मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर (एमसीबी)।
भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (BPCL) द्वारा मनेन्द्रगढ़ स्थित गैस प्लांट का उद्घाटन कर दिया गया है, लेकिन उद्घाटन के साथ ही कई गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। सबसे बड़ा प्रश्न यह है कि जब तक एक भी उपभोक्ता को गैस आपूर्ति शुरू नहीं हुई है और फिलहाल इसकी स्पष्ट समयसीमा भी तय नहीं है, तब तक उद्घाटन किस आधार पर किया गया?
कंपनी का दावा है कि इस गैस प्लांट से सरगुजा संभाग के पांच जिलों को लाभ मिलेगा। साथ ही यह भी प्रचारित किया जा रहा है कि छत्तीसगढ़ में इस योजना की शुरुआत पहली बार एमसीबी जिले से हुई है। हालांकि जमीनी हकीकत इससे अलग नजर आ रही है।
चिरमिरी सहित कई नगर पंचायतों को नहीं मिलेगा लाभ
जानकारी के अनुसार एमसीबी जिले का सबसे बड़ा और सर्वाधिक आबादी वाला शहर चिरमिरी इस योजना के दायरे से बाहर बताया जा रहा है। इसके अलावा मनेन्द्रगढ़ के समीप स्थित नगर पंचायत झगराखांड, नई लेदरी और खोंगापानी को भी गैस आपूर्ति का लाभ फिलहाल नहीं मिलने की बात सामने आई है। ऐसे में यह सवाल उठना लाजिमी है कि जब जिले के प्रमुख क्षेत्रों को ही योजना से वंचित रखा जा रहा है, तो फिर इसका व्यापक लाभ किसे मिलेगा?
सड़कों को खोदकर छोड़ा, वार्डवासियों की बढ़ी परेशानी
गैस पाइपलाइन बिछाने के नाम पर मनेन्द्रगढ़ नगर पालिका क्षेत्र के कई वार्डों में सड़कों को खोद दिया गया। नियमों के तहत पाइपलाइन कार्य पूर्ण होने के बाद संबंधित एजेंसी को सड़क को पूर्व स्थिति में बहाल करना अनिवार्य होता है। लेकिन स्थानीय लोगों का आरोप है कि कई स्थानों पर एक वर्ष से अधिक समय बीत जाने के बावजूद सड़कों की मरम्मत नहीं की गई है।
परिणामस्वरूप वार्डवासियों को रोजाना धूल, कीचड़ और गड्ढों से जूझना पड़ रहा है। बारिश के दिनों में हालात और भी बदतर हो जाते हैं, जिससे दुर्घटना की आशंका बनी रहती है। नागरिकों का कहना है कि गिनी-चुनी सड़कों की मरम्मत या तो नगर पालिका ने अपने खर्च पर कराई है या कंपनी द्वारा औपचारिकता निभाई गई है, जबकि अधिकांश सड़कें अब भी बदहाल स्थिति में हैं।
मेन पाइपलाइन को अनुमति, राइजिंग लाइन पर अटका मामला
सूत्रों के अनुसार कंपनी को फिलहाल राष्ट्रीय राजमार्ग (NH) से गैस लाकर कठौतिया स्थित प्लांट तक पहुंचाने (मेन पाइपलाइन) की अनुमति मिली है। लेकिन उपभोक्ताओं के घरों तक गैस पहुंचाने के लिए आवश्यक राइजिंग लाइन की मंजूरी अब तक प्राप्त नहीं हुई है। यही कारण है कि प्लांट के उद्घाटन के बावजूद गैस आपूर्ति शुरू होने की कोई स्पष्ट संभावना नजर नहीं आ रही।
बड़ा सवाल: उपभोक्ताओं को कब मिलेगी गैस?
उद्घाटन के बाद भी जब उपभोक्ताओं को गैस नहीं मिल पा रही है और आधारभूत अनुमति लंबित है, तो यह परियोजना फिलहाल सिर्फ कागजों और औपचारिकताओं तक सीमित दिखाई देती है। स्थानीय लोगों का कहना है कि पहले सड़कों की मरम्मत और आवश्यक अनुमतियों की प्रक्रिया पूरी की जानी चाहिए थी, उसके बाद उद्घाटन किया जाना चाहिए था।
अब देखना यह होगा कि संबंधित विभाग और कंपनी जनता की परेशानियों को कितनी गंभीरता से लेते हैं और आखिरकार उपभोक्ताओं तक गैस आपूर्ति कब तक शुरू हो पाती है। फिलहाल क्षेत्रवासियों के मन में यही सवाल गूंज रहा है—“उद्घाटन तो हो गया, लेकिन गैस कब मिलेगी?”

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