चरचा माइंस में कबाड़ी गिरोह का आतंक, .. कर्मियों पर जानलेवा हमला....—प्रबंधन की लापरवाही उजागर हुई...... एक साल में लगभग 30 चोरी की घटनाएं



नीरज गुप्ता की विशेष रिपोर्ट 

कोरिया चरचा  कालरी.......बैकुंठपुर क्षेत्र अंतर्गत चर्चा माइंस में कबाड़ी गिरोह का आतंक थमने का नाम नहीं ले रहा है। गिरोह के हौसले इस कदर बुलंद हैं कि अब वे दिन–रात, समय और सुरक्षा की परवाह किए बिना खदान परिसर में घुसकर लूट, तोड़फोड़ और जानलेवा हमलों को अंजाम दे रहे हैं। ताजा मामला शनिवार, 27 दिसंबर की शाम लगभग 7 बजे द्वितीय पाली के दौरान सामने आया, जिसने खदान में कार्यरत कर्मियों की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।प्राप्त जानकारी के अनुसार, चर्चा ईस्ट खदान के मुहाने में लगे विशाल वेंटिलेशन पंखे का संचालन ऑपरेटर विजय मिंज, रघुनाथ एवं भजन कर रहे थे। ड्यूटी के दौरान जब ऑपरेटर विजय मिंज आसपास निरीक्षण के लिए आगे बढ़े, तभी  दीवार की आड़ में खड़े करीब सात नकाबपोश बदमाशों ने अचानक उन पर हमला कर दिया। सभी हमलावरों के चेहरे कपड़े से ढंके थे और उनके हाथों में तलवार व लाठियां थीं।हमले के बाद जान बचाने के लिए विजय मिंज नीचे की ओर भागे, इसी दौरान गिरने से उनके पैरों में गंभीर चोट आई। वहीं उनके साथी रघुनाथ व भजन को भी हमले में गंभीर चोटें लगीं। किसी तरह तीनों कर्मी नीचे पहुंचकर घटना की सूचना दी, जिसके बाद घायलों को क्षेत्रीय चिकित्सालय में भर्ती कराया गया और उपचार शुरू किया गया।

चौंकाने वाली बात यह है कि इतनी गंभीर घटना की सूचना मिलने के बावजूद न तो सुरक्षा विभाग को तत्काल घटनास्थल भेजा गया और न ही पुलिस थाना चरचा को सूचित किया गया। इसी लापरवाही का नतीजा यह रहा कि मात्र एक घंटे बाद वही कबाड़ी गिरोह दोबारा चर्चा ईस्ट मुहाने में स्थित पंखे तक पहुंच गया और वहां की विद्युत केबल काट ले गया, जिससे खदान का पंखा बंद हो गया।  

सूत्रों के अनुसार, कुछ अधिकारियों का यह गैर-जिम्मेदाराना बयान सामने आया कि “जिसे चोट लगी है वही जाकर रिपोर्ट लिखाए, अधिकारी रिपोर्ट करेंगे तो उन्हें भी कानूनी झंझट में पड़ना पड़ेगा।” यह कथन न केवल प्रबंधन की असंवेदनशीलता दर्शाता है, बल्कि अपराधियों को खुला संरक्षण देने जैसा प्रतीत होता है।खदान में कार्यरत अन्य कर्मियों ने बताया कि 26 दिसंबर की रात भी यही गिरोह खदान मुहाने तक पहुंच गया था, जहां हल्ला मचने पर वे वापस लौट गए। इसकी जानकारी उच्च अधिकारियों को दी गई थी, लेकिन तब भी कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई, और दूसरे दिन इसी ग्रुप में पुनः वारदात को अंजाम दे दिया, बीते एक वर्ष में खदान के भीतर और बाहर से तांबे के तार, विद्युत केबल और कबाड़ लोहे की चोरी की अनगिनत घटनाएं हो चुकी हैं। अब हालात इतने भयावह हो गए हैं कि अपराधी कर्मियों को बंधक बनाना, गले पर तलवार रखकर धमकाना और खुलेआम मारपीट जैसी घटनाओं को अंजाम दे रहे हैं।गौरतलब है कि चर्चा ईस्ट एवं चर्चा वेस्ट खदान परिसर में करोड़ों रुपये की बहुमूल्य संपत्ति खुले में पड़ी रहती है, जिसकी सुरक्षा की जिम्मेदारी स्थानीय प्रबंधन की होती है। लेकिन वास्तविकता यह है कि प्रबंधन केवल कोयला उत्पादन तक सीमित नजर आ रहा है, जबकि सुरक्षा जैसे अहम दायित्वों की घोर अनदेखी की जा रही है। केबल चोरी से SECL को भारी आर्थिक नुकसान होता है और साथ ही उत्पादन कार्य ठप होने से कोयला आपूर्ति भी बुरी तरह प्रभावित होती है।यह घटना न केवल प्रबंधन की सुरक्षा संबंधी निष्क्रियता को उजागर करती है, बल्कि खदान में कार्यरत सैकड़ों कर्मियों की जान को भी गंभीर खतरे में डालती है। आवश्यकता है कि SECL प्रबंधन तत्काल प्रभाव से सख्त सुरक्षा व्यवस्था लागू करे, दोषी अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाए और पुलिस प्रशासन से कबाड़ी गिरोह के विरुद्ध कड़ी एवं उदाहरणात्मक कार्रवाई की मांग की जाए, ताकि भविष्य में इस तरह की आपराधिक घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकी जा सके और कर्मियों को सुरक्षित कार्य वातावरण मिल सके।

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