कोरिया बैकुंठपुर। ठंड क्या होती है, यह अगर समझना हो तो उन बेजुबान और बेसहारा जीवों से पूछिए, जो इस कड़ाके की ठंड में बिना किसी शिकायत के पीड़ा सहते हैं। जैसे-जैसे तापमान गिर रहा है, आम इंसान के साथ-साथ पशु-पक्षियों, विशेषकर गौवंश को भी भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। ठंडी हवा, पाला और खुले आसमान के नीचे रहने की मजबूरी इनके जीवन को और अधिक कठिन बना देती है।
इसी गंभीर स्थिति को देखते हुए गौ रक्षक अनुराग दुबे के द्वारा एक सराहनीय पहल की गई है। ठंड से बचाव के उद्देश्य से घर की गौशाला एवं बाल मंदिर प्रांगण में, जहां निगरानी में गोवंश रहते हैं, उनके लिए अलाव जलाने की समुचित व्यवस्था की गई है। गौवंश को ठंड से राहत मिले, इसके लिए सुरक्षित स्थानों पर आग जलाकर उन्हें गर्माहट प्रदान की जा रही है। यह प्रयास न केवल संवेदनशीलता का परिचायक है, बल्कि समाज के लिए एक प्रेरणादायक उदाहरण भी है।
गौवंश हमारी संस्कृति और आस्था का अभिन्न हिस्सा हैं। वे बोल नहीं सकते, अपनी पीड़ा व्यक्त नहीं कर सकते, इसलिए उनकी देखभाल करना हम सभी की नैतिक जिम्मेदारी बनती है। ठंड के मौसम में यदि थोड़ी-सी सावधानी और सहयोग किया जाए, तो इन बेजुबानों को बड़ी राहत मिल सकती है। तिरपाल, शेड या सेट के नीचे सुरक्षित रूप से अलाव की व्यवस्था कर उन्हें ठंड से बचाया जा सकता है।
इस संबंध में गौ रक्षक अनुराग दुबे ने कहा कि सभी गोपालकों और गौसेवकों से हाथ जोड़कर सादर अनुरोध किया गया है कि वे अपनी-अपनी सुविधा अनुसार जहां भी गोपालन करते हैं, वहां गौवंश के लिए ठंड से बचाव के उपाय अवश्य करें। अलाव जलाने, सूखे बिछावन और हवा से बचाव की व्यवस्था कर हम इन बेजुबानों के प्रति अपनी संवेदनशीलता दिखा सकते हैं।
यह छोटी-सी पहल किसी के लिए बड़ी राहत बन सकती है। आइए, इस ठंड में इंसानियत के साथ-साथ गौसेवा का भी धर्म निभाएं।


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