कबीरधाम। बच्चों में होने वाले गैर-संचारी रोगों के प्रति जन-जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से कबीरधाम जिले के ग्राम बिरकोना, राजानवागाँव (भोरमदेव रोड) एवं ग्राम खैरबना कलां के बाजार चौक में कलाकारों द्वारा नुक्कड़ नाटक प्रस्तुत किए गए। इस जन-जागरूकता पहल का आयोजन जिला स्वास्थ्य समिति द्वारा यूनिसेफ छत्तीसगढ़ के तकनीकी सहयोग एवं एमसीसीआर ट्रस्ट के सहयोग से किया गया।
मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. डी. के. तूरे के मार्गदर्शन तथा जिला कार्यक्रम प्रबंधक श्रीमती अनुपमा तिवारी की सक्रिय सहभागिता से आयोजित इस कार्यक्रम का उद्देश्य समुदाय को बच्चों में होने वाले प्रमुख गैर-संचारी रोगों के प्रति जागरूक करना और समय पर पहचान एवं उपचार के लिए प्रेरित करना था।
नुक्कड़ नाटक के माध्यम से बच्चों में होने वाले तीन प्रमुख रोगों—सिकल सेल रोग, टाइप-1 डायबिटीज (बाल मधुमेह) एवं जन्मजात हृदय रोग—के लक्षणों, समय पर पहचान, उचित उपचार तथा उपलब्ध स्वास्थ्य सेवाओं के महत्व को प्रभावशाली अभिनय के माध्यम से प्रस्तुत किया गया। कलाकारों ने सरल एवं रोचक संवादों के जरिए आमजन को इन बीमारियों के प्रति जागरूक किया तथा बच्चों को समय पर स्वास्थ्य सेवाओं से जोड़ने का संदेश दिया।
कार्यक्रम के दौरान ग्राम प्रधानों, आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं, मितानिनों, स्वयं सहायता समूहों के सदस्यों, समाज प्रमुखों तथा ग्राम स्वास्थ्य, स्वच्छता एवं पोषण समितियों की भूमिका को महत्वपूर्ण बताया गया। समुदाय के इन प्रतिनिधियों से अपील की गई कि वे बच्चों में रोगों के संभावित लक्षण दिखाई देने पर परिवारों को समय पर जांच एवं उपचार के लिए प्रेरित करें। साथ ही, समुदाय और स्वास्थ्य विभाग के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने तथा जागरूकता संदेशों को प्रत्येक परिवार तक पहुंचाने में सामुदायिक सहभागिता पर विशेष बल दिया गया।
इस जन-जागरूकता कार्यक्रम का नेतृत्व यूनिसेफ छत्तीसगढ़ के स्वास्थ्य विशेषज्ञ डॉ. गजेंद्र सिंह ने किया। कार्यक्रम के सफल आयोजन में एमसीसीआर ट्रस्ट के संचालक डॉ. डी. श्याम कुमार का विशेष योगदान रहा।
यह पहल बच्चों में होने वाले गैर-संचारी रोगों के प्रति सामाजिक जागरूकता बढ़ाने, समय पर पहचान एवं उपचार को प्रोत्साहित करने तथा समुदाय की सक्रिय भागीदारी के माध्यम से बच्चों के बेहतर स्वास्थ्य और सुरक्षित भविष्य की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास है।
संदेश: जागरूक समुदाय, समय पर पहचान और उचित उपचार—हर बच्चे के स्वस्थ भविष्य की मजबूत नींव।


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