कोरिया बैकुंठपुर / जिले में किसानों, कृषि उद्यमियों और स्वयं सहायता समूहों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल करते हुए सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया के जिला अग्रणी बैंक कोरिया द्वारा कृषि ऋण आउटरीच कार्यक्रम का आयोजन किया गया। आरसेटी (सेंट्रल बैंक ग्रामीण स्वरोजगार प्रशिक्षण संस्थान) परिसर में आयोजित इस कार्यक्रम में विभिन्न कृषि एवं स्वरोजगार गतिविधियों के लिए लगभग 4 करोड़ रुपये के ऋण स्वीकृत किए गए।
कार्यक्रम का शुभारंभ कलेक्टर कोरिया श्रीमती रोक्तिमा यादव ने किया। इस अवसर पर उन्होंने किसानों एवं ग्रामीण उद्यमियों को संबोधित करते हुए कृषि एवं उससे जुड़े व्यवसायों के विस्तार के लिए आवश्यकता अनुसार बैंक ऋण लेने तथा समय पर ऋण अदायगी सुनिश्चित करने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि बैंकिंग सुविधाओं का प्रभावी उपयोग किसानों की आय बढ़ाने और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
37 हितग्राहियों को मिला लगभग 4 करोड़ रुपये का ऋण,
कृषि ऋण आउटरीच कार्यक्रम में सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया की बैकुंठपुर, पांडवपारा, सरडी, रजौली और सोनहत शाखाओं द्वारा विभिन्न योजनाओं के तहत ऋण स्वीकृत किए गए। कृषि एवं कृषि आधारित गतिविधियों से संबंधित 27 खातों में कुल 2 करोड़ 66 लाख रुपये के ऋण स्वीकृत किए गए। इनमें किसान क्रेडिट कार्ड, पशुपालन, मत्स्यपालन, मुर्गीपालन, ग्रामीण भंडारण, फूड प्रोसेसिंग, वेयरहाउस निर्माण, पशु आहार उत्पादन तथा अन्य कृषि व्यवसायों से जुड़े ऋण शामिल हैं।
इसके अतिरिक्त अन्य योजनाओं के तहत 10 खातों में 1 करोड़ 34 लाख रुपये के ऋण स्वीकृत किए गए। इस प्रकार कुल 37 हितग्राहियों को लगभग 4 करोड़ रुपये की ऋण स्वीकृति प्रदान की गई।
खरीफ सीजन में फसल विविधीकरण पर विशेष जोर,
कलेक्टर श्रीमती रोक्तिमा यादव ने कहा कि वर्तमान खरीफ सीजन में जिले का मुख्य फोकस फसल विविधीकरण पर है। किसानों को पारंपरिक फसलों के साथ-साथ दलहनी एवं तिलहनी फसलों की खेती के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि केंद्र सरकार की प्रधानमंत्री अन्नदाता आय संरक्षण अभियान के तहत दलहन एवं तिलहन फसलों की न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर खरीदी की व्यवस्था की गई है, जिससे किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य मिल सके।
उन्होंने कहा कि जिले में मोटे अनाजों, विशेषकर रागी के उत्पादन को बढ़ावा देने की दिशा में भी प्रयास किए जा रहे हैं। इसके साथ ही किसानों को बेहतर मिलिंग क्षमता वाली धान की उन्नत किस्मों की जानकारी भी उपलब्ध कराई जा रही है। कलेक्टर ने बताया कि जिले में पर्याप्त मात्रा में गुणवत्तापूर्ण बीज उपलब्ध हैं तथा कृषि विभाग के अधिकारियों को किसानों तक इसकी उपलब्धता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।
स्वयं सहायता समूहों को स्वरोजगार अपनाने का आह्वान,
कार्यक्रम में कलेक्टर ने राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (एनआरएलएम) के अंतर्गत गठित स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं को संबोधित करते हुए कहा कि वे अधिक से अधिक स्वरोजगार गतिविधियों से जुड़ें। उन्होंने कहा कि कृषि ऋण के अलावा विभिन्न विभागों द्वारा संचालित उद्यमिता एवं स्वरोजगार आधारित योजनाओं का लाभ उठाकर महिलाएं अपनी आय में उल्लेखनीय वृद्धि कर सकती हैं।
उन्होंने विभागीय योजनाओं के बेहतर अभिसरण (कन्वर्जेंस) पर जोर देते हुए कहा कि विभिन्न योजनाओं के संयुक्त लाभ से ग्रामीण परिवारों की आजीविका और अधिक मजबूत हो सकती है। स्वयं सहायता समूहों को कृषि प्रसंस्करण, पशुपालन, खाद्य प्रसंस्करण और अन्य आयवर्धक गतिविधियों में आगे आने के लिए प्रेरित किया गया।
किसानों और उद्यमियों से योजनाओं का लाभ लेने की अपील,
कार्यक्रम में उपस्थित किसानों, कृषि उद्यमियों एवं ग्रामीण व्यवसायियों से अपील की गई कि वे अपनी आवश्यकताओं के अनुरूप कृषि एवं स्वरोजगार ऋण योजनाओं का लाभ लेने के लिए सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया तथा जिले में संचालित अन्य बैंकों की निकटतम शाखाओं से संपर्क करें। अधिकारियों ने बताया कि बैंकिंग क्षेत्र ग्रामीण विकास और स्वरोजगार को बढ़ावा देने के लिए निरंतर प्रयासरत है।
अधिकारियों ने विश्वास व्यक्त किया कि इस प्रकार के ऋण आउटरीच कार्यक्रम किसानों, ग्रामीण उद्यमियों और स्वयं सहायता समूहों को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।
कार्यक्रम में उप संचालक कृषि राजेश कुमार, अग्रणी जिला प्रबंधक शशि भूषण पाठक, सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया के मुख्य प्रबंधक संजय सिंह, एनआरएलएम के परियोजना प्रबंधक तरुण रघुवंशी, भारतीय स्टेट बैंक के मुख्य प्रबंधक सहित विभिन्न विभागों और बैंकों के अधिकारी उपस्थित रहे। जिले की सभी सेंट्रल बैंक शाखाओं के प्रबंधकों ने भी कार्यक्रम में सक्रिय सहभागिता निभाई।




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