आधा लीटर पेट्रोल से कैसी कालाबाजारी? बोतल में पेट्रोल देने पर पाबंदी से इमरजेंसी में लोग हो रहे परेशान, प्रशासन के अव्यावहारिक आदेश से बैकुंठपुर में बीच सड़क पर धक्के खाने को मजबूर हो रहे लोग, जरकिन पर पाबंदी समझ आती है, पर बोतल पर क्यों? बैकुंठपुर के 11 पेट्रोल पंपों पर इस नियम से परेशान हो रहे लोग ,


कोरिया बैकुंठपुर | क्या कोई आम आदमी पानी की बोतल में आधा या एक लीटर पेट्रोल लेकर कालाबाजारी कर सकता है? यह सवाल इन दिनों कोरिया जिला मुख्यालय बैकुंठपुर के लोग पेट्रोल पंप संचालको से पूछ रहे हैं। शहर के सभी 11 पेट्रोल पंपों पर बोतल में पेट्रोल देने पर प्रशासन द्वारा लगाई गई पूर्ण पाबंदी अब आमजनों के लिए जी का जंजाल बन गई है। प्रशासन ने यह नियम भले ही किसी बड़ी दुर्घटना या अवैध भंडारण को रोकने के लिए बनाया हो, लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि यह आदेश बिना किसी दूरदर्शिता के लागू कर दिया गया है।

आए दिन राहगीरों की बाइक या स्कूटी बीच सड़क पर पेट्रोल खत्म होने से बंद हो जाती है। ऐसी आपातकालीन (इमरजेंसी) स्थिति में जब लोग वाहन को कड़ी धूप में किसी से लिफ्ट मांगकर  बोतल लेकर पेट्रोल पंप पहुंचते हैं, तो उन्हें खाली हाथ लौटा दिया जाता है। पेट्रोल पंप कर्मचारी प्रशासन की सख्ती का हवाला देकर एक बूंद पेट्रोल भी बोतल में देने से साफ इनकार कर देते हैं। ऐसे में बीच सड़क पर फंसे इंसान की वास्तविक मजबूरी को न समझना पेट्रोल पंप संचालक और प्रशासन की संवेदनहीनता को दर्शाता है। स्थानीय लोगों का स्पष्ट कहना है कि बड़े डब्बे, जरकिन या गैलन में पेट्रोल की बिक्री पर रोक लगाना पूरी तरह जायज है, लेकिन एक छोटी सी बोतल में आपात स्थिति के लिए ईंधन न देना सरासर गलत है। 

महज एक लीटर पेट्रोल से कोई कालाबाजारी नहीं कर सकता। बैकुंठपुर के सभी 11 पंपों पर इस नियम से रोजमर्रा के यात्री भारी फजीहत झेल रहे हैं। नागरिकों में इस अव्यावहारिक नियम के खिलाफ रोष है। जनता ने जिला प्रशासन से सीधा सवाल किया है कि क्या नियमों की आड़ में आम आदमी को सड़क पर धक्के खाने के लिए छोड़ देना न्याय है? प्रशासन को तत्काल इस आदेश की समीक्षा करनी चाहिए और इमरजेंसी को ध्यान में रखते हुए कम मात्रा में पेट्रोल देने की छूट देनी चाहिए।

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