कोरिया बैकुंठपुर । जिला मुख्यालय बैकुंठपुर के शासकीय प्राथमिक एवं माध्यमिक शाला पुलिस लाइंस, बैकुंठपुर परिसर में छात्र-छात्राओं एवं आमजन के लिए एक व्यापक स्वास्थ्य परीक्षण, जन-जागरूकता एवं चिकित्सा शिविर का आयोजन किया गया। इस शिविर का मुख्य उद्देश्य शीत ऋतु में होने वाली विभिन्न बीमारियों की पहचान, उनके लक्षणों की जानकारी, बचाव के उपायों के साथ-साथ स्वच्छता, विशेषकर हस्त प्रक्षालन (हैंड वॉश) के महत्व और एनसीडी (गैर संचारी रोग) के प्रति जागरूकता फैलाना रहा।
शिविर के दौरान विद्यार्थियों को ठंड के मौसम में होने वाले सामान्य रोग जैसे सर्दी-खांसी, जुकाम, बुखार, त्वचा रोग, श्वसन संबंधी समस्याएं एवं पाचन से जुड़ी बीमारियों के लक्षणों के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई। चिकित्सकों ने बताया कि शीत ऋतु में शरीर की प्रतिरोधक क्षमता कमजोर होने से संक्रमण की संभावना बढ़ जाती है, ऐसे में संतुलित आहार, गर्म कपड़ों का उपयोग, स्वच्छता और समय-समय पर स्वास्थ्य जांच अत्यंत आवश्यक है।
स्वच्छता पर विशेष जोर देते हुए छात्रों को हस्त प्रक्षालन के सही तरीके सिखाए गए। चिकित्सकों ने बताया कि साबुन से नियमित हाथ धोना कई संक्रामक रोगों से बचाव का सबसे सरल और प्रभावी उपाय है। भोजन से पहले और शौच के बाद हाथ धोने की आदत अपनाकर अनेक बीमारियों को रोका जा सकता है।
इसके साथ ही शिविर में एनसीडी रोगों जैसे मधुमेह (डायबिटीज), उच्च रक्तचाप, हृदय रोग एवं मोटापे के कारण, लक्षण और रोकथाम के उपायों पर भी जानकारी दी गई। बताया गया कि असंतुलित खानपान, शारीरिक निष्क्रियता और तनाव के कारण ये रोग तेजी से बढ़ रहे हैं, जिनसे बचाव के लिए नियमित व्यायाम, स्वस्थ जीवनशैली और समय-समय पर जांच जरूरी है।
इस स्वास्थ्य शिविर में कुल 116 रोगियों का स्वास्थ्य परीक्षण किया गया, जिनमें छात्र-छात्राओं के साथ-साथ विद्यालय स्टाफ एवं आसपास के नागरिक भी शामिल रहे। सभी रोगियों की जांच कर उन्हें आवश्यक उपचार एवं दवाइयां निःशुल्क प्रदान की गईं।
शिविर को सफल बनाने में आयुष विंग जिला चिकित्सालय बैकुंठपुर एवं एनसीडी क्लीनिक जिला चिकित्सालय बैकुंठपुर की टीम का विशेष योगदान रहा। शिविर में प्रमुख रूप से आयुष चिकित्सक डॉ. बी. आर. नायक, पंचकर्म सहायक श्रीमती मनीषा सिरमौर, फार्मासिस्ट कुमारी किरण तिर्की सहित स्वास्थ्य विभाग के अन्य कर्मचारियों ने सक्रिय भूमिका निभाई। चिकित्सकों ने विद्यार्थियों को सरल भाषा में स्वास्थ्य संबंधी जानकारी देकर उन्हें जागरूक किया।
विद्यालय प्रबंधन एवं उपस्थित शिक्षकों ने इस आयोजन की सराहना करते हुए कहा कि इस प्रकार के स्वास्थ्य शिविर छात्रों के शारीरिक एवं मानसिक विकास के लिए अत्यंत आवश्यक हैं। उन्होंने भविष्य में भी ऐसे कार्यक्रमों के आयोजन की आवश्यकता पर बल दिया। यह शिविर न केवल उपचार तक सीमित रहा, बल्कि स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता फैलाने में भी महत्वपूर्ण साबित हुआ।


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