दशहरे की निराली परंपरा, रावण दहन के दिन ही मनता है राजेश सिंह का जन्मदिन..... कोरिया जिले में अमरपुर की होली और रनई के निर्विरोध चुनाव की तरह शिवपुर चरचा की यह अनूठी परंपरा भी बनी चर्चा का विषय,.....


नीरज गुप्ता की विशेष रिपोर्ट 

कोरिया चरचा कालरी..... कोरिया जिले की पहचान यहां की विशिष्ट परंपराओं और सामाजिक सौहार्द से भी जुड़ी है। जिले के अमरपुर गांव में होली से एक सप्ताह पहले होली मनाने की परंपरा है, तो रनई गांव निर्विरोध चुनाव की मिसाल पेश करता है। इसी कड़ी में नगर पालिका शिवपुर चरचा की एक और दिलचस्प परंपरा लोगों का ध्यान आकर्षित करती है। यहां नगर पालिका के वर्तमान उपाध्यक्ष राजेश सिंह का जन्मदिन हर साल दशहरे के दिन मनाया जाता है। खास बात यह है कि दशहरा चाहे किसी भी तारीख को पड़े, जन्मदिन मनाने का अवसर नहीं बदलता।

राजेश सिंह के अनुसार, उनका जन्म दशहरे के दिन हुआ था। इसी मान्यता और भावनात्मक जुड़ाव के चलते उनके समर्थक प्रतिवर्ष विजयादशमी के अवसर पर उनका जन्मदिन मनाते हैं। राजनीतिक जीवन की शुरुआत के साथ सार्वजनिक रूप से जन्मदिन मनाने की परंपरा भी शुरू हुई, जो अब हर साल दोहराई जाती है। किंतु राजनीतिक जीवन के पूर्व यह परंपरा  नहीं थी

दशहरे पर आयोजित रावण दहन कार्यक्रम के दौरान श्रमवीर स्टेडियम में बड़ी संख्या में लोग जुटते हैं। इसी आयोजन के बीच राजेश सिंह और उनके समर्थक जन्मदिन मनाना नहीं भूलते। रावण दहन, उत्सव का माहौल और समर्थकों की मौजूदगी इस अवसर को खास बना देती है। इस तरह एक ओर बुराई पर अच्छाई की जीत का पर्व मनाया जाता है, तो दूसरी ओर राजेश सिंह के जन्मदिन का आयोजन भी उत्सव का हिस्सा बन जाता है।दशहरे की तारीख हर वर्ष बदलती है, लेकिन राजेश सिंह के जन्मदिन का उत्सव इसी पर्व के साथ जुड़ा रहता है। 

पिछले पांच वर्षों में दशहरे की तारीखें..... 2021: 15 अक्टूबर, शुक्रवार — आश्विन शुक्ल दशमी,

2022: 5 अक्टूबर, बुधवार — आश्विन शुक्ल दशम, 2023: 24 अक्टूबर, मंगलवार — आश्विन शुक्ल दशमी 2024: 12 अक्टूबर, शनिवार — आश्विन शुक्ल दशमी 2025: 2 अक्टूबर, गुरुवार — आश्विन शुक्ल दशमी वर्तमान वर्ष 2026 में: 20 अक्टूबर, मंगलवार को विजयादशमी मनाई जा रही है।इन तारीखों से स्पष्ट होता है कि दशहरे का पर्व हर साल अलग-अलग तारीख और वार को आता है, लेकिन राजेश सिंह के जन्मदिन का आयोजन दशहरे के साथ ही जुड़ा रहता है।

“कैलेंडर की तारीखें बदलती रहीं, वार बदलते रहे, लेकिन दशहरे के साथ जुड़ा राजेश सिंह के जन्मदिन का सिलसिला नहीं बदला। शिवपुर चरचा की यह परंपरा नेता जी को एक अलग पहचान देती है।”

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