श्रीकृष्ण भक्ति से सराबोर हुआ धार्मिक वातावरण


॥ ॐ श्रीपरमात्मने नमः ॥

“वंशीधरं तोत्त्रधरं नमामि, मनोहरं मोहहरं च कृष्णम्”—इस पावन मंत्रोच्चार के साथ क्षेत्र में श्रीकृष्ण भक्ति का अनुपम दृश्य देखने को मिला। भगवान श्रीकृष्ण, जो बाँसुरी धारण करने वाले, गायों को हाँकने की छड़ी धारण करने वाले, अत्यंत मनोहर तथा भक्तों के मोह और अज्ञान को हरने वाले हैं, उनके दिव्य स्वरूप का श्रद्धापूर्वक स्मरण किया गया।

कार्यक्रम में वक्ताओं ने कहा कि श्रीकृष्ण केवल एक ऐतिहासिक या पौराणिक व्यक्तित्व नहीं, बल्कि जीवन जीने की कला हैं। उनकी बाँसुरी प्रेम, करुणा और समरसता का प्रतीक है, जबकि गोचारण की छड़ी समाज के प्रति उत्तरदायित्व और सेवा भाव का संदेश देती है। भगवान कृष्ण का मनोहर स्वरूप मन को शांति देता है और उनका उपदेश मानव को मोह, आसक्ति और अज्ञान से मुक्त होने की प्रेरणा देता है।

भक्तों ने सामूहिक रूप से भजन-कीर्तन कर श्रीकृष्ण के चरणों में नमन किया। आयोजन के दौरान वातावरण पूर्णतः आध्यात्मिक और भक्तिमय बना रहा। श्रद्धालुओं ने कहा कि ऐसे आयोजनों से न केवल धार्मिक चेतना जागृत होती है, बल्कि समाज में नैतिक मूल्यों और सद्भावना का भी प्रसार होता है।

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