एक लड्डू, कई ज़िंदगियाँ: कोरिया जिले में मातृ पोषण की तस्वीर बदलने वाली अनोखी पहल



कोरिया (कोरिया), छत्तीसगढ़:

छत्तीसगढ़ के उत्तरी हिस्से में स्थित वनांचल और आदिवासी बहुल कोरिया जिले में एक शांत लेकिन बेहद प्रभावशाली बदलाव देखने को मिला है। यह बदलाव न तो किसी बड़ी इमारत से आया और न ही महंगी तकनीक से, बल्कि एक साधारण से दिखने वाले पोषण लड्डू से। इस अभिनव पहल के पीछे जिला कलेक्टर एवं आईएएस अधिकारी चंदन संजय त्रिपाठी की दूरदर्शी और जनकेंद्रित सोच रही, जिसने मातृ एवं शिशु पोषण की दिशा में नया रास्ता खोला।

कोरिया जिला लंबे समय से कुपोषण, महिलाओं में एनीमिया, कम वजन के नवजात शिशुओं और संतुलित आहार की कमी जैसी समस्याओं से जूझता रहा है। विशेषकर दूरस्थ ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों में सरकारी योजनाओं के बावजूद अंतिम छोर तक पोषण पहुंचाना एक बड़ी चुनौती थी। इस स्थिति को समझते हुए जिला प्रशासन ने एक ऐसा समाधान खोजा, जो स्थानीय, सस्ता, स्वीकार्य और टिकाऊ हो।

इसी सोच से जन्म हुआ ग्रामीण पोषण कार्यक्रम, जिसका केंद्र बना पोषक तत्वों से भरपूर लड्डू। इन लड्डुओं में मोटे अनाज (मिलेट्स), मूंगफली, गुड़, तिल, दालें और अन्य स्थानीय रूप से उपलब्ध आयरन व प्रोटीन युक्त सामग्री शामिल की गई। यह लड्डू न केवल पोषण से भरपूर थे, बल्कि स्वादिष्ट और पारंपरिक भी, जिससे गर्भवती और धात्री महिलाओं ने इन्हें सहज रूप से अपनाया।

इस कार्यक्रम की सबसे बड़ी ताकत रही स्व-सहायता समूहों (SHGs) की भागीदारी। स्थानीय महिला समूहों को स्वास्थ्य विभाग और आईसीडीएस के मार्गदर्शन में स्वच्छता और पोषण मानकों के अनुसार लड्डू तैयार करने का प्रशिक्षण दिया गया। इससे एक ओर पोषण की गुणवत्ता सुनिश्चित हुई, वहीं दूसरी ओर ग्रामीण महिलाओं को आजीविका के नए अवसर भी मिले।

कार्यक्रम को आंगनबाड़ी केंद्रों, आशा कार्यकर्ताओं और स्वास्थ्य कर्मियों के सहयोग से लागू किया गया। गर्भवती महिलाओं की नियमित निगरानी, लड्डुओं का वितरण और स्वास्थ्य संकेतकों की ट्रैकिंग की गई। साथ ही, पोषण परामर्श सत्रों के माध्यम से परिवारों को एनीमिया से बचाव और मातृ-शिशु स्वास्थ्य के प्रति जागरूक किया गया।

कुछ ही समय में इसके सकारात्मक परिणाम सामने आने लगे। गर्भवती महिलाओं में हीमोग्लोबिन स्तर में सुधार, गर्भावस्था के दौरान बेहतर वजन वृद्धि और कम वजन वाले शिशुओं के मामलों में कमी दर्ज की गई। इसके साथ ही समुदाय का स्वास्थ्य तंत्र पर विश्वास भी बढ़ा। पोषण अब केवल सरकारी योजना नहीं, बल्कि सामुदायिक जिम्मेदारी बन गया।

जिला प्रशासन का मानना है कि इस पहल की सफलता इसकी सरलता और स्थानीय सहभागिता में निहित है। आज कोरिया जिले का यह पोषण लड्डू मॉडल नवाचारपूर्ण शासन का उदाहरण बन चुका है और इसे अन्य आदिवासी व ग्रामीण क्षेत्रों में अपनाने पर चर्चा हो रही है।

कोरिया जिले में एक लड्डू ने सिर्फ शरीर को नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ी के भविष्य को भी मजबूत किया है—यह साबित करते हुए कि बड़े बदलाव की शुरुआत अक्सर सबसे सरल विचार से होती है।

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