कोरिया जिले में शासकीय कुकुट पालन प्रक्षेत्र की बदहाली: स्थानांतरण तक पुनः संचालन की मांग तेज


कोरिया बैकुंठपुर । जिले में लगभग 10 एकड़ भूमि पर संचालित शासकीय कुकुट पालन प्रक्षेत्र, जो कभी सरगुजा संभाग में हितग्राहियों एवं स्थानीय जनता को आय और आजीविका का महत्वपूर्ण आधार प्रदान करता था, आज बदहाली और बंद व्यवस्था की मार झेल रहा है। जानकारी के अनुसार, यह प्रक्षेत्र 31 मार्च 2025 को अचानक फैली बीमारी के कारण  बंद कर दिया गया था। इसके बाद केंद्र सरकार द्वारा जुलाई 2025 में इस प्रक्षेत्र को पुनः संचालित करने का आदेश प्रसारित किया गया, लेकिन आदेश जारी होने के पाँच महीने बाद भी प्रक्षेत्र में गतिविधियाँ शुरू नहीं की जा सकी हैं।

लगातार बंद पड़े इस प्रक्षेत्र में करोड़ों की सामग्री जंग खा रही है। लगभग 20 करोड़ रुपये की लागत से बना भवन और करीब दो करोड़ रुपये की अत्याधुनिक मशीनरी बरसो से निष्क्रिय पड़ी हुई है, जिसका सीधा नुकसान न केवल शासन को हो रहा है, बल्कि स्थानीय अर्थव्यवस्था और पशुपालन आधारित आजीविका पर भी गहरा असर पड़ा है। संचालन के दौरान यह प्रक्षेत्र प्रतिवर्ष 80 से 90 लाख रुपये तक का राजस्व शासन को प्रदान करता था, जो अब पूरी तरह बंद हो चुका है।

कुकुट पालन प्रक्षेत्र का महत्व सिर्फ राजस्व तक सीमित नहीं था। यह केंद्र सरगुजा संभाग के लगभग 4,000 हितग्राहियों को शासन की योजनाओं के तहत चूजा वितरण करता था, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में स्वरोजगार को बढ़ावा मिलता था। इसके अलावा, योजनाओं के अतिरिक्त स्थानीय स्तर पर चार से पाँच हितग्राहियों को नियमित रूप से चूजा उपलब्ध कराया जाता था, जिससे छोटे पैमाने पर कुकुट व्यवसाय को मजबूती मिलती थी।जो शासन की योजन है

स्थानीय बाजार में भी इस प्रक्षेत्र की अहम भूमिका रही है। हितग्राहियों और आम नागरिकों को यहाँ से मुर्गा, बटर और अंडे तक उपलब्ध कराए जाते थे, जो ग्रामीण अर्थव्यवस्था एवं पोषण स्तर दोनों के लिए महत्वपूर्ण साधन थे। प्रक्षेत्र के बंद होने से न केवल रोजगार के अवसर प्रभावित हुए हैं, बल्कि पोल्ट्री उत्पादों की स्थानीय उपलब्धता और बाजार की आपूर्ति श्रृंखला भी बाधित हुई है।

जनप्रतिनिधि एवं स्थानीय जनों का यह मानना है कि यदि शासन की योजनाओं एवं प्रतिनिधियों की मंशा के अनुसार प्रक्षेत्र का स्थानांतरण आवश्यक है, तो स्थानांतरण की प्रक्रिया आगे चलकर की जा सकती है, लेकिन तब तक प्रक्षेत्र को पुनः संचालित करना हितग्राहियों तथा जनता दोनों के हित में होगा। उनका कहना है कि स्थानांतरण की कार्यवाही लंबी प्रक्रिया है, जबकि उपकरण एवं भवन पहले से मौजूद हैं। ऐसे में प्रक्षेत्र को चालू करने में देरी केवल संसाधनों की बर्बादी के साथ-साथ हितग्राहियों को मिलने वाले लाभ में भी बाधा उत्पन्न कर रही है।

स्थानीय हितग्राही और पशुपालक शासन से मांग कर रहे हैं कि प्रक्षेत्र को अविलंब पुनः संचालन में लाया जाए, ताकि पूर्व की भांति लाभार्थियों को चूजा वितरण और पोल्ट्री उत्पाद उपलब्ध हो सकें, तथा स्थानीय अर्थव्यवस्था में फिर से गति आ सके। उनका कहना है कि यदि जल्द कदम नहीं उठाए गए, तो करोड़ों की सामग्री की उपयोगिता और भवनों की संरचना पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा, जिसका नुकसान आने वाले वर्षों तक झेलना पड़ेगा।

सभी की नज़र अब शासन के निर्णय पर टिकी है—क्या करोड़ों की परिसंपत्तियों और हजारों हितग्राहियों के भविष्य को ध्यान में रखते हुए प्रक्षेत्र को फिर से चालू किया जाएगा, या बंद पड़े संसाधन इसी तरह क्षति की ओर अग्रसर रहेंगे? समय इस महत्वपूर्ण मुद्दे का जवाब खुद शासन देगा, परंतु स्थानीय आवाज़ें स्पष्ट हैं—“स्थानांतरण बाद में, संचालन अभी जरूरी।” 

इस संबंध में कोरिया जिले के कलेक्टर ने जानकारी देते हुए बताया कि पोल्ट्री फार्म स्थानांतरण हेतु ग्राम तरगवां में जमीन चिन्हित राज्य सरकार को एक करोड़ से ज्यादा का एस्टीमेट के प्रस्ताव बनाकर भेजा है लेकिन अभी तक बजट नहीं मिला है मामले में प्रभारी मंत्री राम विचार नेताम ने हेचरी को जल्द स्टार्ट करने निर्देश देने के साथ कुछ बजट उपलब्ध कराने की बात कही है आने वाले समय में इस और विशेष ध्यान दिया जाएगा। निश्चित तौर पर कोरिया जिले के कलेक्टर का प्रयास सराहनीय है।

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