कोरिया बैकुंठपुर। शारदीय नवरात्र की महा अष्टमी के पावन अवसर पर चनवारीडांड स्थित प्रसिद्ध महामाया मंदिर में भक्तिमय वातावरण देखने को मिला। माता रानी के दर्शन, पूजा-अर्चना और आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह रहा। इस अवसर पर छत्तीसगढ़ शासन के स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल की अगुवाई में क्षेत्र की महिलाओं द्वारा यात्रा का आयोजन किया गया। यात्रा में महिलाओं ने श्रद्धा और भक्ति के साथ सहभागिता निभाई तथा मां महामाया के प्रति अपनी आस्था प्रकट की।
महा अष्टमी के अवसर पर मां दुर्गा के आठवें स्वरूप मां महागौरी की पूजा-अर्चना का विशेष महत्व माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन माता की आराधना करने से सुख, शांति, समृद्धि और परिवार की खुशहाली का आशीर्वाद प्राप्त होता है। इसी आस्था और विश्वास के साथ श्रद्धालुओं ने माता के चरणों में शीश नवाकर क्षेत्र एवं प्रदेश की सुख-समृद्धि की कामना की।
महिलाओं की सहभागिता से भक्तिमय हुआ माहौल,
चनवारीडांड महामाया मंदिर में महा अष्टमी के अवसर पर आयोजित यात्रा धार्मिक आस्था, महिला सहभागिता और सामाजिक एकजुटता का प्रतीक बनी। स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल की अगुवाई में क्षेत्र की महिलाओं ने यात्रा में भाग लेकर मां महामाया के प्रति अपनी श्रद्धा व्यक्त की। धार्मिक आयोजनों में महिलाओं की सक्रिय भागीदारी छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक परंपराओं और लोक आस्था को मजबूत करने का माध्यम भी है.
नवरात्र के दौरान मंदिरों में विशेष पूजा-अर्चना, भजन-कीर्तन और माता के दर्शन के लिए श्रद्धालुओं का पहुंचना क्षेत्र की धार्मिक परंपराओं का महत्वपूर्ण हिस्सा है। महा अष्टमी पर आयोजित इस यात्रा ने भी वातावरण को भक्तिमय बनाया और श्रद्धालुओं को माता की आराधना के लिए एक साथ आने का अवसर प्रदान किया।
सैकड़ों वर्ष पुराना है चनवारीडांड महामाया मंदिर का इतिहास,
चनवारीडांड स्थित मां महामाया मंदिर का इतिहास क्षेत्र की प्राचीन धार्मिक परंपराओं और स्थानीय जनश्रुतियों से जुड़ा हुआ है। सरगुजा संभाग के प्रमुख धार्मिक स्थलों में शामिल इस मंदिर को लेकर क्षेत्र के लोगों में गहरी आस्था है। सरगुजा संभाग आयुक्त कार्यालय की आधिकारिक वेबसाइट के अनुसार, यह मंदिर जिला मुख्यालय से लगभग 50 किलोमीटर दूर स्थित है और इसका निर्माण सैकड़ों वर्ष पूर्व तत्कालीन जमींदार परिवार द्वारा कराया गया था।
स्थानीय इतिहास और प्रचलित मान्यताओं के अनुसार, चनवारीडांड के महामाया मंदिर की स्थापना खड़गवां क्षेत्र के जमींदार परिवार ने अपनी कुलदेवी के रूप में मां महामाया की पूजा-अर्चना के लिए कराई थी। एक स्थानीय ऐतिहासिक विवरण में उल्लेख मिलता है कि जमींदार परिवार के स्वर्गीय उदित नारायण सिंह ने लगभग एक शताब्दी पूर्व रतनपुर से मां महामाया की प्रतिमा लाकर यहां स्थापित करने का प्रयास किया था। प्रतिमा के आगमन से जुड़ी यह कथा आज भी मंदिर की ऐतिहासिक पहचान का हिस्सा मानी जाती है। हालांकि, इन विवरणों को स्थानीय जनश्रुति के रूप में ही देखा जाना चाहिए।
समय के साथ यह मंदिर केवल एक परिवार की आराधना का केंद्र न रहकर आसपास के गांवों और दूर-दराज के क्षेत्रों के श्रद्धालुओं की आस्था का प्रमुख स्थल बन गया। नवरात्र के दौरान यहां माता की पूजा-अर्चना, मनोकामना ज्योति कलश प्रज्वलित करने और दर्शन करने की परंपरा विशेष रूप से प्रचलित है। मंदिर परिसर में भैरवनाथ की आराधना का भी उल्लेख मिलता है। धार्मिक आयोजनों और श्रद्धालुओं की बढ़ती भागीदारी ने इस स्थल को क्षेत्र की महत्वपूर्ण आध्यात्मिक पहचान प्रदान की है।
आस्था, परंपरा और सामाजिक एकता का संदेश,
महा अष्टमी के अवसर पर चनवारीडांड महामाया मंदिर में आयोजित महिलाओं की यात्रा ने एक बार फिर यह संदेश दिया कि धार्मिक परंपराएं समाज को जोड़ने और सांस्कृतिक विरासत को अगली पीढ़ी तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। मां महामाया के प्रति श्रद्धा व्यक्त करते हुए महिलाओं ने इस पावन अवसर को भक्तिमय बनाया।
स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल की अगुवाई में आयोजित इस यात्रा को क्षेत्र की धार्मिक आस्था और सामाजिक सहभागिता के रूप में देखा जा रहा है। मां महामाया के दरबार में श्रद्धालुओं की आस्था, मंदिर से जुड़ा ऐतिहासिक महत्व और नवरात्र की परंपराएं चनवारीडांड को क्षेत्र के प्रमुख धार्मिक स्थलों में विशिष्ट स्थान प्रदान करती हैं।
मां महामाया से सुख-समृद्धि की कामना,
महा अष्टमी के इस पावन अवसर पर मां महामाया के चरणों में क्षेत्र की सुख-शांति, समृद्धि, खुशहाली और जनकल्याण की कामना की गई। श्रद्धालुओं के लिए यह आयोजन केवल धार्मिक यात्रा नहीं, बल्कि अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जुड़ने और सामूहिक आस्था को मजबूत करने का अवसर भी रहा।
चनवारीडांड महामाया मंदिर का ऐतिहासिक महत्व और श्रद्धालुओं की अटूट आस्था आने वाली पीढ़ियों को भी इस धार्मिक विरासत से जोड़ने का माध्यम बनेगी। मां महामाया की आराधना के साथ महा अष्टमी का यह आयोजन क्षेत्र में भक्ति, विश्वास और सामाजिक एकजुटता का संदेश देता है।




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