कोरिया क्षेत्र की आदिम जनजातीय संस्कृति के पारंपरिक आभूषणों की अनूठी झलक


कोरिया बैकुंठपुर। कोरिया जिले के सघन वनांचल क्षेत्रों में निवास करने वाली आदिम जनजातियों की समृद्ध संस्कृति आज भी अपनी मौलिक पहचान को संजोए हुए है। इन्हीं जनजातीय समुदायों के आदरणीय बहन-भाइयों द्वारा धारण किए जाने वाले पारंपरिक आभूषण न केवल सौंदर्य का प्रतीक हैं, बल्कि उनकी सामाजिक, धार्मिक और सांस्कृतिक मान्यताओं को भी दर्शाते हैं। आज हमें उनकी इसी अनमोल विरासत की एक विशेष झलक देखने को मिली, जिसे आमजन के अवलोकन हेतु फेसबुक पर साझा किया जा रहा है।

आदिम जनजातियों के आभूषण प्रायः प्रकृति से प्रेरित होते हैं। इनमें धातु, लकड़ी, बीज, कौड़ियाँ, हड्डी, पत्थर और कभी-कभी तांबा या पीतल का उपयोग किया जाता है। महिलाओं द्वारा पहने जाने वाले आभूषणों में गले की मालाएँ, कानों के झुमके, नाक की नथ, चूड़ियाँ, कमरबंद और पायल प्रमुख हैं। इनकी डिजाइनिंग सरल होते हुए भी अत्यंत आकर्षक होती है, जिसमें ज्यामितीय आकृतियाँ, प्राकृतिक प्रतीक और पारंपरिक चिन्ह उकेरे जाते हैं। वहीं पुरुष समुदाय भी कानों में आभूषण, गले में माला और सिर पर सजावटी अलंकरण धारण करते हैं, जो उनकी पहचान और सामाजिक स्थिति को दर्शाते हैं।

इन आभूषणों का महत्व केवल सजावट तक सीमित नहीं है। विवाह, पर्व-त्योहार, नृत्य और धार्मिक अनुष्ठानों में इनका विशेष स्थान होता है। पीढ़ी दर पीढ़ी हस्तांतरित होने वाले ये आभूषण जनजातीय जीवन की निरंतरता और परंपराओं के संरक्षण का प्रतीक हैं।

आज के आधुनिक दौर में जब पारंपरिक संस्कृतियाँ विलुप्त होती जा रही हैं, ऐसे में कोरिया क्षेत्र की आदिम जनजातियों के आभूषण और उनकी डिजाइनिंग हमारी सांस्कृतिक धरोहर के रूप में अत्यंत मूल्यवान हैं। इस झलक को देखकर न केवल गौरव की अनुभूति होती है, बल्कि इन्हें संरक्षित और प्रोत्साहित करने की आवश्यकता भी महसूस होती है। सभी से अनुरोध है कि इस सांस्कृतिक प्रस्तुति को देखें और अपने विचार कमेंट के माध्यम से अवश्य साझा करें।

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