कोरिया बैकुंठपुर। श्री ललिताम्बा भक्ति निकेतन राम धाम, चित्रकूट में आयोजित श्रीराम कथा के भव्य समारोह में प्रदेश के श्रद्धालुओं सहित अनेक गणमान्य अतिथियों ने उपस्थिति दर्ज कर श्रीराम चरित की पावन कथा श्रवण किया। कार्यक्रम के दौरान भक्तिमय वातावरण में जय श्रीराम के उद्घोष गूंजते रहे और श्रद्धा, आस्था तथा आध्यात्मिक शक्ति का अद्भुत मिलन देखने को मिला।
समारोह में शामिल होकर स्वास्थ्य मंत्री श्री जायसवाल ने प्रभु श्रीराम से छत्तीसगढ़ की समृद्धि, प्रदेशवासियों की खुशहाली और समाज में सद्भाव-शांति बने रहने की कामना की। कथा श्रवण के दौरान उपस्थित सैकड़ों श्रद्धालुओं के बीच आध्यात्मिक ऊर्जा और सांस्कृतिक समृद्धि का अनोखा भाव दिखाई दिया। समारोह में रामायण के महत्वपूर्ण प्रसंगों, भगवान राम के आदर्शों और उनके जीवन दर्शन पर संतों एवं कथावाचकों ने प्रकाश डाला, जिससे उपस्थित जनसमूह ज्ञान, भक्ति और नैतिक मूल्यों से समृद्ध हुआ।
कथावाचक ने भगवान श्रीराम को केवल एक धार्मिक प्रतीक नहीं, बल्कि मर्यादा, त्याग और कर्तव्य का जीवंत आदर्श बताया। उन्होंने कहा कि श्रीराम का जीवन हमें यह सिखाता है कि सच्चा बल शस्त्रों में नहीं, बल्कि संयम, सत्य, समर्पण और सहनशीलता में निहित होता है। उन्होंने आगे कहा—
“रामत्व का अर्थ है धर्म के मार्ग पर चलना, अपने वचनों का पालन करना और समाज के प्रति जिम्मेदारी निभाना। यदि मनुष्य श्रीराम के आदर्शों को आत्मसात कर ले, तो जीवन की हर चुनौती सरल हो जाती है और समाज में सद्भाव का मार्ग प्रशस्त होता है।”
कार्यक्रम के दौरान धार्मिक अनुष्ठान, भजन-कीर्तन और मंत्रोच्चारण से वातावरण भक्तिमय बना रहा। उपस्थित लोगों ने रामधुन में स्वर मिलाते हुए भाव-विभोर होकर प्रभु की वंदना की। राम धाम के प्रांगण में सजे भव्य रथ, पुष्प सजावट, दीप श्रृंगार और राम नाम से अलंकृत कलात्मक झांकियों ने कार्यक्रम में विशेष आकर्षण जोड़ा।
समारोह के अंत में सभी छत्तीसगढ़ के आगंतुकों को प्रसाद वितरण किया गया। अनेक श्रद्धालुओं ने यह संकल्प लिया कि वे अपने दैनिक जीवन में राम के मूल्यों—सत्य, मर्यादा, धैर्य और करुणा—को अपनाकर समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाने का प्रयास करेंगे।
कार्यक्रम में प्रदेश के विभिन्न जिलों से पहुंचे नागरिकों ने कहा कि इस प्रकार के आयोजन लोगों को न केवल आस्था से जोड़ते हैं, बल्कि समाज में एकता, सद्भाव और सेवा भावना को भी प्रोत्साहित करते हैं। बच्चों, युवाओं और बुज़ुर्गों की बड़ी संख्या में उपस्थिति इस बात की गवाही थी कि रामकथा सिर्फ एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि सांस्कृतिक पहचान का आधार है।
समारोह के सफल आयोजन के लिए श्री ललिताम्बा भक्ति निकेतन राम धाम के ट्रस्ट, सेवादल, स्वयंसेवकों और स्थानीय समाजजन ने सराहनीय योगदान दिया। आयोजकों ने आशा व्यक्त की कि आने वाले समय में भी ऐसे आध्यात्मिक आयोजन समाज में ऊर्जा, प्रेरणा और एकता का संचार करते रहेंगे।
अंत में, प्रदेश को समृद्ध, खुशहाल और सद्भावपूर्ण बनाए रखने की भावना के साथ प्रभु श्रीराम के जयघोष के साथ कथा का समापन हुआ।



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