बैकुंठपुर में राधा–कृष्ण प्रेम मंदिर में प्राण-प्रतिष्ठा समारोह का भव्य आयोजन



कोरिया बैकुंठपुर । कृष्ण भले ही अतीत के हों, पर वे भविष्य के भी हैं—उनका देवत्व धर्म की परम गहराइयों और ऊँचाइयों को स्पर्श करता है, फिर भी उसमें कहीं भी बोझिल गंभीरता नहीं। वे जीवन से उदास, निराश या पलायनशील नहीं हैं, बल्कि हर परिस्थिति में आनंद, आशा और प्रेम का संदेश देते हैं। वे अकेले भी नाचते हैं, मुस्कुराते हैं और गाते हैं—मानो जीवन को उत्सव बना देने का आह्वान करते हों। इसी दिव्य प्रेम और आध्यात्मिक चेतना को जन-जन तक पहुँचाने के उद्देश्य से बैकुंठपुर स्थित राधा–कृष्ण प्रेम मंदिर में 5 फरवरी से 7 फरवरी तक प्राण-प्रतिष्ठा समारोह का भव्य आयोजन किया गया।

तीन दिवसीय इस धार्मिक अनुष्ठान में श्रद्धा, भक्ति और उल्लास का अनुपम संगम देखने को मिला। नगर सहित आसपास के क्षेत्रों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु मंदिर परिसर पहुँचे और विधिवत पूजन-अर्चन में सहभागिता की। वैदिक मंत्रोच्चार, यज्ञ-हवन, कलश यात्रा और विशेष आरती के साथ कार्यक्रमों की श्रृंखला ने वातावरण को आध्यात्मिक ऊर्जा से ओत-प्रोत कर दिया। भक्तों के चेहरों पर उल्लास और मन में शांति का भाव स्पष्ट दिखाई दिया।

प्राण-प्रतिष्ठा समारोह के दौरान धर्माचार्यों ने भगवान श्रीकृष्ण के जीवन-दर्शन पर प्रकाश डालते हुए बताया कि कृष्ण का संदेश केवल उपदेश नहीं, बल्कि जीवन को सहजता, प्रेम और करुणा के साथ जीने की प्रेरणा है। उन्होंने कहा कि कृष्ण कर्मयोग के प्रतीक हैं—वे संघर्ष में भी मुस्कान और विषमता में भी समत्व सिखाते हैं। यही कारण है कि उनका व्यक्तित्व कालातीत है और हर युग के लिए प्रासंगिक बना रहता है।

समारोह के विभिन्न सत्रों में भजन-कीर्तन, संकीर्तन और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने भक्तों को भाव-विभोर कर दिया। राधा–कृष्ण के दिव्य स्वरूप के दर्शन के साथ श्रद्धालुओं ने सुख-समृद्धि, शांति और सामाजिक सौहार्द की कामना की। मंदिर परिसर को आकर्षक पुष्प सज्जा और दीपों से सुसज्जित किया गया, जिससे उत्सव का सौंदर्य और भी निखर उठा।

इस अवसर पर राधा–कृष्ण मंदिर सेवा समिति की भूमिका अत्यंत सराहनीय रही। समिति के सदस्यों ने आयोजन की प्रत्येक व्यवस्था—साफ-सफाई, सुरक्षा, प्रसाद वितरण और अतिथियों के स्वागत—को सुव्यवस्थित ढंग से संपन्न कराया। स्थानीय नागरिकों और स्वयंसेवकों के सहयोग से कार्यक्रम सुचारु रूप से सफल हुआ।

समापन अवसर पर समिति के सभी सम्माननीय जनों को इस भव्य आयोजन के लिए बधाई एवं हार्दिक आभार व्यक्त किया गया। समिति ने भविष्य में भी आध्यात्मिक, सांस्कृतिक और सामाजिक गतिविधियों के माध्यम से जन-कल्याण के कार्य जारी रखने का संकल्प दोहराया। राधा–कृष्ण प्रेम मंदिर में सम्पन्न यह प्राण-प्रतिष्ठा समारोह न केवल धार्मिक आयोजन रहा, बल्कि प्रेम, आनंद और आशा का संदेश देता एक स्मरणीय उत्सव बनकर नगर के इतिहास में अंकित हुआ।

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