कोरिया बैकुंठपुर / कलेक्टर श्रीमती रोक्तिमा यादव ने शुक्रवार को बैकुंठपुर विकासखंड के शासकीय प्राथमिक एवं उच्चतर माध्यमिक विद्यालयों का औचक निरीक्षण कर शैक्षणिक व्यवस्थाओं का जायजा लिया। इस दौरान उन्होंने कक्षाओं में पहुंचकर विद्यार्थियों से संवाद किया, उनकी शैक्षणिक गुणवत्ता का आकलन किया तथा शिक्षकों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
कलेक्टर ने ब्लैकबोर्ड पर विद्यार्थियों को समझाया गणित,
निरीक्षण के दौरान कलेक्टर ने स्वयं ब्लैकबोर्ड पर गणित के प्रश्न लिखकर विद्यार्थियों को सरल तरीके से समझाया और उनसे प्रश्नों के उत्तर भी पूछे। उन्होंने शिक्षकों से कहा कि बच्चों में पढ़ाई के प्रति रुचि एवं सीखने की ललक विकसित करना उनकी प्राथमिक जिम्मेदारी है। इसके लिए शिक्षकों को नियमित रूप से नवाचारी एवं रोचक शिक्षण पद्धतियों का उपयोग करना चाहिए।
प्राचार्य को मिली फटकार,
शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय मनसुख में निरीक्षण के दौरान कलेक्टर ने विद्यार्थियों की उपस्थिति की जानकारी ली। बड़ी संख्या में विद्यार्थियों की अनुपस्थिति पर उन्होंने नाराजगी व्यक्त करते हुए प्राचार्य एवं शिक्षकों से पूछा कि विद्यालय खुलने के बाद भी बच्चों की नियमित उपस्थिति सुनिश्चित करने के लिए पालकों से संपर्क क्यों नहीं किया गया। उन्होंने कहा कि विद्यालय खुलने के बाद भी विद्यार्थियों का नहीं आना अत्यंत गंभीर विषय है। कलेक्टर ने प्राचार्य को कड़ी फटकार लगाते हुए निर्देश दिए कि बच्चों की नियमित उपस्थिति सुनिश्चित करने के लिए स्वयं पहल करें।
शिक्षकों पर बच्चों का उज्ज्वल भविष्य संवारने की जिम्मेदारी,
कलेक्टर श्रीमती यादव ने शिक्षकों से कहा कि विद्यार्थियों को केवल पाठ्यक्रम तक सीमित न रखें, बल्कि दसवीं एवं बारहवीं कक्षा के बाद उनके करियर, विषय चयन तथा भविष्य की कार्ययोजना के संबंध में भी मार्गदर्शन दें। उन्होंने कहा कि जिस प्रकार शिक्षक अपने बच्चों को अधिकारी, इंजीनियर, डॉक्टर, वकील या प्रोफेसर बनाने के लिए मेहनत करते हैं, उसी समर्पण के साथ विद्यालय के प्रत्येक बच्चे के भविष्य के लिए भी कार्य करें। सरकार ने शिक्षकों को बच्चों का उज्ज्वल भविष्य बनाने की जिम्मेदारी सौंपी है।
बच्चे मिट्टी के समान, उन्हें उचित मार्गदर्शन और परिश्रम से बेहतर आकार दें,
प्राथमिक शाला बंजारीडांड में कलेक्टर ने बच्चों की पढ़ाई-लिखाई की स्थिति का अवलोकन किया। उन्होंने एक-एक बच्चे से बातचीत कर उनकी सीखने की क्षमता और शैक्षणिक स्तर का आकलन किया। अध्ययन स्तर संतोषजनक नहीं पाए जाने पर उन्होंने प्रधान पाठक को फटकार लगाते हुए कहा कि बच्चे मिट्टी के समान होते हैं, जिन्हें उचित मार्गदर्शन और परिश्रम से बेहतर आकार दिया जा सकता है। उन्होंने बच्चों की क्षमता एवं दक्षता के विकास के लिए विशेष प्रयास करने तथा कक्षा अनुसार बैठने की व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
प्रत्येक शनिवार सामान्य ज्ञान आधारित प्रश्नोत्तरी आयोजित हो,
