कोरिया बैकुंठपुर। 31 दिसंबर की शाम बैकुंठपुर नगर में गौ–सेवा के क्षेत्र में सक्रिय कार्यकर्ताओं को एक अत्यंत दर्दनाक सूचना प्राप्त हुई। शाम लगभग 6:00 बजे यह जानकारी सामने आई कि नगर रेलवे स्टेशन के आगे ब्रिज के नीचे लगभग 14 से 15 गोवंश ट्रेन की चपेट में आकर गंभीर हादसे का शिकार हो गए हैं। सूचना मिलते ही गौसेवक अनुराग दुबे मौके पर पहुंचे, लेकिन दृश्य देखकर हर किसी की आंखें नम हो गईं। अधिकांश गोवंश पटरी के किनारे क्षत–विक्षत अवस्था में पड़े हुए थे, जिनमें से कई की मौके पर ही मृत्यु हो चुकी थी, जबकि दो गोवंश जीवन और मृत्यु से संघर्ष कर रहे थे।
घटनास्थल पर पहुंचने पर गौसेवकों ने पाया कि घायल पशुओं के शरीर में गहरे घाव थे। एक गंभीर रूप से घायल गोवंश का पैर ट्रेन की टक्कर से लगभग अलग हो चुका था और वह पटरी के किनारे कष्ट से तड़प रहा था। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए गौसेवकों ने तत्काल जिला प्रशासन और पुलिस प्रशासन को सूचना दी। जानकारी मिलते ही प्रशासनिक अमला सक्रिय हुआ और रात्रि 7:00 बजे तक जिला प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी, पुलिस विभाग, नगर पालिका के अधिकारी एवं कर्मचारी घटनास्थल पर पहुंच चुके थे।
प्रशासनिक और सामाजिक स्तर पर संयुक्त प्रयास के बाद तत्काल रेस्क्यू अभियान शुरू किया गया। गंभीर रूप से घायल पशुओं को पटरी से ऊपर लाकर सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया गया। रात्रि में ही गौसेवकों ने नगर पालिका चर्चा की सहायता से ट्रैक्टर की व्यवस्था की, जिसके माध्यम से दोनों घायल गोवंशों को बाल मंदिर प्रांगण में लाकर रखा गया, ताकि उनका उपचार किया जा सके। वहीं जिन गोवंशों की मृत्यु हो चुकी थी, उनके क्षत–विक्षत अवशेष पटरी के आसपास बिखरे पड़े थे। प्रशासन ने पुलिस की मौजूदगी में जेसीबी मशीन की सहायता से रात्रि में ही गड्ढा खुदवाकर सभी मृत गोवंशों को सम्मानपूर्वक मिट्टी दी, ताकि दुर्घटनास्थल पर स्वच्छता और सुरक्षा बनी रहे।
दूसरी ओर घायल गोवंशों की चिकित्सा व्यवस्था आज सुबह तुरंत की गई। बैकुंठपुर के प्रसिद्ध पशु चिकित्सक डॉ. श्याम भैया ने गंभीर रूप से घायल गोवंश का निरीक्षण किया और उसका ऑपरेशन किया। ट्रेन दुर्घटना में पहले से लटका हुआ पैर बाद में स्थिति को नियंत्रित रखने और संक्रमण से बचाने के लिए शल्य चिकित्सा द्वारा अलग किया गया। डॉ. श्याम भैया और उनकी टीम ने लगभग चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में ऑपरेशन को सफलतापूर्वक अंजाम दिया। फिलहाल घायल गोवंश की हालत स्थिर बताई जा रही है और उसके आगे के उपचार की निरंतर व्यवस्था की जा रही है।
इस घटना ने एक बार फिर रेलवे लाइन के आसपास आवारा पशुओं की सुरक्षा, निगरानी और प्रबंधन को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। स्थानीय गौसेवकों का कहना है कि यदि समय रहते सुरक्षा उपाय लागू किए जाएं तथा रेलमार्ग के साथ पशुओं के प्रवेश को रोकने के लिए प्रभावी कदम उठाए जाएं, तो इस प्रकार की दर्दनाक घटनाओं से बचा जा सकता है।
जनवरी की शुरुआत से ठीक पहले यह हादसा न केवल प्रशासन के लिए चेतावनी है, बल्कि समाज को भी यह संदेश देता है कि संवेदनशीलता, जिम्मेदारी और समन्वय के बिना पशुपालन और गौ–संरक्षण की व्यवस्था अधूरी है। फिलहाल संयुक्त प्रयासों की बदौलत एक गोवंश का जीवन बचा लिया गया है, और बाकी मृत गोवंशों को अंतिम सम्मान दिया गया है।


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