आग लगे तो भगवान भरोसे! शिवपुर-चरचा....... नगर पालिका का फायर फाइटिंग सिस्टम पूरी तरह ध्वस्त..... जब आग लगी तो फायर ब्रिगेड नहीं मिली ......जनता की जान जोखिम में.... आगजनी की घटनाओं के दौरान वाहन खराब होने का हवाला देकर पल्ला झाड़ता है पालिका प्रशासन.....



नीरज गुप्ता की विशेष रिपोर्ट 

कोरिया चरचा कालरी.....नगर पालिका शिवपुर-चरचा का अग्निशमन तंत्र इन दिनों गंभीर सवालों के घेरे में है। करोड़ों रुपये की संपत्तियों और हजारों नागरिकों की सुरक्षा का जिम्मा संभालने वाला पालिका का फायर ब्रिगेड वाहन अधिकांश समय आग बुझाने के बजाय पानी सप्लाई करने में व्यस्त रहता है, और जब वास्तविक आपदा सामने आती है तो पालिका का घिसा-पिटा जवाब तैयार रहता है—"गाड़ी खराब है, मरम्मत के लिए भेजी गई है।"

विडंबना यह है कि यह वाहन कब से खराब है, कब तक बनेगा और नागरिकों की सुरक्षा के लिए वैकल्पिक व्यवस्था क्या है, इसका जवाब किसी जिम्मेदार अधिकारी के पास नहीं है। पूरा ग्रीष्मकाल बीत गया, क्षेत्र में कई अग्निकांड हुए, लेकिन नगर पालिका का अग्निशमन वाहन अब तक गैराज की शोभा बढ़ा रहा है।करीब चार माह पूर्व नगर पालिका कार्यालय से महज 20 मीटर दूर स्थित अधिकारी कॉलोनी निवासी सचिन सिंह की क्रेटा कार में अज्ञात लोगों ने आग लगा दी थी। घटना की सूचना तत्काल नगर पालिका को दी गई, लेकिन वहां से वही पुराना जवाब मिला कि फायर ब्रिगेड वाहन खराब है। परिणामस्वरूप आग पर समय रहते काबू नहीं पाया जा सका। दूसरी जगह से फायर ब्रिगेड आने में समय लगा और तब तक लाखों की वाहन जलकर राख हो गई इसके बाद वर्तमान में इसी वार्ड क्रमांक 8 में ही  6 जून को नगर पालिका परिषद कार्यालय से लगभग 30 मीटर दूर स्थित चाइना ब्लॉक अधिकारी आवास में सिलेंडर लीकेज के कारण भीषण हादसा हुआ, जिसमें एक अधिकारी की दुखद मृत्यु हो गई। इस घटना के दौरान भी नगर पालिका का अग्निशमन तंत्र नदारद रहा। मजबूरी में बैकुंठपुर नगर सेना तथा एसईसीएल के रेस्क्यू विभाग से फायर ब्रिगेड बुलानी पड़ी, जिसे मौके तक पहुंचने में आधे घंटे से अधिक का समय लग गया।

सबसे बड़ा प्रश्न यह है कि जब नगर पालिका कार्यालय के आसपास हुई घटनाओं में ही अग्निशमन वाहन उपलब्ध नहीं हो पाया, तो दूरस्थ वार्डों और बस्तियों के नागरिक आपात स्थिति में किससे सहायता की उम्मीद करें?

क्षेत्र में हर वर्ष गर्मी के मौसम में जंगलों, झाड़ियों और रिहायशी इलाकों के आसपास आग लगने की घटनाएं होती रहती हैं। ऐसे समय में नागरिकों की पहली उम्मीद नगर पालिका के अग्निशमन वाहन से होती है, लेकिन लगता है कि पालिका प्रशासन को जनसुरक्षा से अधिक वाहन की मरम्मत के बिलों की चिंता है।स्थानीय लोगों का आरोप है कि जब तक आग लगने का मौसम रहता है तब तक वाहन गैराज में पड़ा रहता है और जब संकट का समय निकल जाता है तब भारी-भरकम मरम्मत खर्च दिखाकर वाहन वापस लाया जाता है। यदि यह आरोप सही हैं तो यह केवल प्रशासनिक लापरवाही नहीं बल्कि नागरिकों की सुरक्षा के साथ खिलवाड़ है।नगर पालिका शिवपुर-चरचा  के जिम्मेदार अधिकारियों की चुप्पी और निष्क्रियता ने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि आखिर जनता की सुरक्षा उनकी प्राथमिकता में है भी या नहीं। यदि समय रहते अग्निशमन व्यवस्था दुरुस्त नहीं की गई तो भविष्य में होने वाली किसी भी बड़ी जनहानि की नैतिक जिम्मेदारी संबंधित अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों से नहीं टाली जा सकेगी।जनता पूछ रही है—आखिर नगर पालिका का फायर ब्रिगेड वाहन कब तक गैराज में रहेगा और नागरिकों की जान-माल की सुरक्षा का जिम्मा कौन उठाएगा?

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