कोरिया जिले में अवैध रेत उत्खनन को लेकर उठे सवाल, सीमावर्ती क्षेत्रों में रात-दिन सक्रिय होने की चर्चा, खनिज विभाग की कार्यशैली पर भी सवाल, बंजारीडांड, गोविंदपुर, सोस और गड़तर क्षेत्र में लगातार रेत उत्खनन की शिकायतें


कोरिया बैकुंठपुर । कोरिया जिले में बरसात के मौसम के दौरान भी रेत के कथित अवैध उत्खनन और परिवहन को लेकर सवाल उठने लगे हैं। जिले के कोरिया और एमसीबी की सीमा से लगे बंजारीडांड, गोविंदपुर, सोस एवं गड़तर सहित आसपास के क्षेत्रों में कथित रूप से रेत का उत्खनन लगातार जारी रहने की चर्चाएं सामने आ रही हैं। स्थानीय स्तर पर लोगों का कहना है कि बारिश के मौसम में भी रेत निकालने का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है।

ग्रामीणों और स्थानीय जानकारों के अनुसार, सीमावर्ती क्षेत्र होने के कारण इन इलाकों में प्रशासनिक निगरानी और कार्रवाई को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं दिखाई देती। दो जिलों की सीमा से जुड़े होने के साथ ही क्षेत्र में वनभूमि का भी बड़ा हिस्सा है। ऐसे में खनिज विभाग के साथ वन विभाग की निगरानी व्यवस्था को लेकर भी स्थानीय स्तर पर सवाल उठाए जा रहे हैं।

रात-दिन रेत उत्खनन की चर्चा

स्थानीय लोगों के बीच यह चर्चा है कि संबंधित क्षेत्रों में दिन के साथ-साथ रात के समय भी रेत उत्खनन और परिवहन का काम किया जा रहा है। यदि इन शिकायतों में वास्तविकता है, तो बरसात के दौरान नदियों और जलस्रोतों से लगातार रेत निकालने से पर्यावरणीय प्रभाव के साथ-साथ नदी के प्राकृतिक प्रवाह और तटीय क्षेत्र पर भी असर पड़ सकता है।

ग्रामीणों का कहना है कि अवैध उत्खनन पर प्रभावी नियंत्रण के लिए नियमित गश्त, वाहनों की जांच तथा उत्खनन स्थलों की निगरानी आवश्यक है। स्थानीय स्तर पर यह भी मांग उठ रही है कि सीमावर्ती क्षेत्रों में संयुक्त रूप से निगरानी व्यवस्था मजबूत की जाए, ताकि किसी विभागीय सीमा के कारण कार्रवाई प्रभावित न हो।

खनिज विभाग की कार्यशैली पर सवाल

रेत उत्खनन को लेकर लगातार सामने आ रही चर्चाओं के बीच जिला खनिज विभाग की कार्यशैली को लेकर भी लोगों में तरह-तरह की चर्चाएं हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि शिकायतों के बावजूद यदि संवेदनशील क्षेत्रों में लगातार उत्खनन जारी रहता है तो विभाग की निगरानी व्यवस्था पर सवाल उठना स्वाभाविक है।

हालांकि, अवैध उत्खनन को लेकर लगाए जा रहे आरोपों की आधिकारिक पुष्टि संबंधित विभाग द्वारा किया जाना बाकी है। यह भी महत्वपूर्ण है कि किसी विभाग या अधिकारी पर मिलीभगत अथवा सांठगांठ का आरोप लगाने से पहले जांच और अधिकृत कार्रवाई के तथ्यों को सामने लाया जाए।

वन क्षेत्र होने के कारण निगरानी की जरूरत

बंजारीडांड, गोविंदपुर, सोस और गड़तर क्षेत्र के आसपास वन क्षेत्र होने के कारण यहां खनिज उत्खनन के साथ वन एवं पर्यावरणीय नियमों की निगरानी भी महत्वपूर्ण हो जाती है। स्थानीय जानकारों का कहना है कि यदि रेत उत्खनन वन क्षेत्र अथवा उसके आसपास किया जा रहा है, तो वन विभाग की भूमिका भी जांच और निगरानी के लिहाज से महत्वपूर्ण हो जाती है।

लोगों का कहना है कि दो जिलों की सीमा से जुड़े इन क्षेत्रों में खनिज, राजस्व, पुलिस और वन विभाग के बीच बेहतर समन्वय स्थापित कर संयुक्त निरीक्षण किया जाना चाहिए। इससे यह स्पष्ट हो सकेगा कि किन स्थानों पर वैध रूप से रेत उत्खनन की अनुमति है और किन स्थानों पर नियमों का उल्लंघन किया जा रहा है।

प्रशासन से जांच और कार्रवाई की मांग

स्थानीय लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि सीमावर्ती क्षेत्रों में रेत उत्खनन की वास्तविक स्थिति की जांच कराई जाए। नदी एवं नालों के संवेदनशील क्षेत्रों का निरीक्षण करने के साथ रेत से जुड़े वाहनों की भी जांच की जाए। यदि कहीं बिना अनुमति अथवा नियमों के विपरीत उत्खनन पाया जाता है तो संबंधितों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जाए।

बरसात के मौसम में रेत उत्खनन और परिवहन को लेकर उठ रहे सवालों के बीच अब निगाहें प्रशासन और खनिज विभाग की कार्रवाई पर टिकी हैं। यदि विभाग द्वारा मौके पर जांच कर स्थिति स्पष्ट की जाती है, तो अवैध उत्खनन को लेकर चल रही चर्चाओं पर भी स्थिति साफ हो सकती है।

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