नीरज गुप्ता की विशेष रिपोर्ट
चरचा कालरी.......प्रतिवर्ष करोड़ों रुपये का लाभ अर्जित करने वाली चरचा माइंस (आरओ) में कार्यरत कर्मचारियों और उनके परिवारों की सुरक्षा भगवान भरोसे छोड़ दी गई है। श्रमिक कॉलोनियों में वर्षों से खुले और जर्जर पड़े सेफ्टी (सेप्टिक) टैंक किसी बड़े हादसे का इंतजार करते नजर आ रहे हैं। कर्मचारियों द्वारा कई बार आवेदन और शिकायतें देने के बावजूद स्थानीय कोलियरी प्रबंधन की उदासीनता लगातार बनी हुई है।गुरुवार के दिन विवेकानंद कॉलोनी स्थित विभागीय आवास क्रमांक 972 के पीछे बिना स्लैब वाले खुले सेफ्टी टैंक में एक गोवंश गिर गया। हादसे में गोवंश गंभीर रूप से घायल हो गया। स्थानीय लोगों ने काफी मशक्कत के बाद उसे सुरक्षित बाहर निकाला। यह पहला मामला नहीं है। क्षेत्रवासियों के अनुसार पहले भी कई बार मवेशी इन खुले टैंकों में गिर चुके हैं, लेकिन हर बार उन्हें स्थानीय लोगों ने ही बाहर निकाला। दर्जनों बार सेप्टिक टैंक में गोवंश के गिरने की घटनाएं हो चुकी है लेकिन कभी भी कालरी प्रबंधन की ओर से कोई भी प्रतिनिधि अथवा जिम्मेदार अधिकारी गोवंश को निकालने नहीं आया कालरी प्रबंधन की ओर से न तो टैंकों को सुरक्षित कराया गया और न ही ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए कोई स्थायी व्यवस्था की गई।
स्थिति की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि विभागीय आवास क्रमांक 531 का सेफ्टी टैंक भी लंबे समय से खुला पड़ा है। संबंधित कर्मचारी ने सिविल विभाग से कई बार मरम्मत और स्लैब लगाने की मांग की, लेकिन हर बार अलग-अलग बहाने बनाकर मामला टाल दिया गया। कभी ठेकेदार नहीं होने, कभी कर्मचारियों की कमी तो कभी बारिश समाप्त होने का हवाला देकर जिम्मेदारी से बचा जाता रहा। वर्तमान में टैंक पूरी तरह खुला है और उसमें वर्षा का पानी भरा हुआ है। ऐसे में किसी भी समय कोई बच्चा, बुजुर्ग या मवेशी उसमें गिर सकता है। इस गंभीर समस्या के निवारण हेतु बैकुंठपुर क्षेत्र के महाप्रबंधक का संज्ञान लेना नितांत आवश्यक है
विश्वसनीय सूत्रों के अनुसार श्रमिक कॉलोनी के कई आवासों के सेप्टिक टैंक क्षतिग्रस्त होने के कारण गंदे पानी की निकासी सीधे नालियों में कर दी गई है। इससे घरेलू अपशिष्ट खुले में बह रहा है, जिससे जल प्रदूषण, दुर्गंध और संक्रमण का खतरा लगातार बढ़ रहा है। यह स्थिति पर्यावरण संरक्षण के नियमों पर भी गंभीर प्रश्नचिह्न खड़े करती है।
कर्मचारियों का कहना है कि चर्चा माइंस से प्रतिवर्ष करोड़ों रुपये का उत्पादन और लाभ प्राप्त करने वाला प्रबंधन कर्मचारियों की मूलभूत सुरक्षा और स्वच्छता जैसी आवश्यक सुविधाओं पर ध्यान नहीं दे रहा है। लगातार शिकायतों के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं होना कर्मचारियों में गहरी नाराजगी का कारण बन गया है।
यदि हुआ बड़ा हादसा तो जिम्मेदार कौन......खुले सेफ्टी टैंकों के कारण कभी भी जनहानि की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता। यदि भविष्य में किसी बच्चे, कर्मचारी या अन्य व्यक्ति के साथ कोई अप्रिय घटना होती है, तो उसकी पूरी जिम्मेदारी कोलियरी प्रबंधन और संबंधित सिविल विभाग की होगी। स्थानीय नागरिकों और कर्मचारियों ने सभी खुले सेफ्टी टैंकों को तत्काल बंद कराने, क्षतिग्रस्त सेप्टिक टैंकों की मरम्मत कराने तथा पूरे श्रमिक आवास क्षेत्र का सुरक्षा ऑडिट कराने की मांग की है।
पर्यावरण विभाग से कार्रवाई की मांग......स्थानीय लोगों ने क्षेत्रीय प्रदूषण नियंत्रण मंडल एवं संबंधित प्रशासनिक अधिकारियों से मामले का स्वतः संज्ञान लेकर जांच कराने तथा पर्यावरण और मानव सुरक्षा के साथ खिलवाड़ करने वाले जिम्मेदार अधिकारियों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की मांग की है।


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