नीरज गुप्ता की विशेष रिपोर्ट
कोरिया चरचा कॉलरी......कोरिया जिले के ग्राम पंचायत सरडी के वार्ड क्रमांक 6 बांधपारा में कुछ रसूखदार लोगों द्वारा बिना किसी वैधानिक अनुमति के अवैध ईंट भट्ठा संचालित किया जा रहा है। जानकारी के अनुसार इस भट्ठे में लाखों की संख्या में ईंटें बनाकर लगातार जलाया जा रहा है।
सबसे चिंताजनक बात यह है कि यह भट्ठा शासकीय प्राथमिक शाला और शासकीय माध्यमिक शाला से महज 15–20 फीट की दूरी पर संचालित हो रहा है, जहाँ प्रतिदिन बड़ी संख्या में मासूम बच्चे पढ़ने आते हैं।
धुआँ, धूल और जहरीली गैसों से प्रभावित हो रहे बच्चे........भट्ठे से निकलने वाला धुआँ, धूल, राख और अन्य जहरीली गैसें सीधे स्कूल परिसर और आसपास के आवासीय क्षेत्र में फैल रही हैं। जिससे आमजन के स्वास्थ्य पर विपरीत प्रभाव पड़ने की पूरी आशंका है वर्तमान में गर्मी का मौसम होने के कारण भट्ठे की तेज गर्मी और धुएँ से बच्चों तथा ग्रामीणों को सांस लेने में परेशानी, आंखों में जलन और अन्य स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है।ग्रामीणों का कहना है कि यह भट्ठा जानबूझकर बस्ती के बीचों-बीच लगाया गया है और इसके चारों ओर आवासीय मकान स्थित हैं, जिससे पूरे क्षेत्र में प्रदूषण का असर साफ महसूस किया जा रहा है।स्थानीय लोगों का आरोप है कि भट्ठे में जलाने के लिए कोलरी से निकाले गए चोरी के कोयले का उपयोग किया जा रहा है। उसी कोयले को जलाकर ईंटों को पकाया जा रहा है, जिससे भारी मात्रा में धुआँ और प्रदूषण फैल रहा है।
ग्रामीणों के अनुसार बांधपारा और आसपास के पूरे क्षेत्र में काफी संख्या में ईंट भट्ठा वैधानिक अनुमति के साथ संचालित नहीं है। इसके बावजूद कुछ लोग बिना अनुमति के खुलेआम ईंट भट्ठा चलाकर लाखों ईंटें तैयार कर रहे हैं।खनिज विभाग और संबंधित प्रशासनिक अमले द्वारा अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं किए जाने के कारण ऐसे लोगों का मनोबल बढ़ गया है और वे लगातार अवैध गतिविधियों में लिप्त हैं।
गौरतलब है कि ईंट भट्ठा संचालित करने के लिए खनिज विभाग, राजस्व विभाग और पर्यावरण विभाग से अनुमति लेना अनिवार्य होता है। साथ ही आबादी और शैक्षणिक संस्थानों से सुरक्षित दूरी बनाए रखना भी जरूरी है।इसके बावजूद जिला मुख्यालय कलेक्टर कार्यालय व जिला खनिज अधिकारी कार्यालय से महज पांच किलोमीटर की दूरी पर इस प्रकार का अवैध संचालन प्रशासनिक निगरानी पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है यह सोच का विषय है कि स्कूल के इतने करीब अवैध भट्ठा कैसे संचालित हो रहा है, जब पूरे क्षेत्र में एक भी वैध भट्ठा नहीं है तो यह संचालन किसके संरक्षण में हो रहा है?क्या बच्चों के स्वास्थ्य से बड़ा है अवैध कारोबार? नियमों के अनुसार बस्ती और स्कूलों के नजदीक इस प्रकार के भक्तों का संचालन प्रतिबंधित माना जाता है
स्थानीय नागरिकों ने प्रशासन से मांग की है कि बच्चों के स्वास्थ्य और जनहित को ध्यान में रखते हुए इस अवैध ईंट भट्ठे की तत्काल जांच कराई जाए और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए, ताकि क्षेत्र में फैल रहे प्रदूषण और अवैध गतिविधियों पर रोक लग सके।

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