कांस के फूलों से सजी कोरिया की धरती, शरद ऋतु के आगमन का दे रही संदेश सफेद फूलों की चादर ओढ़े गांवों के खुले मैदान और सड़क किनारे के नजारे कर रहे मन मोहने को मजबूर, प्रकृति के इस अनुपम उपहार को सहेजने की जरूरत


कोरिया बैकुंठपुर। नीले आसमान के नीचे हरियाली की चादर ओढ़े कोरिया की धरती इन दिनों सफेद रंग में रंगी नजर आ रही है। गांवों के खुले मैदानों, खेतों की मेड़ों और सड़क किनारे दूर तक लहराते कांस के सफेद फूल ऐसा मनमोहक दृश्य प्रस्तुत कर रहे हैं, मानो प्रकृति ने धरती को सफेद फूलों की चादर से सजा दिया हो।

हल्की हवा के साथ लहराते कांस के फूलों को देखकर कुछ देर ठहरने को मजबूर हो गया । यह केवल खूबसूरत नजारा नहीं, बल्कि मौसम के बदलने का प्रकृति द्वारा दिया गया संदेश भी है। स्थानीय ग्रामीणों से चर्चा किया तो उन्होंने बताया कि कांस का खिलना इस बात का संकेत माना जाता है कि वर्षा ऋतु अब विदा होने लगी है और शरद ऋतु दस्तक दे चुकी है। 

भारतीय संस्कृति और ग्रामीण जीवन में कांस के फूलों का विशेष महत्व रहा है। भादो-कुंवार के दिनों में जब कांस के सफेद फूल धरती पर खिल उठते हैं, तो ग्रामीण अंचलों में इसे प्रकृति के बदलाव के रूप में देखा जाता है। वर्षा के बाद शरद ऋतु के आगमन की यह प्राकृतिक छटा ग्रामीण जीवन और पारंपरिक पर्व-त्योहारों की याद भी दिलाती है।


स्थानीय ग्रामीण ने तो गोस्वामी तुलसीदास जी के दोहे  'फूले कास सकल महि छाई। जनु बरषा कृत प्रगट बुढ़ाई॥' का उल्लेख करते हुए बताया कि जब कांस के फूलों से पूरी धरती ढक जाती है, तो ऐसा प्रतीत होता है मानो वर्षा ऋतु का बुढ़ापा प्रकट हो गया हो।

खूबसूरती के साथ ग्रामीण जीवन का हिस्सा

कोरिया के बैकुंठपुर क्षेत्र के गांवों में कांस केवल प्रकृति की सुंदरता नहीं, बल्कि ग्रामीण जीवन का उपयोगी हिस्सा भी है। कांस की घास के परिपक्व होने के बाद ग्रामीण इसे काटकर और सुखाकर 'खरहरा' अथवा मोटी झाड़ू तैयार करते हैं। इसका उपयोग घर के आंगन, गलियों तथा मवेशियों के कोठार की साफ-सफाई में किया जाता है।

आज जब गांवों से लेकर शहरों तक तेजी से कंक्रीट के जंगल निर्माण हो रहा है और खाली जमीन लगातार कम होती जा रही है, तब कांस के ये फूल हमें एक महत्वपूर्ण संदेश भी देते हैं।

क्या हम अपनी आने वाली पीढ़ियों के लिए ऐसी प्राकृतिक सुंदरता बचाकर रख पाएंगे?

जरूरत है कि विकास के साथ प्रकृति के लिए भी जगह छोड़ी जाए। खेतों की मेड़, गांवों के खुले मैदान, तालाबों के आसपास की भूमि और प्राकृतिक वनस्पतियों के स्थानों को बचाना हम सबकी जिम्मेदारी है।

कोरिया के पटना तहसील क्षेत्र में सड़क किनारे खुले मैदान में खिले कांस के ये फूल प्रकृति के इसी अनुपम रूप की तस्वीर पेश कर रहे हैं। सफेद फूलों से लहलहाते ये पौधे मानो कह रहे हों प्रकृति ने हमें इतना कुछ दिया है, अब उसे सहेजने की हमारी बारी है। कोरिया की शांत, सुंदर और हरियाली से भरी धरती पर कांस के ये सफेद फूल सचमुच प्रकृति की एक ऐसी पेंटिंग बन गए हैं, जिसे किसी कलाकार ने नहीं, बल्कि स्वयं प्रकृति ने बनाया है।

आइए, इस खूबसूरती को बचाने का संकल्प  लें। ताकि आने वाली पीढ़ियां भी कोरिया की धरती पर खिलते इन कांस के फूलों को देखकर कह सकें प्रकृति सचमुच खूबसूरत है।

नोट-यह तस्वीर/वीडियो कोरिया जिले के पटना तहसील के राष्ट्रीय राज मार्ग किनारे की है। 


(विजय मानिकपुरी, कोरिया)

जिला जनसंपर्क अधिकारी कोरिया

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