नीरज गुप्ता की विशेष रिपोर्ट
कोरिया चरचा कालरी......अंतर्राष्ट्रीय श्रमिक दिवस 1 मई के पावन अवसर पर चरचा कॉलरी के कर्मचारियों के सौजन्य से स्थानीय श्रमवीर स्टेडियम में अखिल भारतीय कवि सम्मेलन का भव्य एवं गरिमामय आयोजन किया गया। साहित्य, संवेदना और सामाजिक सरोकारों से सराबोर इस विराट आयोजन में देश के विभिन्न राज्यों से पधारे ख्यातिलब्ध कवियों ने हास्य, व्यंग्य, ओज, वीर एवं श्रृंगार रस से ओतप्रोत रचनाओं की अविरल प्रस्तुति देकर देर रात तक श्रोताओं को मंत्रमुग्ध बनाए रखा।कार्यक्रम का शुभारंभ मां सरस्वती की पूजा-अर्चना एवं दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ। तत्पश्चात आयोजन समिति द्वारा आमंत्रित कवियों का आत्मीय सम्मान किया गया। कवि सम्मेलन में मुख्य अतिथि के रूप में पूर्व मंत्री छत्तीसगढ़ शासन एवं बैकुंठपुर विधायक भैयालाल रजवाड़े उपस्थित रहे। कार्यक्रम में नगर पालिका शिवपुर-चर्चा अध्यक्ष अरुण जायसवाल, उपाध्यक्ष राजेश सिंह, खान प्रबंधक चर्चा भूपेंद्र कुमार पांडे, मंडल अध्यक्ष दीपा विश्वकर्मा, क्षेत्रीय कार्मिक प्रबंधक गौरव दुबे, रोशन नामदेव, हिमसागर यादव, योगेंद्र मिश्रा, क्षेत्रीय श्रम संघ प्रतिनिधि रियाज अहमद, धर्मवीर सिंह, नम्रता सहित बड़ी संख्या में साहित्यप्रेमी एवं श्रोतागण उपस्थित रहे।
कवि सम्मेलन में अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त कवि डॉ. कमलेश राजहंस ने अपनी ओजपूर्ण एवं मार्मिक कविताओं से समकालीन भारत की स्थिति का सजीव चित्र प्रस्तुत किया। उन्होंने कहा—
*"कल रात भगत सिंह मुझे ख्वाब में मिले,
पूछा मुझसे बता मेरा भारत किधर गया।"*
इसके उत्तर में कवि ने भावपूर्ण स्वर में कहा—
कमलेश ने कहा कि मुझसे न पूछिए ,तकदीर पर रोता हुआ भारत बिखर गया।"*
मजदूरों के संघर्ष और स्वाभिमान को स्वर देते हुए उन्होंने कहा—
*"मजदूर की गैरत का दिया कैसे बुझेगा,
हालात के तूफान ने जलना सिखा दिया।"*
वहीं संवेदनाओं से भीगी प्रस्तुति में उन्होंने सुनाया—अमावस की काली रातों में शब्दों के आंगन बोलता हूं,
सारी दुनिया सोती है, मैं फूट-फूट कर रोता हूं।"*
गरीबी और अभाव की पीड़ा को स्वर देते हुए कवियों ने कहा—
*"बिना दूध के बचपन बीता,
तरुणाई को भूख खा गई।
पीड़ा कांटों के बिस्तर पर ,
थपकी देकर सुला गई।"*
कवि सुनील सोमैया ने बेटियों पर भावपूर्ण कविता पाठ करते हुए कहा—
*"मां-बाप यदि सीप हैं तो मोती हैं बेटियां,
दोनों कुलों की आन-बान-शान के लिए,
भगवान के मंदिर में जाकर रोती हैं बेटियां।"*
कार्यक्रम में हास्य कवि लक्ष्मण नेपाली ने अपने चुटीले व्यंग्य और हास्य रचनाओं से ऐसा समां बांधा कि पूरा स्टेडियम ठहाकों से गूंज उठा।
कवि सम्मेलन में नरेंद्र मिश्र ‘धड़कन’ ने अपनी प्रभावशाली एवं ऊर्जावान मंच संचालन शैली से पूरे आयोजन को जीवंत बनाए रखा। कार्यक्रम में श्रीमती निशा आनंद तिवारी, डॉ. जयप्रकाश तिवारी (गाजियाबाद), डॉ. कमलेश राजहंस (सोनभद्र), जितेंद्र सोढ़ी (अंबिकापुर), सुनील सोमैया, लक्ष्मण नेपाली, अरुण जुगाड़ू सहित अनेक प्रतिष्ठित कवियों ने एक से बढ़कर एक काव्य प्रस्तुतियां दीं।
कवि सम्मेलन के सफल आयोजन में आयोजन समिति अध्यक्ष भूपेंद्र कुमार पांडे, उपाध्यक्ष ज्ञानेंद्र पांडे, सचिव महमूद आलम, सहसचिव विनोद दुबे, कौशिक दत्ता, कोषाध्यक्ष विनोद गुप्ता विशेष रूप से सक्रिय रहे। कार्यक्रम के दौरान शांति एवं सुरक्षा व्यवस्था हेतु चर्चा थाना प्रशासन द्वारा व्यापक प्रबंध किए गए थे।
श्रमवीर स्टेडियम में आयोजित यह अखिल भारतीय कवि सम्मेलन केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं रहा, बल्कि साहित्य के जरिए समाज, राष्ट्र, श्रमिक जीवन और मानवीय संवेदनाओं को अभिव्यक्ति देने वाला एक अविस्मरणीय सांस्कृतिक महोत्सव बन गया।


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