कोरिया बैकुंठपुर । उप संचालक पशु चिकित्सा सेवाएं कार्यालय में कृत्रित गर्भाधान(एआई) कार्यकर्ताओं को मानदेय में २० फीसदी रिश्वत मांगने की शिकायत के मामले में संचालनालय से जांच टीम कोरिया पहुंची। पांच सदस्यीय टीम दो दिन से दस्तावेज खंगाल रही है। शनिवार को छुट्टी के दिन भी सारे अधिकारी व कर्मचारी कार्यालय बुलाए गए।
जानकारी के अनुसार, बंजारीडांड निवासी दिलीप पांडेय ने सीएम हेल्पलाइन १०७६ में शिकायत दर्ज कराई थी। जिसमें बताया गया है कि उप उप संचालक पशु चिकित्सा सेवाएं कार्यालय में करोड़ों का गबन हुआ है। सूचना के अधिकार के तहत उपलब्ध जानकारी में विभाग में संचालित कृत्रिम गर्भाधान कार्यक्रम योजना अंतर्गत भुगतान किए जाने वाले मानदेय में भारी भ्रष्टाचार एवं गबन किया गया है। एक कृत्रिम गर्भाधान कार्यकर्ता विकास साहू को तीन वर्ष में 17.32 लाख भुगतान किया गया। जिसका भुगतान के लिए कोषालय को भेजे गए स्वीकृत आदेश में किसी प्रकार की सूची संलग्न नहीं है। कृत्रिम गर्भाधान के बनाए बिल का भौतिक सत्यापित प्रपत्र में भी स्वीकृत नहीं किया गया है। तीन वर्ष में एक कृत्रिम गर्भाधान कार्यकर्ता को 17.32 लाख भुगतान किया गया। जबकि प्रति वत्सोपादन में 12 सौ रुपए मानदेय का प्रावधान है। जिसमें एक वर्ष की उम्र के 1443 वत्स होना चाहिए। जिसमें कम से कम तीन हजार कृत्रिम गर्भाधान के लिए उन्नत सीमेन का उपयोग होना चाहिए। परंतु पशुपालन विभाग ने एआई वर्कर विकास साहू को तीन हजार सीमेन ही नहीं दिया गया था। मामले में उप संचालक पशु चिकित्सा सेवाएं की पांच सदस्यीय समिति ने भौतिक सत्यापन किया था। जिसमें
भुगतान किए गए 95 फीसदी प्रकरण फर्जी पाए गए थे। शिकायतकर्ता के मुताबिक, एआई कार्यकर्ता विकास साहू ने एक लाख अठारह हजार रिश्वत लेने की शिकायत की गई थी। मामला सुर्खियों में आने के बाद रिश्वत की राशि को लौटाई गई। प्रकरण में एक लिपिक को निलंबित किया गया। बताया जाता है कि उप संचालक कार्यालय में कृत्रिम गर्भाधान कार्यकर्ताओं से जैसी रिश्वत मिलती थी, उसी अनुपात में बिना स्वीकृत के मानदेय का भुगतान करते थे।
ये हैं जांच टीम में शामिल सदस्य
संचालक पशु चिकित्सा सेवाएं चंद्रकांत वर्मा ने पांच सदस्यीय जांच टीम बनाकर कोरिया भेजा है। साथ ही सात दिन के भीतर जांच रिपोर्ट मांगी है। जांच टीम में संचालनालय से डॉ रोहिणी पाठक एवं डॉ संध्या शर्मा पशु चिकित्सा सहायक शल्यज्ञ, योगिता कोसिमा लेखा अधिकारी, अजय कुमार नामदेव एवं आकाश दास लिपिकीय स्टाफ शामिल हैं। संचालनालय की टीम एआई कार्यकर्ता को अनियमित मानदेय भुगतान, स्वेच्छाचारिता, भ्रष्टाचार सहित अन्य बिंदुओं की अलग-अलग जांच कर रही है।
इन बिंदुओं की जांच चल रही
- वर्ष 2022-23, 2023-24, 2024-25 एवं 2025-26 में एआई कार्यकर्ताओं को मानदेय भुगतान की वर्षवार सूची।
-भुगतान के संबंध में कार्यकर्तावार का चारों चरण के भौतिक सत्यापन संबंधी अभिलेख, सत्यापन करने वाले पशु चिकित्सक का नाम।
- चार साल में किये गये कार्यों और वत्सोपादन के सत्यापन की स्थिति।
- लंबित सत्यापन एवं लंबित मानदेय की वर्षवार सूची तथा मानदेय लंबित होने का कारण।
- चार साल में कार्यकर्ताओं की मानदेय स्वीकृत संबंधी समस्त दस्तावेज, नोटशीट की प्रति।
- हिमीकृत वीर्य स्ट्रा, जिसका कार्यकर्ता ने उपयोग किया है। ब्रीड का आंकलन संबंधी अभिलेख व कार्यालय कोरिया की कार्यवाही।
- 2 साल में कोटेशन के माध्यम से क्रय की गई सामग्रियों, औषधियों, द्रव्यों की वर्षवार जानकरी

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