कोरिया बैकुंठपुर। मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर जिले में शासकीय स्वैच्छिक अनुदान राशि के वितरण को लेकर गंभीर आरोप सामने आए हैं। चिरमिरी निवासी आरटीआई कार्यकर्ता राजकुमार मिश्रा ने जनदर्शन में कलेक्टर के समक्ष शिकायत प्रस्तुत कर छत्तीसगढ़ के स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल पर वित्तीय अनियमितताओं का आरोप लगाया है। मिश्रा का दावा है कि वित्तीय वर्ष 2023-24 एवं 2024-25 के दौरान स्वैच्छिक अनुदान की राशि अपात्र एवं मंत्री के कथित करीबी लोगों को नियम विरुद्ध तरीके से प्रदान की गई, जिससे शासन को आर्थिक क्षति पहुंची है।
शिकायत में उल्लेख किया गया है कि मंत्री की अनुशंसा पर स्वैच्छिक अनुदान की राशि ऐसे व्यक्तियों को दी गई जिनकी पात्रता संदिग्ध है। आरोप है कि मंत्री के करीबी लोग कलेक्टर कार्यालय में उपस्थित होकर चेक प्राप्त करते हैं और लाभार्थियों तक पहुंचाते हैं। इसके बाद चेक वितरण के फोटो सोशल मीडिया पर साझा किए जाते हैं। जबकि नियमानुसार, स्वैच्छिक अनुदान की राशि का वितरण शासकीय अधिकारी द्वारा ही किया जाना चाहिए, किसी जनप्रतिनिधि या उनके प्रतिनिधि द्वारा सीधे चेक प्रदान करना नियमों के विरुद्ध माना जाता है।
आरटीआई कार्यकर्ता का कहना है कि यदि अपात्र व्यक्तियों को अनुशंसा नहीं की जाती, तो लाखों रुपये की राशि का भुगतान रोका जा सकता था। शिकायत पत्र में यह भी आरोप लगाया गया है कि कई बुजुर्ग, अशिक्षित व्यक्तियों को शिक्षा के नाम पर 20-20 हजार रुपये की राशि स्वीकृत की गई, जबकि उनका शिक्षा से कोई प्रत्यक्ष संबंध नहीं है। इसी प्रकार कुछ लोगों को स्वास्थ्य या शिक्षा के नाम पर 20 से 25 हजार रुपये तक की राशि प्रदान की गई, जिनमें कथित रूप से मंत्री के शुभचिंतक और राजनीतिक रूप से जुड़े लोग शामिल बताए गए हैं।
मिश्रा ने यह भी आरोप लगाया कि एसईसीएल के कुछ कर्मचारियों को, जिनका मासिक वेतन एक लाख रुपये से अधिक बताया गया है, उन्हें भी स्वैच्छिक अनुदान का लाभ दिया गया। इतना ही नहीं, एक ही परिवार के कई सदस्यों को एक साथ बीमार दिखाकर प्रत्येक को 25-25 हजार रुपये तक की राशि प्रदान किए जाने का उल्लेख शिकायत में किया गया है। इसे स्वैच्छिक अनुदान राशि के दुरुपयोग की श्रेणी में बताया गया है।
शिकायत में कहा गया है कि स्वैच्छिक अनुदान किसी मंत्री या जनप्रतिनिधि की निजी निधि नहीं, बल्कि राज्य सरकार का धन है, जिसका उपयोग नियमानुसार और सार्वजनिक हित में होना चाहिए। राशि स्वीकृत करने से पूर्व लाभार्थी की पात्रता, उद्देश्य और निर्धारित शर्तों की जांच आवश्यक है। मिश्रा ने यह भी उल्लेख किया कि इस प्रकार की अनुशंसा भारतीय संविधान के अनुच्छेद 266(3) के प्रावधानों के विपरीत प्रतीत होती है।
आरटीआई कार्यकर्ता ने कलेक्टर से मांग की है कि संबंधित वित्तीय वर्षों में अनुदान प्राप्त करने वाले सभी लाभार्थियों के आधार कार्ड की जांच की जाए, उनकी आयु एवं पात्रता का सत्यापन किया जाए तथा बैंक खातों का परीक्षण कर राशि के उपयोग की पुष्टि की जाए। साथ ही उपयोगिता प्रमाण पत्रों की भी जांच कराई जाए।
अब देखना यह होगा कि जिला प्रशासन इस शिकायत पर क्या रुख अपनाता है। आरटीआई कार्यकर्ता को आशा है कि कलेक्टर के निर्देश पर मामले की निष्पक्ष और गंभीर जांच कर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।

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