कोरिया बैकुंठपुर। बरदिया-पीपलडांड क्षेत्र के जंगलों को पुनः हरा-भरा बनाने और पर्यावरण संरक्षण का संदेश जन-जन तक पहुंचाने के उद्देश्य से सर्व आदिवासी समाज के बैनर तले सीड बॉल अभियान शुरू किया गया है। इस अभियान को क्षेत्र के सामाजिक कार्यकर्ताओं, शिक्षकों, जनप्रतिनिधियों और जागरूक नागरिकों का व्यापक समर्थन मिल रहा है। अभियान का उद्देश्य देशी प्रजातियों के बीजों को सीड बॉल के माध्यम से जंगलों में फैलाकर प्राकृतिक रूप से नए पौधों का विकास करना तथा क्षेत्र की जैव विविधता को संरक्षित करना है।
अभियान के तहत विभिन्न देशी प्रजातियों के लगभग 1500 सीड बॉल जंगल क्षेत्र में बिखेरे जाएंगे। बारिश के मौसम में ये सीड बॉल मिट्टी में मिलकर अंकुरित होंगे और आने वाले वर्षों में हजारों नए पौधों के रूप में विकसित होने की उम्मीद है। आयोजकों का मानना है कि यह पहल जंगलों की हरियाली बढ़ाने के साथ-साथ वन्य जीवों के लिए बेहतर प्राकृतिक आवास तैयार करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
इस पर्यावरणीय पहल में विजय सिंह ठाकुर, गायत्री सिंह, नीरा सिंह कुसरो, गीता उरांव, वसीम खान, अब्दुल हमीद खान, विजय सिंह गुरु, सुनील सिंह, प्रताप सिंह, मनोज सिंह, प्रदीप सिंह, इंद्रजीत सिंह, अर्जुन पोया, विष्णु सिंह, अहिबारण सिंह, महेंद्र सिंह, कृष्णा सिंह, जगमोहन सिंह, मोती सिंह, गणेश रजवाड़े, गोरे लाल सारुता, संत कुमार, राखीराम उइके, राजेंद्र पावले, खुबज सिंह, महंत सिंह मरकाम, चंद्रिका पैकरा, अमीर सिंह, सर्वजीत सिंह तथा गिरजा शंकर पैकरा सहित अनेक जागरूक नागरिकों ने सक्रिय सहयोग प्रदान किया है।
अभियान से जुड़े लोगों ने बताया कि सीड बॉल तकनीक कम लागत में अधिक प्रभावी परिणाम देने वाली पर्यावरणीय पहल मानी जाती है। इसमें मिट्टी और गोबर के मिश्रण से तैयार गेंदों के भीतर विभिन्न देशी प्रजातियों के बीज सुरक्षित रखे जाते हैं। वर्षा होने पर ये बीज अंकुरित होकर प्राकृतिक रूप से पौधों का रूप ले लेते हैं। इससे उन स्थानों पर भी पौधारोपण संभव हो जाता है, जहां सामान्य तरीके से पौधे लगाना कठिन होता है।
आयोजकों ने कहा कि जंगल केवल पेड़ों का समूह नहीं, बल्कि जल, जंगल और जमीन के संरक्षण का आधार हैं। बदलते पर्यावरणीय हालात और लगातार घटते वन क्षेत्र को देखते हुए समाज की सहभागिता से ऐसे अभियान समय की आवश्यकता बन गए हैं। यदि प्रत्येक व्यक्ति प्रकृति संरक्षण के लिए छोटा-सा योगदान दे, तो आने वाली पीढ़ियों को स्वच्छ वातावरण और समृद्ध वन संपदा उपलब्ध कराई जा सकती है।
सर्व आदिवासी समाज ने क्षेत्रवासियों से इस अभियान में अधिक से अधिक सहभागिता निभाने और पर्यावरण संरक्षण को जन आंदोलन का स्वरूप देने की अपील की है। अभियान का संदेश "एक छोटा प्रयास, प्रकृति के नाम बड़ा उपहार" लोगों को प्रकृति के प्रति अपनी जिम्मेदारी निभाने के लिए प्रेरित कर रहा है। समाज का विश्वास है कि सामूहिक प्रयासों से पीपलडांड के जंगल आने वाले समय में फिर से घने, समृद्ध और जैव विविधता से परिपूर्ण बन सकेंगे।


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