नीरज गुप्ता की विशेष रिपोर्ट
कोरिया चरचा कॉलरी........ एसईसीएल बैकुंठपुर क्षेत्र के चर्चित चरचा कोलरी प्रबंधन कार्यालय में एक बार फिर गंभीर विभागीय लापरवाही का मामला सामने आया है, जिसने पूरे प्रबंधन तंत्र पर सवाल खड़े कर दिए हैं। जानकारी के अनुसार, 30 मार्च 2026 को सेवानिवृत्त होने वाला एक कर्मचारी 13 अप्रैल 2026 तक लगातार कार्य करता रहा, लेकिन संबंधित अधिकारियों को इसकी भनक तक नहीं लगी।
बताया जा रहा है कि संबंधित कर्मचारी को सेवानिवृत्ति की स्पष्ट जानकारी होने के बावजूद वह नियमित रूप से कार्यस्थल पर उपस्थित होता रहा। आश्चर्य की बात यह है कि उसकी उपस्थिति बायोमेट्रिक सिस्टम के माध्यम से प्रतिदिन दर्ज होती रही, जिसमें उसके ड्यूटी मेंआने-जाने का पूरा रिकॉर्ड विभाग के पास उपलब्ध है। इसके बावजूद अधिकारियों द्वारा समय रहते कोई संज्ञान नहीं लिया गया
प्राप्त जानकारी के अनुसार, कर्मचारी सिलास खलखो पिता साधु राम, जो रेक्टिफायर में इलेक्ट्रिशियन के पद पर कार्यरत थे, को 13 फरवरी 2026 को पत्र क्रमांक 2642 के माध्यम से सूचित किया गया था कि उनकी जन्मतिथि 1 अप्रैल 1966 के अनुसार 31 मार्च 2026 को 60 वर्ष पूर्ण हो रहे हैं। हालांकि पत्र में त्रुटिवश 30 अप्रैल 2026 को सेवानिवृत्ति की तिथि अंकित कर दी गई।वहीं, 10 मार्च 2026 को जारी एक अन्य पत्र क्रमांक 3432 में 7 कर्मचारियों की सेवानिवृत्ति सूची में सिलास खलखो का नाम भी शामिल था। ऐसे में सवाल यह उठता है कि जब स्पष्ट आदेश जारी हो चुका था, तो संबंधित अधिकारियों तक यह जानकारी क्यों नहीं पहुंची और कर्मचारी कार्य कैसे करता रहा?
लालच में था कर्मचारी.......इस पूरे मामले में कर्मचारी की भूमिका भी संदेह के घेरे में है। सूत्रों के अनुसार, चरचा कालरी में कार्यरत कर्मचारियों का मासिक वेतन लगभग एक लाख रुपये के आसपास होता है। ऐसे में संभावना जताई जा रही है कि अतिरिक्त वेतन पाने के लालच में कर्मचारी जानबूझकर कार्य करता रहा।
इतना ही नहीं, 4 अप्रैल को उसे लगभग 20 लाख रुपये की ग्रेच्युटी राशि भी प्राप्त हो चुकी थी, जो सामान्यतः सेवानिवृत्ति के बाद दी जाती है। इतनी बड़ी राशि मिलने के बावजूद उसने प्रबंधन को इसकी जानकारी नहीं दी और कार्य जारी रखा, जिससे उसकी मंशा पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। इतनी भारी भरकम राशि यदि किसी व्यक्ति के खाते में आ जाए तो वह तुरंत जांच करता है कि यह राशि कहां से आई इससे स्पष्ट है की सिलास खलको लालच की वजह से काम करता रहा , इसके अतिरिक्त प्रत्येक कर्मचारी को यह मालूम रहता है कि उसकी सेवानिवृत्ति कब होगी, उसकी जन्म तिथि कब है, यह जानकारी सिलास खलको को भी थी इसके बावजूद्द्वार वह जानबूझकर अनजान बन रहा गंभीर लापरवाही के इस प्रकरण में सेवानिवृत्ति के बाद भी कार्य करते रहने के दौरान कार्यस्थल पर सिलास खलको के साथ कोई अप्रिय घटना घट जाती, तो उसकी जिम्मेदारी तय करना बेहद कठिन हो जाता। यह स्थिति प्रबंधन की गंभीर लापरवाही को दर्शाती है लगातार सामने आ रही ऐसी घटनाओं से यह प्रतीत होता है कि कुछ अधिकारी मनमानी तरीके से कार्य कर रहे हैं, जिससे एसईसीएल को आर्थिक क्षति होने की आशंका बनी रहती है।
बैक़ुंठपुर क्षेत्र के नवपदस्थ महाप्रबंधक नरेश प्रसाद को लापरवाही के इस मामले में संज्ञान लेते हुए जिम्मेदार अधिकारियों एवं कर्मचारी पर उचित कार्रवाई करने की मांग की जा रही है, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो और संस्थान की कार्यप्रणाली पारदर्शी एवं जवाबदेह बन सके।
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