कलेक्टर ने शिक्षकों को प्रत्येक शनिवार सामान्य ज्ञान आधारित प्रश्नोत्तरी आयोजित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि प्रत्येक बच्चे में कोई न कोई विशेष प्रतिभा होती है, जिसे पहचानकर निखारने की आवश्यकता है, ताकि उन्हें आगे बढ़ने के अवसर मिल सकें। उन्होंने कहा कि शिक्षकों की जिम्मेदारी केवल नौकरी करना नहीं, बल्कि बच्चों का भविष्य गढ़ना, उनकी नींव मजबूत करना और उन्हें एक जिम्मेदार नागरिक बनाना भी है।
पाठ्यपुस्तकों का वितरण सुनिश्चित हो,
उन्होंने सभी विद्यालयों में तत्काल अध्ययन-अध्यापन कार्य प्रारंभ करने तथा पाठ्यपुस्तकों का वितरण सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। जिन विद्यार्थियों को नई पुस्तकें प्राप्त नहीं हुई हैं, उन्हें अस्थायी रूप से पुरानी पुस्तकें उपलब्ध कराने के लिए कहा, ताकि उनकी पढ़ाई प्रभावित न हो।
पालकों से की कलेक्टर ने अपील,
कलेक्टर श्रीमती यादव ने पालकों से भी अपील की कि वे अपने बच्चों को नियमित रूप से विद्यालय भेजें तथा उनकी पढ़ाई पर विशेष ध्यान दें। उन्होंने कहा कि गुणवत्तापूर्ण शिक्षा तभी संभव है जब विद्यालय, शिक्षक और अभिभावक मिलकर बच्चों के सर्वांगीण विकास के लिए कार्य करें।
बच्चों के सपने साकार करने में शिक्षकों को बड़ी भूमिका,
कलेक्टर ने विद्यार्थियों से उनके भविष्य के लक्ष्यों के बारे में भी चर्चा की। कई विद्यार्थियों ने डॉक्टर, शिक्षक, पुलिस अधिकारी एवं सैनिक बनने की इच्छा व्यक्त की। इस पर कलेक्टर ने उन्हें आशीर्वाद देते हुए कहा कि कोई भी सपना कड़ी मेहनत, अनुशासन और निरंतर अध्ययन से ही साकार होता है तथा इसमें शिक्षकों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण होती है।
नवप्रवेशी विद्यार्थियों का हुआ स्वागत,
निरीक्षण के दौरान कलेक्टर ने कक्षा छठवीं एवं नवमीं में नवप्रवेशी छात्र-छात्राओं का तिलक लगाकर एवं मिष्ठान खिलाकर आत्मीय स्वागत भी किया।
रसोई घर का किया निरीक्षण,
कलेक्टर श्रीमती यादव ने बच्चों को दिए जाने वाले मध्यान भोजन की गुणवत्ता की जांच की , रसोई कक्ष में जाकर बनने वाले भोजन, सब्जी को भी परखा। उन्होंने शिक्षकों से कहा हरी सब्जियां, चावल, रोटियां, दाल, सलाद नियमित रुप से परोसे। बच्चों को हाथ धोकर भोजन करने के लिए प्रेरित करें साथ ही साफ-सफाई पर विशेष ध्यान रखें। उन्होंने बच्चों के शौचालय कक्ष को साफ रखने व पानी की व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
बीईओ एवं डीईओ करेंगे विद्यालयों का नियमित निरीक्षण,
उन्होंने विकासखंड शिक्षा अधिकारी (बीईओ) एवं जिला शिक्षा अधिकारी (डीईओ) को विद्यालयों का नियमित निरीक्षण करने, शिक्षण कार्य का मूल्यांकन करने तथा विद्यार्थियों की शैक्षणिक प्रगति की सतत समीक्षा सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। कलेक्टर ने कहा कि शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार जिला प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है।




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