कोरिया छत्तीसगढ़। अधिकमास में आने वाली परमा एकादशी भगवान श्रीहरि विष्णु की उपासना के लिए अत्यंत पवित्र और पुण्यदायी मानी जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार यह दुर्लभ एकादशी लगभग तीन वर्ष में एक बार आती है, इसलिए इसका महत्व अन्य एकादशियों की तुलना में विशेष माना गया है। इस वर्ष परमा एकादशी का व्रत 11 जून 2026, गुरुवार को रखा जा रहा है, जबकि व्रत का पारण 12 जून 2026, शुक्रवार को प्रातः 5:23 बजे से 8:10 बजे के मध्य किया जाएगा।
‘परमा’ शब्द का अर्थ श्रेष्ठ या सर्वोत्तम होता है। शास्त्रों में वर्णित है कि इस एकादशी का श्रद्धापूर्वक पालन करने से व्यक्ति के जीवन में आध्यात्मिक उन्नति होती है तथा धर्म, संयम और भक्ति का भाव मजबूत होता है। यह व्रत आत्मशुद्धि, मन की शांति और भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त करने का श्रेष्ठ अवसर माना जाता है।
परमा एकादशी के दिन प्रातः स्नान के बाद भगवान विष्णु की विधि-विधान से पूजा की जाती है। श्रद्धालु भगवान को पीले पुष्प, चंदन, दीप, फल तथा तुलसी दल अर्पित करते हैं। इस अवसर पर “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” मंत्र का जाप विशेष फलदायी माना गया है। भक्त दिनभर उपवास रखकर भजन, कीर्तन, विष्णु सहस्रनाम पाठ तथा धार्मिक अनुष्ठानों में भाग लेते हैं।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन दान-पुण्य का भी विशेष महत्व है। श्रद्धालु अपनी सामर्थ्य के अनुसार अन्न, फल, जल, वस्त्र अथवा अन्य आवश्यक वस्तुओं का दान कर पुण्य लाभ अर्जित करते हैं। आस्था और श्रद्धा के साथ किया गया परमा एकादशी व्रत व्यक्ति को आध्यात्मिक ऊर्जा प्रदान करने के साथ-साथ समाज में सेवा और सद्भावना का संदेश भी देता है।


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