खोया बेटा मिला ,तो थाने में छलक पड़े पिता के आंसू......., भावुक पिता ने छत्तीसगढ़ पुलिस जिंदाबाद के लगाए नारे.... .., चरचा पुलिस ने मासूम बालक को सुरक्षित मिलाया परिजनों से...



नीरज गुप्ता की विशेष रिपोर्ट 

कोरिया चरचा कॉलरी...... मध्य प्रदेश के शहडोल निवासी रेलवे विभाग में लोको पायलट के पद पर कार्यरत रंजीत कुमार के परिवार में पत्नी, 9 वर्षीय पुत्र और 6 माह की नवजात बच्ची है। बच्ची के जन्म के बाद से ही उनके बेटे के बाल मन में यह भावना घर कर गई थी कि उसे पहले जैसा स्नेह नहीं मिल रहा। इसी मासूम भावनात्मक उलझन के चलते गुरुवार को वह बिना बताए घर से निकल पड़ा। गुरुवार के दिन घर के समीप रेलवे स्टेशन होने के कारण वह सीधे स्टेशन पहुंचा और अंबिकापुर जाने वाली ट्रेन में बैठ गया। देर रात जब ट्रेन बैकुंठपुर रोड रेलवे स्टेशन पहुंची, तो वह वहीं उतर गया। स्टेशन पर अकेले और सहमे हुए बच्चे को देख स्थानीय लोगों ने तत्परता दिखाते हुए चर्चा थाना को सूचना दी।

सूचना मिलते ही थाना प्रभारी आनंद सोनी के नेतृत्व में पुलिस टीम तत्काल मौके पर पहुंची और बच्चे को अपने संरक्षण में लेकर थाने ले आई। थाना प्रभारी आनंद सोनी ,ए.एस.आई .महानदी तथा आरक्षित प्रदीप श्याम का इस पूरे मामले विशेष योगदान रहा शुरुआत में बच्चा काफी डरा हुआ था, लेकिन पुलिसकर्मियों ने उसे स्नेहपूर्वक समझाया, खाना-पीना दिया और अपनापन दिखाया। कुछ ही समय में जब बच्चा सहज हुआ, तो उसने अपना पता बताया।इसके बाद चर्चा थाना द्वारा कंट्रोल रूम के माध्यम से परिजनों को सूचना दी गई। उधर, बच्चे के अचानक लापता हो जाने से परिवार का रो-रोकर बुरा हाल था और वे किसी अनहोनी की आशंका से भयभीत थे। सूचना मिलते ही शहडोल पुलिस के साथ परिजन देर रात चर्चा थाना पहुंचे। जहां बच्चे को अभिभावक के सुपुर्द दिया गया

थाने में जैसे ही पिता रंजीत कुमार की नजर अपने बेटे पर पड़ी, दोनों एक-दूसरे से लिपटकर फूट-फूटकर रो पड़े। यह दृश्य इतना मार्मिक था कि वहां मौजूद पुलिसकर्मियों की आंखें भी नम हो गईं।

अपने बेटे को सुरक्षित पाकर भावुक पिता रंजीत कुमार ने “छत्तीसगढ़ पुलिस जिंदाबाद” के नारे लगाए और चर्चा थाना पुलिस का हृदय से आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि पुलिस ने न केवल उनके बेटे को सुरक्षित लौटाया, बल्कि उनके परिवार की खुशियां भी वापस लौटा दीं।

अक्सर देखा गया है कि जब परिवार में नया सदस्य आता है या किसी एक बच्चे को अधिक ज्ञान मिलता है तो अन्य बच्चे स्वयं को उपेक्षित महसूस करने लगते हैं यही भावना कभी-कभी उन्हें आशाए और विचलित कर देती है जिससे वह अनजाने में ऐसे कदम उठा लेते हैं जो उनके लिए खतरनाक साबित हो सकते हैं यह घटना केवल एक परिवार की कहानी नहीं बल्कि समाज के हर अभिभावक के लिए गंभीर संकेत है आज के बच्चे बेहद संवेदनशील और परिपक्व होते जा रहे हैंइस घटना से यह स्पष्ट है कि अभिभावकों को बच्चों के साथ समान व्यवहार करना चाहिए  बच्चों के मन को समझना और उनके साथ संवाद बनाए रखना, पर्याप्त समय और स्नेह देना बेहद जरूरी है ताकि ऐसी घटनाओं को रोका जा सके वहीं चर्चा थाना पुलिस के संवेदनशीलता और तत्परता नहीं यह भी दिखाया कि पुलिस में केवल कानून की रक्षक है बल्कि समाज की भावनाओं को समझते हुए अपने दायित्वों का निर्वहन भी पूरी ईमानदारी के साथ कर रही है चर्चा थाना प्रभारी आनंद सोनी और उनकी टीम की इस सराहनीय पहल ने मानवता और सेवा की मिसाल पेश की है।

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