नीरज गुप्ता की विशेष रिपोर्ट
कोरिया चरचा कालरी......नगर पालिका शिवपुर-चर्च की करीब 25 हजार आबादी के लिए चर्चा को नेशनल हाईवे से जोड़ने वाली प्रमुख सड़क इन दिनों गंभीर खतरे में है। चर्चा से जिला मुख्यालय बैकुंठपुर, रेलवे स्टेशन, बस स्टैंड, थाना सहित आसपास के क्षेत्रों तक आने-जाने के लिए हजारों लोगों और सैकड़ों वाहनों की आवाजाही इसी मार्ग से होती है। सड़क पर बनी पुलिया की मौजूदा हालत देखकर अब यह सवाल खड़ा हो गया है कि यदि समय रहते मरम्मत और सुरक्षा के ठोस इंतजाम नहीं किए गए तो कहीं यह महत्वपूर्ण मार्ग किसी बड़े हादसे का कारण न बन जाए।
भारी कोयला परिवहन से क्षतिग्रस्त हो रही सड़क और पुलिया.....स्थानीय लोगों के अनुसार, पूर्व में यह सड़क और पुलिया काफी बेहतर स्थिति में थी। लेकिन चरचा कालरी से सड़क मार्ग द्वारा कोयला परिवहन शुरू होने के बाद भारी वाहनों की लगातार आवाजाही ने सड़क और पुलिया पर दबाव बढ़ा दिया है। प्रतिदिन बड़ी संख्या में भारी वाहन यहां से गुजरते हैं। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि कई भारी वाहनों का वजन लोड सहित करीब 50 से 55 टन तक बताया जाता है।भारी वाहनों की लगातार आवाजाही के बीच पुलिया के उस हिस्से में, जहां पाइप लगाए गए हैं, सड़क का स्तर लगभग 8 से 10 इंच तक नीचे धंस चुका है। पुलिया के आसपास की मिट्टी भी कटाव का शिकार हो रही है। तस्वीरें इसकी गंभीर स्थिति को स्पष्ट रूप से सामने ला रही हैं।सबसे बड़ी चिंता यह है कि यह कोई सामान्य आंतरिक मार्ग नहीं, बल्कि चरचा कालरी को हाईवे से जोड़ने वाला महत्वपूर्ण संपर्क मार्गहै। पुलिया के कमजोर होने व सड़क के धंसने की स्थिति में गंभीर दुर्घटना हो सकती है और आवागमन बाधित हो सकता है। इसका सीधा असर हजारों स्थानीय नागरिकों, व्यापारियों, विद्यार्थियों, कर्मचारियों और रोजाना आवागमन करने वाले लोगों पर पड़ेगा।चरचा कालरी में कोयला उत्पादन और परिवहन से जुड़े वाहनों की आवाजाही लगातार बढ़ रही है। ऐसे में सड़क की क्षमता और पुलिया की मजबूती को लेकर तत्काल तकनीकी जांच की जरूरत है।
बंद हो जाएगी पानी की निकासी .....
मामला केवल सड़क की मजबूती तक सीमित नहीं है। स्थानीय लोगों के अनुसार, बैकुंठपुर रोड से रेलवे स्टेशन की ओर करीब डेढ़ से दो किलोमीटर क्षेत्र के पानी की निकासी भी इसी पुलिया के माध्यम से होती है। बरसात के दौरान पानी का दबाव बढ़ने पर पुलिया के नीचे और आसपास कटाव की स्थिति और गंभीर हो सकती है।
इस एकमात्र पुलिया के नीचे से तेज बहाव के साथ पानी निकलता है जिससेआसपास की मिट्टी का भारी मात्रा में कटा हो गया है और यह काटो सड़क तक पहुंच गया है यदि इसी प्रकार कटाव जारी रहा तो पुलिया के आधार पर भी खतरा बढ़ सकता है।
रेलवे की संपत्ति, फिर भी निगरानी का अभाव....... गौरतलब है कि यह पुलिया रेलवे क्षेत्र की संपत्ति से जुड़ी है और इसके निर्माण में रेलवे की भूमिका रही है। ऐसे में स्थानीय नागरिकों का कहना है कि रेलवे के संबंधित अधिकारियों को पुलिया की वर्तमान स्थिति का तत्काल निरीक्षण कराना चाहिए। सवाल यह भी है कि रेलवे के अधिकारी और कर्मचारी क्षेत्र में मौजूद रहने के बावजूद इस गंभीर स्थिति का संज्ञान अब तक क्यों नहीं लिया गया?
