नीरज गुप्ता की विशेष रिपोर्ट
कोरिया चरचा कॉलरी......जिले की राजनीति में इन दिनों खेत-खलिहान से ज्यादा अफीम की खुशबू तैरती नजर आ रही है। 31 मार्च को कोरिया प्रवास पर पहुंचे प्रदेश के वरिष्ठ कांग्रेसी नेता एवं छत्तीसगढ़ विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष डॉ चरण दास महंत के समक्ष जिले के कांग्रेसी किसानों ने ऐसा ज्ञापन सौंपा कि सुनने वाले भी चौंक गए और सोचने वाले भी।ज्ञापन देने वालों में गणेश राजवाड़े, बिहारी लाल राजवाड़े, छवि शंकर सिदार, राहुल जायसवाल,धर्मेंद्र ,जयसिंह, मुख्तार अहमद , ईश्वर सिंह सहित कई किसानों ने एक सुर में अफीम की खेती करने की अनुमति मांगी—धान छोड़ो, अब अफीम की खेती को अपनाओ!”
अब तक किसान समर्थन मूल्य, खाद-बीज और सिंचाई की मांग करते थे, लेकिन इस बार मांग कुछ अलग ही निकली। किसानों का तर्क भी कम दिलचस्प नहीं है—“धान में मेहनत ज्यादा, दाम कम; अफीम में मेहनत कम, चर्चा ज्यादा!” किसानों ने कहा कि धान की खेती में बहुत परेशानी होती है पटवारी पंचनामा बनवाने, रकबा काट देने और रकबा सुधरवाने में बहुत ही ज्यादा परेशान होना पड़ता है
गौरतलब है कि प्रदेश में इन दिनों अवैध अफीम खेती के मामले सामने आने से राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज है। सत्ता और विपक्ष दोनों इस मुद्दे पर अपनी-अपनी खेती जोतने में लगे हैं। ऐसे में किसानों का यह ज्ञापन मानो आग में घी डालने जैसा साबित हो रहा है।मीडिया से चर्चा करते हुए दो चरण दास महंत ने भी बयान दिया कि अगर प्रदेश में अफीम की खेती अच्छी तरह हो सकती है और अन्य राज्यों मध्य प्रदेश उत्तर प्रदेश की तरह छत्तीसगढ़ में भी अफीम उगाने की अनुमति दिया जाना चाहिए अफीम से दवाइयां बनाई जाती हैं विशेष कर कैंसर जैसी गंभीर बीमारी में अफीम से बनी दवा का उपयोग लाभकारी होता है, तो वैधानिक रूप से इसकी अनुमति पर विचार होना चाहिए। साथ ही उन्होंने यह भी साफ कर दिया कि “गैरकानूनी खेती गलत है”—यानी खेती भी हो, लेकिन नियमों के साथ!
इधर बैकुंठपुर तहसील में किसानों ने अपनी पीड़ा भी जताई—पटवारी से लेकर कागजी प्रक्रिया तक इतनी जटिल है कि खेत में फसल कम, फाइलों में फसल ज्यादा उगती है। ऐसे में किसानों का मानना है कि अगर अफीम की खेती वैध हो जाए तो शायद “मेहनत का सही नशा” मिल सके।अब सवाल यह है कि सरकार इस मांग को गंभीरता से लेगी या इसे भी राजनीतिक व्यंग्य” मानकर ठंडे बस्ते में डाल देगी। फिलहाल कोरिया जिले में चर्चा यही है ,धान की बालियों से ज्यादा अब अफीम के फूल राजनीति में खिल रहे हैं!

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