आंधी पानी से गिरे पेड़...... बाल बाल बचा परिवार ......बड़ा हादसा टला .........प्रशासन से त्वरित कार्रवाई की मांग....... आज बच गए ,,,,,,कल कौन,,,,,,, सूखे पेड़ों ने बढ़ाई चिंता,,,,, प्रशासनिक लापरवाही से भयभीत नगर वासी........


नीरज गुप्ता की विशेष रिपोर्ट 

कोरिया चरचा कॉलरी........नगर पालिका शिवपुर चरचा क्षेत्र में लंबे समय से खड़े सूखे और जर्जर पेड़ अब गंभीर खतरे का रूप लेते जा रहे हैं। इन पेड़ों को काटने की मांग कई बार उठ चुकी है, लेकिन अब तक कोई ठोस और प्रभावी पहल नहीं की गई है। परिणामस्वरूप क्षेत्रवासी लगातार भय और असुरक्षा के माहौल में जीवन यापन कर रहे हैं।

शुक्रवार, रामनवमी के दिन दोपहर लगभग 3 बजे आई तेज आंधी और बारिश ने इस खतरे को वास्तविकता में बदल दिया। वार्ड क्रमांक 5 स्थित भारतीय स्टेट बैंक के सुरक्षा गार्ड, सेना से सेवानिवृत्त मोहम्मद इरशाद के घर पर एक विशाल सूखा पेड़ गिर पड़ा।

घटना के समय घर में उनकी पत्नी और दो बच्चे मौजूद थे। संयोगवश, उनका छोटा बेटा पानी लेने के लिए किचन में गया हुआ था। जैसे ही पेड़ गिरने की तेज आवाज आई, घबराकर वह बाहर की ओर दौड़ा और सुरक्षित बच गया। इस घटना में परिवार के सभी सदस्य सुरक्षित रहे, लेकिन एक बड़ी दुर्घटना होते-होते टल गई।आंधी-तूफान के दौरान नगर पालिका क्षेत्र के कई अन्य हिस्सों में भी पेड़ गिरने की घटनाएं सामने आई हैं। कई स्थानों पर पेड़ों की बड़ी-बड़ी डालियां टूटकर गिर गईं, जिससे जन-जीवन प्रभावित हुआ और खतरा और अधिक बढ़ गया है।

पुरानी घटना की याद से सहमे लोग:......स्थानीय नागरिकों के अनुसार,  कई वर्ष पूर्व साप्ताहिक बाजार के दिन बाजार के बीचों-बीच एक सूखा पेड़ गिर गया था, जिसमें कई लोगों की मौके पर ही दर्दनाक मृत्यु हो गई थी। वह हादसा आज भी लोगों के जेहन में ताजा है और उसी डर के साये में लोग आज भी जी रहे हैं।क्षेत्र में सूखे पेड़ों को हटाने की जिम्मेदारी को लेकर स्थानीय कालरी प्रबंधन,वन विभाग और नगर पालिका की निष्क्रियता पर सवाल उठने लगे हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि बार-बार शिकायतों और मांगों के बावजूद संबंधित विभाग आंखें मूंदे हुए हैं, जिससे कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है।लगातार बढ़ते खतरे और प्रशासनिक उदासीनता के चलते क्षेत्र की जनता में आक्रोश बढ़ता जा रहा है। स्थानीय नागरिकों ने तत्काल सूखे और जर्जर पेड़ों को चिन्हित कर काटने की मांग की है। उनका कहना है कि यदि शीघ्र कार्रवाई नहीं की गई तो जनाक्रोश भड़क सकता है, जिसकी पूरी जिम्मेदारी जिला प्रशासन और संबंधित अधिकारियों की होगी।

यह आवश्यक है कि कॉलरी प्रबंधन,नगर पालिका, वन विभाग और जिला प्रशासन संयुक्त रूप से त्वरित सर्वे कर जोखिमपूर्ण पेड़ों को चिन्हित करें और उन्हें हटाने की तत्काल कार्रवाई करें, ताकि भविष्य में किसी भी प्रकार की जनहानि से बचा जा सके।

एक टिप्पणी भेजें

0 टिप्पणियाँ