कोरिया में पशुपालन घोटाला? 90% प्रकरण संदिग्ध होने का दावा। उन्नत बछड़े कागजों में, जमीन पर गायब! घोटाले का शक


कोरिया बैकुंठपुर । जिले के पशुपालन विभाग में कृत्रिम गर्भाधान कार्य एवं मानदेय भुगतान से जुड़े मामलों में गंभीर अनियमितताओं के आरोप सामने आए हैं। प्राप्त जानकारी के अनुसार, कई प्रकरणों में बिना वास्तविक कार्य के ही भुगतान किए जाने तथा भुगतान के बदले अवैध राशि की मांग किए जाने की बात कही जा रही है।

सूत्रों के अनुसार, मानदेय भुगतान के लिए 20% से 30% तक कमीशन की मांग किए जाने की शिकायतें सामने आई हैं। वहीं कुछ मामलों में विवाद होने पर ली गई राशि वापस किए जाने की जानकारी भी मिली है, जिससे पूरे मामले पर संदेह और गहरा गया है। बताया जा रहा है कि विभाग द्वारा किए गए भौतिक सत्यापन में लगभग 90 से 95 प्रतिशत प्रकरण संदिग्ध या असत्य पाए गए। इसके बावजूद लाखों रुपये का भुगतान किए जाने की बात सामने आ रही है। अनुमान है कि लगभग 17 लाख रुपये से अधिक की राशि ऐसे प्रकरणों में वितरित की गई, जिनकी वास्तविकता पर प्रश्नचिन्ह है।

इसके अलावा, कागजों में दर्शाए गए बछड़ा बछड़ी उत्पादन और वास्तविक स्थिति में भी बड़ा अंतर देखने को मिल रहा है। ग्रामीण क्षेत्रों में अपेक्षित संख्या में उन्नत नस्ल के पशु नहीं दिखाई देते, जबकि रिकॉर्ड में अधिक उत्पादन दर्शाया गया है।

मामले में कृत्रिम गर्भाधान में प्रयोग किया जाने वाले स्ट्रॉ के उपयोग और उपलब्धता के आंकड़ों में भी विसंगतियों की आशंका जताई जा रही है। विशेषज्ञों के अनुसार, सामान्यतः 40-50% सफलता दर होती है, लेकिन रिकॉर्ड में इससे कहीं अधिक उत्पादन दिखाया गया है, जो जांच का विषय है।

इस पूरे प्रकरण में वित्तीय अनियमितता के साथ-साथ प्रशासनिक स्तर पर जवाबदेही को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। जानकारी के अनुसार, कार्रवाई सीमित स्तर पर ही की गई है, जबकि उच्च अधिकारियों की भूमिका की भी जांच आवश्यक बताई जा रही है।

इसके अतिरिक्त विभाग में मरम्मत कार्य एवं दवा खरीदी में भी लाखों रुपये की अनियमितता की शिकायतें समय-समय पर सामने आती रही हैं।

इस मामले को लेकर स्थानीय स्तर पर आक्रोश व्याप्त है और लोगों ने शासन से निष्पक्ष एवं उच्च स्तरीय जांच की मांग की है, ताकि सच्चाई सामने आ सके और दोषियों पर कार्रवाई हो सके।

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