स्वास्थ्य विभाग छत्तीसगढ़ द्वारा सिकल सेल रोग पर राज्य स्तरीय परामर्श आयोजित


रायपुर।  छत्तीसगढ़ में सिकल सेल रोग की रोकथाम, शीघ्र पहचान, उपचार एवं देखभाल को और अधिक प्रभावी बनाने तथा राज्य में सिकल सेल सेवाओं को खोलने के उद्देश्य से रायपुर में सिकल सेल रोग पर राज्य स्तरीय परामर्श का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का आयोजन स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग, राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन, यूनिसेफ के तकनीकी सहयोग द्वारा किया गया, जिसमें सिकल सेल रोग के सबसे अधिक रोगी वाले शीर्ष 11 जिलों - बस्तर, सरगुजा, रायगढ़, जशपुर, गरियाबंद, कबीरधाम, राजनांदगांव, दुर्ग, रायपुर, धमतरी एवं महासमुंद के इलाकों को विशेष रूप से आमंत्रित किया गया।

मिशन संचालक, राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन एवं संचालक, स्वास्थ्य सेवाएं, संजीव कुमार झा के मार्गदर्शन में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग के राज्य नोडल अधिकारी, डॉ. के. आर. सोनवानी, द्वारा सिकल सेल उन्मूलन मिशन के लक्ष्यों की प्राप्ति पर मुख्य संबोधित दिया गया।

तकनीकी केंद्रों में राज्य में सिकल सेल रोग की वर्तमान प्रगति, प्रमुख केंद्रों एवं इकाइयों पर विस्तृत चर्चा की गई। इसके साथ ही सिकल सेल रोग में शोध की नियुक्तियां, सिकल सेल देखभाल से संबंधित नवीनतम अपडेट तथा स्क्रीनिंग, प्रबंधन एवं उपचार अनुपालन को बेहतर बनाने के उपायों पर कर्मियों द्वारा जानकारी साझा की गई।

परामर्श में राज्य के विभिन्न मेडिकल केंद्रों की सिकल सेल देखभाल में भूमिका पर विशेष चर्चा हुई।  इस दौरान बस्तर मेडिकल कॉलेज के डॉ. स्मिता वर्मा, रायपुर मेडिकल कॉलेज के डॉ. ओंकार खंडवाल, तथा सरगुजा मेडिकल कॉलेज के डॉ. आलोक सिंह ने अपने अनुभव साझा किए तथा सिकल सेल रोग से प्रभावित बच्चों के लिए विशेषज्ञ सेवाएं, उपचार एवं रेफरल व्यवस्था को बेहतर बनाने की संभावनाओं पर चर्चा की।

सिकल सेल रोग के प्रभावी प्रबंधन के लिए बहु-विभागीय समन्वय को भी महत्वपूर्ण विषय के रूप में सामने रखा गया। आदिम जाति एवं अनुसूचित जाति विकास विभाग, स्कूल शिक्षा विभाग,  पंचायत एवं ग्रामीण विकास के केंद्रों ने सिकल सेल रोग से प्रभावित बच्चों एवं परिवारों तक सेवाओं की बेहतर पहुंच सुनिश्चित करने में अपने-अपने विभाग की भूमिका पर विचार साझा किया। 

सत्र के दौरान सामाजिक कलंक (सोशल स्टिग्मा) एवं सिकल सेल रोग पर भी चर्चा की गई। रोग से जुड़े सामाजिक एवं मनोवैज्ञानिक पहलू, परिवारों में जागरूकता तथा समुदाय में सकारात्मक दृष्टिकोण विकसित करने की आवश्यकता पर जोर दिया गया।

तकनीकी सत्र में जशपुर मॉडल फॉर सिकल सेल केयर को एक महत्वपूर्ण पहल के रूप में प्रस्तुत किया गया।  इसके साथ ही सिकल सेल रोग प्रबंधन में तकनीक की भूमिका तथा छत्तीसगढ़ में सिकल सेल सेवाओं को और अधिक मजबूत करने की रणनीतियों पर स्वयंसेवकों ने विचार रखा।

कार्यक्रम में यूनिसेफ छत्तीसगढ़ के स्वास्थ्य विशेषज्ञ डॉ. गजेंद्र सिंह के नेतृत्व में यूनिसेफ छत्तीसगढ़ के केंद्रों सहित एम्स रायपुर के डॉ. सुनील तथा डॉ. अमित कुमार मिश्रा, आयुष विश्वविद्यालय के डॉ. चंद्रेश सिन्हा, आयुष संचालनालय के डॉ. अरविंद मरावी, सिकल सेल संस्थान के डॉ. जागृति चंगराकर तथा डॉ. आदित्य, संगवारी संस्था के डॉ. योगेश्वर कालकोंडे, नास्को के प्रतिनिधि, साल्वियो थेराप्यूटिक्स से डॉ. सुचित्रा कटारिया, एकम फाउंडेशन, एमसीसीआर ट्रस्ट, एवं निजी चिकित्सक डॉ. विकास गोयल सहित विभिन्न केंद्रों एवं सहयोगी केंद्रों ने सिकल सेल सेवाओं को खोलने के लिए आवश्यक रणनीतियों पर चर्चा की। सिकल सेल संस्थान, रायपुर एवं अन्य केंद्रों द्वारा शोध, देखभाल एवं उपचार से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारी साझा की गई।

परामर्श के दौरान प्रतिभागियों को चार समूहों में विभाजित कर समूह कार्य कराया गया। समूहों ने सिकल सेल कार्यक्रम के चार प्रमुख क्षेत्रों पर कार्य किया—

1. स्क्रीनिंग कवरेज बढ़ाना

2. उपचार प्राप्ति एवं उपचार अनुपालन में सुधार

3. सामाजिक सुरक्षा योजनाओं की कवरेज बढ़ाना

4. रेफरल तंत्र को मजबूत करना

समूह कार्य में आमंत्रित 11 जिलों से संबंधित और संभावित टीकाकरण पर चर्चा की गई।  इसके पश्चात प्रत्येक समूह द्वारा अपने सुझाव एवं कार्य योजना प्रस्तुत की गई।

कार्यक्रम में कार्यान्वयन से जुड़ी जबड़े पर खुली चर्चा आयोजित की गई, जिसमें विभिन्न जिलों के आसपास ने जमीनी स्तर पर सिकल सेल सेवाओं के संचालन के दौरान आने वाली समस्याओं, उपलब्ध संसाधनों तथा सुधार की संभावनाओं को साझा किया। चर्चा के आधार पर राज्य में स्क्रीनिंग, उपचार अनुपालन, सामाजिक सुरक्षा एवं रेफरल सेवाओं को मजबूत करने के लिए प्राथमिक वाले कार्य एवं आगामी कार्य योजना पर सहमति बनाई गई।

इस कार्यक्रम को सफल बनाने में राज्य नोडल अधिकारी डॉ. के. आर. सोनवानी, राज्य सलाहकार (सिकल सेल) डॉ. वर्षा राजपूत तथा अन्य संबंधित विभागों के अधिकारियों एवं पदाधिकारियों का महत्वपूर्ण योगदान रहा।

एक टिप्पणी भेजें

0 टिप्पणियाँ