनुसार विस्तृत बीज मंत्र का भी जप कर सकते हैं। अंत में "ॐ ऐं ह्रीं क्रीं कालिकायै नमः" मंत्र से पुष्पांजलि अर्पित कर माँ महाकाली की आरती करें तथा पूजा में हुई त्रुटियों के लिए क्षमा याचना करें।
धार्मिक मान्यता के अनुसार माँ महाकाली को गुड़, गुड़हल का पुष्प, नारियल, मौसमी फल, खीर तथा मिश्री का भोग अत्यंत प्रिय है। इनका श्रद्धापूर्वक अर्पण करने से माता प्रसन्न होकर भक्तों की मनोकामनाएँ पूर्ण करती हैं।
विद्वानों का कहना है कि यदि कोई साधक रुद्रयामल तंत्र, कौलाचार, न्यास, कवच, होम अथवा अन्य गूढ़ तांत्रिक साधनाएँ करना चाहता है, तो उसे केवल योग्य एवं सिद्ध गुरु के मार्गदर्शन में ही करना चाहिए। बिना गुरु के ऐसे अनुष्ठानों का प्रयास उचित नहीं माना गया है। सामान्य गृहस्थों के लिए सात्त्विक पूजन, माँ के प्रति अटूट श्रद्धा तथा "ॐ क्रीं कालिकायै नमः" मंत्र का नियमित जप ही पर्याप्त और कल्याणकारी माना गया है।
गुप्त नवरात्रि के प्रथम दिवस माँ महाकाली की आराधना से भक्तों के जीवन में साहस, आत्मविश्वास, सुरक्षा और आध्यात्मिक जागरण का संचार होता है। ऐसी मान्यता है कि माँ महाकाली की कृपा से साधक के सभी भय दूर होते हैं और जीवन में सुख, शांति तथा सकारात्मक ऊर्जा का वास होता है।

0 टिप्पणियाँ