कोरिया। प्रख्यात समाजसेवी, रामायण के प्रख्यात टीकाकार एवं देहदान संकल्पी श्री गणेश दास मानिकपुरी का बुधवार प्रातः आकस्मिक निधन उनके निवास दोन्दे खुर्द, रायपुर में हो गया। उनके निधन से सामाजिक, सांस्कृतिक, साहित्यिक एवं जनसंपर्क जगत में शोक की लहर फैल गई। बुधवार को उनके निवास पर अंतिम दर्शन के लिए बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधि, प्रशासनिक अधिकारी, पत्रकार, साहित्यकार, सामाजिक कार्यकर्ता एवं शुभचिंतक पहुंचे और नम आंखों से उन्हें अंतिम विदाई दी।
प्रदेश के सभी 33 जिलों में पदस्थ जनसंपर्क अधिकारियों सहित अनेक वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों, जनप्रतिनिधियों, पत्रकारों, साहित्यकारों तथा विभिन्न सामाजिक एवं सांस्कृतिक संगठनों के प्रतिनिधियों ने शोक संदेश जारी कर उनके निधन को समाज के लिए अपूरणीय क्षति बताया तथा श्रद्धासुमन अर्पित किए।
श्री गणेश दास मानिकपुरी अपनी स्पष्टवादिता, निर्भीक व्यक्तित्व, सादगीपूर्ण जीवन और सामाजिक सरोकारों के प्रति आजीवन समर्पण के लिए व्यापक रूप से सम्मानित थे। रामायण के प्रख्यात टीकाकार के रूप में उन्होंने धार्मिक, नैतिक एवं मानवीय मूल्यों के प्रचार-प्रसार में उल्लेखनीय योगदान दिया। उनके विचारों और सामाजिक सक्रियता ने अनेक लोगों को सकारात्मक दिशा प्रदान की।
मानव सेवा के प्रति उनका समर्पण उनके जीवन के अंतिम निर्णय में भी स्पष्ट रूप से दिखाई दिया। उन्होंने अपने जीवनकाल में ही पंडित जवाहरलाल नेहरू स्मृति चिकित्सा महाविद्यालय (मेडिकल कॉलेज), रायपुर को अपनी पार्थिव देह दान करने का संकल्प लिया था तथा इसके लिए विधिवत सहमति-पत्र भी भर रखा था। उनके निधन के उपरांत परिजनों ने उनकी अंतिम इच्छा का सम्मान करते हुए पार्थिव देह मेडिकल कॉलेज को दान कर दी।
उनके इस अनुकरणीय एवं प्रेरणादायी निर्णय की उपस्थित सभी लोगों ने मुक्त कंठ से सराहना की। श्रद्धांजलि सभा में वक्ताओं ने कहा कि श्री गणेश दास मानिकपुरी ने अपने जीवन में समाजसेवा की जो मिसाल कायम की, उसे उन्होंने मृत्यु के पश्चात भी देहदान के माध्यम से सार्थक किया। उनका यह निर्णय मानवता की सेवा का अमिट संदेश है और आने वाली पीढ़ियों के लिए सदैव प्रेरणास्रोत बना रहेगा।
श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए उपस्थित जनों ने उनके व्यक्तित्व, कृतित्व, सामाजिक योगदान और मानवीय मूल्यों के प्रति उनकी अटूट प्रतिबद्धता को स्मरण किया तथा ईश्वर से दिवंगत आत्मा की शांति एवं शोकाकुल परिवार को इस असहनीय दुःख को सहन करने की शक्ति प्रदान करने की प्रार्थना की।

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