चरचा माइंस में कोयला परिवहन बना मौत का खेल....... कॉलरी प्रबंधन की चुप्पी, आरटीओ की आंखों पर पट्टी.......... डाले से ढाई फीट ऊपर तक कोयला, हर ट्रिप में हादसे का खतरा ......



नीरज गुप्ता की विशेष रिपोर्ट

कोरिया चरचा कालरी..........एसईसीएल बैकुंठपुर क्षेत्र अंतर्गत चरचा कालरी माइंस  में जब से रोड सेल के माध्यम से बड़े-बड़े डंपर-टिपर और ट्रेलरों द्वारा कोयला परिवहन शुरू हुआ है, तब से आर  टी ओ विभाग के दिशा-निर्देशों की खुलेआम धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। चरचा कालरी के सी एच पी स्थित बैरियर से प्रतिदिन 40 से 50 ट्रक आवश्यकता से अधिक कोयला लोड कर बिना किसी रोक-टोक के रवाना हो रहे हैं। यह सब स्थानीय जिम्मेदार अधिकारियों की आंखों के सामने हो रहा है, लेकिन आज तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई।

सोमवार को सामने आया मामला इस लापरवाही की गंभीरता को उजागर करता है। ट्रेलर क्रमांक CG 04/JB 2076 में ट्रेलर के डाले से लगभग 2.5 फीट ऊंचाई तक कोयला भरा गया, जबकि नियमानुसार डाले की ऊंचाई से ऊपर लोडिंग पूर्णतः प्रतिबंधित है। अत्यधिक ऊंचाई तक कोयला भरे होने से परिवहन के दौरान कोयला गिरने, सड़क पर फिसलन बनने और घातक दुर्घटनाओं की आशंका लगातार बनी रहती है।

ड्राइवर के अनुसार वाहन में ओरिजिनल डाले को हटाकर दूसरा 26 फीट लंबाई का डाला लगा था, जो क्षमता से छोटा होने के कारण अधिक ऊंचाई तक कोयला भरना पड़ा। ड्राइवर ने यह भी स्वीकार किया कि हम लोग हमेशा ऐसे ही ले जाते हैं, ऊपर से तिरपाल बांध देते हैं, इसलिए कोयला नहीं गिरता।” लेकिन आर टी ओ से डाले से ऊपर लोडिंग की अनुमति के सवाल पर वह कोई स्पष्ट उत्तर नहीं दे सका। यह बयान साफ संकेत देता है कि ट्रांसपोर्टर, ट्रक मालिक और जिम्मेदार अधिकारी—तीनों की मिलीभगत से नियमों को ताक पर रखा जा रहा है। उक्त वाहन में चरचा कालरी के कोल बैरियर में स्थित कंटाघर में कुल वजन 51.45 टन  उल्लेखित किया गया है।  दस्तावेजों के अनुसार यह कोयला ए  पी आई इस्पात पावर, रायपुर के लिए ले जाया जा रहा था। डाले की निर्धारित क्षमता से अधिक कोयला भरा होने से कभी भी बड़ी दुर्घटना घट सकती है, जिसमें निर्दोष नागरिकों की जान जाने का खतरा है। अफसोस की बात यह है कि मुनाफे की अंधी दौड़ में मानव जीवन की कीमत शून्य कर दी गई है।यह भी सामने आया है कि रेलवे ग्राउंड में प्रतिदिन वाहनों को लोड कर खड़ा किया जाता है और वहीं त्रिपाल-रस्सियों से बांधकर रवाना किया जाता है। यदि परिवहन विभाग कोरिया का अमला मौके पर आकर नियमित जांच करे, तो ओवरलोडिंग की अनगिनत मिसालें तुरंत सामने आ जाएंगी। सवाल यह है कि आर टी ओ कोरिया की आंखें इस ओर क्यों नहीं पहुंच रहीं? या फिर यह विभाग जानबूझकर आंख मूंदे बैठा है चरचा कालरी के कोल बैरियर से जो कुछ चल रहा है वह सिर्फ अनियमितता नहीं बल्कि सीधे-सीधे कानून का उल्लंघन और दंडनीय अपराध है यहां भारी वाहनों, डंपर व टिप्पर में निर्धारित डाला क्षमता से कहीं अधिक कोयला भरा जा रहा है और यह सब उस स्थान से हो रहा है जो स्वयं नियंत्रण और निगरानी के लिए बनाया गया है मोटर व्हीकल अधिनियम 1988 की धारा 113 स्पष्ट रूप से कहती है कि कोई भी वाहन निर्धारित क्षमता से अधिक भार वहन नहीं कर सकता इसके उल्लंघन पर धारा 191 के तहत भारी जुर्माना और वाहन जप्ती का प्रावधान है इसके बावजूद कॉलोनी के बैरियर से रोजाना ओवरलोड बाहर निकलना इस बात का स्पष्ट प्रमाण है कि या तो जानबूझकर नियमों को ताक पर रखा गया है या फिर जिम्मेदारों की मूक सहमति सिर्फ चंद रुपयों के कमीशन के लिए है भारतीय दंड संहिता की धारा 268 के अंतर्गत यह  कृत्य लोक उपद्रव की श्रेणी में आता है क्योंकि क्षमता से अधिक लोड वाहन सड़कों को क्षतिग्रस्त कर रहे हैं और आम नागरिकों की जान जोखिम में डाल रहे हैं वहीं यदि किसी दुर्घटना के आशंका बनी रहती है तो यह धारा 336 जान को खतरे में डालने वाला कृत्य के तहत भी दंडनीय है यदि भविष्य में कोई  गंभीर दुर्घटना होती है तो उसकी जिम्मेदारी केवल वाहन चालकों की नहीं होगी बल्कि चरचा कालरी के सी एच  पी बैरियर पर तैनात संबंधित अधिकारियों और पर्यवेक्षण करने वाले विभागीय अफसर पर भी समान रूप से तय होगी यह जरूरी है कि उच्च प्रशासन तत्काल हस्तक्षेप करें कि सी.एच. पी स्थित बैरियर व कंटाघर में लगे वीडियो कैमरा की जांच से पूरी सच्चाई स्पष्ट आ जाएगी हर ट्रक के डाले में उसकी ऊंचाई से अधिक ऊंचाई तक रखा कोयला स्पष्ट नजर आएगा। 

 जनहित में सख्त मांग.......यह मामला केवल नियम उल्लंघन नहीं, बल्कि जनसुरक्षा से खिलवाड़ है। अतः जिला प्रशासन से मांग की जाती है कि कॉलरी के जिम्मेदार अधिकारी और संबंधित ट्रांसपोर्टरों पर ओवरलोडिंग के लिए तत्काल दंडात्मक कार्रवाई की जाएआर टी ओ द्वारा संयुक्त विशेष जांच अभियान चलाकर कोल बैरियर व रेलवे ग्राउंड पर 24×7 निरीक्षण सुनिश्चित किया जाए। डाले से ऊपर लोडिंग, क्षमता से अधिक भार और बिना वैध अनुमति परिवहन पर FIR/चालान की कार्रवाई हो। दोषी अधिकारियों की जवाबदेही तय कर निलंबन/अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाए।जनहित में यह कार्रवाई अत्यंत आवश्यक है। यदि अभी सख्ती नहीं बरती गई, तो किसी बड़ी दुर्घटना की जिम्मेदारी से कोई नहीं बच पाएगा। जिला प्रशासन से तत्काल संज्ञान और कड़ी कार्रवाई की पुरज़ोर मांग की जाती है।

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