एसईसीएल प्रबंध है जिम्मेदार...... वही स्थानीय व्यापारियों और नागरिकों का कहना है कि कालरी प्रबंधन द्वारा कोयला परिवहन के लिए भारी वाहनों की आवाजाही बढ़ाए जाने के बाद सड़क-पुलिया पर भार कई गुना बढ़ा है। जो की पूरी तरह स्पष्ट है और प्रतिदिन सड़क के किनारे खड़ी दर्जनों ट्रैकों को देखकर शहाजी अंदाजा लगाया जा सकता है भारी कोयला परिवहन के कारण सड़क अथवा पुलिया को नुकसान पहुंचा है, तो उसकी मरम्मत और मजबूतीकरण की जिम्मेदारी तय की जानी चाहिए।कोयला परिवहन से होने वाले आर्थिक लाभ का लाभ लेने वाले प्रबंधन की जिम्मेदारी केवल कोयला निकालने और बेचने तक ही क्यों सीमित रहे? जिस सड़क का इस्तेमाल खदान के परिवहन के लिए लगातार किया जा रहा है, उसके रखरखाव और क्षति की भरपाई के लिए भी जिम्मेदारी तय होना आवश्यक है।
स्थानीय समस्याओं के समाधान और नागरिक सुविधाओं की जिम्मेदारी नगर पालिका की भी है। इसके बावजूद इतनी महत्वपूर्ण सड़क और पुलिया की स्थिति को लेकर अब तक ठोस पहल सामने नहीं आना गंभीर प्रशासनिक उदासीनता का विषय है।नगर पालिका शिवपुर-चर्चा को तत्काल मौके का निरीक्षण कराकर रेलवे, SECL प्रबंधन और जिला प्रशासन को संयुक्त रूप से स्थिति से अवगत कराना चाहिए। केवल पत्राचार नहीं, बल्कि पुलिया की तकनीकी जांच, भारी वाहनों के भार का आकलन और आवश्यक मरम्मत/पुनर्निर्माण की कार्ययोजना भी तैयार की जानी चाहिए।
नगर पालिका शिवपुर-चर्चा का चुनाव भी निकट है। ऐसे समय में चुनावी मैदान में उतरने की तैयारी कर रहे संभावित प्रत्याशियों के लिए यह गंभीर सवाल है कि 25 हजार की आबादी के आवागमन से जुड़ी इतनी महत्वपूर्ण समस्या अब तक उनके मुद्दों में क्यों नहीं दिखाई दे रही?जनता को केवल चुनाव के समय सड़क, विकास और सुविधाओं के वादे नहीं, बल्कि आज की वास्तविक समस्याओं पर तत्काल आवाज उठाने वाले प्रतिनिधि चाहिए। 1 महीने पश्चात छठ पूजा का त्यौहार है वही दुर्गा पूजा भी बेहद समीप है इस दौरानप्रतिदिन हजारों की भीड़ होती है आसपास के समीप के गांव क्षेत्र के लोग चर्चा आते हैं यह सब जानते हुए भी स्थानीय जनप्रतिनिधियों का आंखें बंद करना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है
जिला प्रशासन तत्काल ले संज्ञान......
स्थानीय नागरिकों और व्यापारियों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि मामले को गंभीरता से लेते हुए रेलवे, एसईसीएल, लोक निर्माण विभाग तथा नगर पालिका के अधिकारियों की संयुक्त टीम से पुलिया और सड़क का तत्काल निरीक्षण कराया जाए।साथ ही भारी वाहनों की आवाजाही से सड़क को हुए नुकसान का तकनीकी आकलन कराकर जिम्मेदारी तय की जाए।क्योंकि सवाल सिर्फ एक पुलिया का नहीं है—यह हजारों लोगों के रोजमर्रा के आवागमन, जल निकासी और चर्चा कलरी के संपर्क का सवाल है। पुलिया टूटने के बाद जिम्मेदारियां तय करने से बेहतर है कि खतरा दिखाई देते ही कार्रवाई की जाए।


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