कोरिया बैकुंठपुर। नवरात्रि के पावन अवसर पर जिले के प्रमुख आस्था केंद्रों में से एक खड़गंवा के ग्राम छनवारीडांड स्थित मां महामाया मंदिर में इस वर्ष भी भक्तों की भारी भीड़ उमड़ने की संभावना है। धार्मिक आस्था, चमत्कारिक मान्यताओं और ऐतिहासिक घटनाओं से जुड़ा यह मंदिर न केवल स्थानीय लोगों बल्कि आसपास के जिलों के श्रद्धालुओं के लिए भी आकर्षण का केंद्र बना हुआ है।
मां महामाया मंदिर की स्थापना से जुड़ी कथा ग्रामीणों के बीच आज भी गहरी श्रद्धा के साथ सुनाई जाती है। मान्यता के अनुसार, मां महामाया की प्रतिमा को बिलासपुर जिले के रतनपुर से बैलगाड़ियों के माध्यम से खड़गंवा लाया जा रहा था। यात्रा के दौरान एक के बाद एक कुल 17 बैलगाड़ियों के पहिए टूट गए, जिससे यात्रा में बार-बार बाधा उत्पन्न होती रही। अंततः 18वीं बैलगाड़ी भी आगे नहीं बढ़ पाई। इसे देवी की इच्छा मानते हुए ग्रामीणों ने उसी स्थान पर प्रतिमा की स्थापना कर दी, जो आज छनवारीडांड में प्रसिद्ध महामाया मंदिर के रूप में जाना जाता है।
यह मंदिर समय के साथ जिले का प्रमुख धार्मिक केंद्र बन गया है। नवरात्रि के दौरान यहां विशेष पूजा-अर्चना, भजन-कीर्तन और धार्मिक आयोजनों का आयोजन किया जाता है। मंदिर परिसर में भक्तों की लंबी कतारें देखने को मिलती हैं, जो माता के दर्शन कर सुख-समृद्धि और मनोकामनाओं की पूर्ति की कामना करते हैं।
इतिहास के अनुसार, लगभग डेढ़ सौ वर्ष पूर्व इस स्थान पर एक महुआ वृक्ष के नीचे मां महामाया की मूर्ति स्थापित कर पूजा की जाती थी। लेकिन यह क्षेत्र हाथियों के विचरण का क्षेत्र होने के कारण कई बार मूर्ति को नुकसान भी पहुंचा। एक बार एक उग्र हाथी ने मूर्ति को क्षतिग्रस्त कर दिया, जिसके बाद तत्कालीन जनप्रतिनिधियों और ग्रामीणों ने नई प्रतिमा स्थापित करने का निर्णय लिया। बताया जाता है कि वर्ष 1924 में तत्कालीन क्षेत्रीय नेतृत्व के प्रयासों से नई प्रतिमा की स्थापना कर मंदिर को व्यवस्थित रूप दिया गया।
नवरात्रि के दौरान मंदिर परिसर में मेले जैसा वातावरण रहता है। कोरिया जिले के अलावा सरगुजा, बिलासपुर और अन्य क्षेत्रों से भी श्रद्धालु बड़ी संख्या में यहां पहुंचते हैं। मंदिर समिति के अनुसार, सामान्य दिनों में भी प्रतिदिन करीब 200 से अधिक श्रद्धालु दर्शन के लिए आते हैं, जबकि नवरात्रि में यह संख्या कई गुना बढ़ जाती है।
मंदिर के कारण क्षेत्र में आर्थिक गतिविधियों को भी बढ़ावा मिला है। मंदिर के आसपास प्रसाद दुकानों, फूल-माला विक्रेताओं और अन्य छोटे व्यवसायों से ग्रामीणों को रोजगार मिल रहा है। अनुमानतः 25 से अधिक परिवार प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से इस धार्मिक स्थल से अपनी आजीविका चला रहे हैं।
नवरात्रि के पहले दिन से ही यहां विशेष पूजा-अर्चना के साथ भव्य आयोजन की शुरुआत होगी। प्रशासन और मंदिर समिति द्वारा श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए आवश्यक व्यवस्थाएं भी की गई हैं, जिससे सभी भक्त शांतिपूर्वक मां महामाया के दर्शन कर सकें।


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